May 18, 2026दून की सड़कों पर जुगाड मालवाहक वाहनों की आयी बाढ़ देहरादून। राजधानी देहरादून की सड़कों पर जुगाड मालवाहक वाहनों की बाढ़ आ गयी है। प्रशासन व सम्बन्धित विभाग की शायद कार्यवाही तब होगी वह भी कुछ दिन के लिए,जब यह यमराज किसी की जान ले लेगा।बता दें कि राजधानी देहरादून में बीते कई वर्षो से जाम व सड़क हादसों की बाढ़ सी आयी हुई है। सम्बन्धित विभाग व प्रशासन हर बार दावे करता है कि वह शहर से जाम व सड़क हादसों का यह क्रम जल्द ही दूर कर देगा। लेकिन वह अपने वायदों मेें कामयाब नही हो पा रहा है। ऐसा इसलिये है कि क्योंकि यातायात से सम्बन्धित विभाग अपने काम को सही व सूचारू ढंग से नही कर पा रहे है। जबकि इन विभागों के अधिकारी हर समय दावा करने से पीछे नहीं हटते है कि वह जल्द इन समस्याओं का समाधान कर देगें। सड़क हादसे कैसे हो सकते है इसका ताजा उदाहरण सड़क के बीचोबीच यह तस्वीर देखकर लगाया जा सकता है। जिसमें जुगाड़ वाहन बिना कागजो के सड़क पर लोडर वाहनो की तरह दौड़ रहे है।बता दे कि यह वाहन कई चौराहों से होकर आया होगा लेकिन किसी ने इसको रोका नही। 2 मीटर के तथाकथित वाहन पर 6 मीटर की खतरनाक लोहा यही नही मोबाइल पर भी लगा ,जैसे ही अचानक रोकेगा, पीछे बाला वाहन इसमें समा जायेगा,यह स्थिति तब होगी जब आगे बाला अचानक रोकेगा तो वह इसमें समा जायेगा,इसका कुछ नही बिगड़गा। प्रशासन की समझ में यह कब आयेगा, सोचनीय सवाल है।
May 18, 2026पत्थर के घर उजड़े, तिबारियां टूटीं तो घन्दूणी ने भी छोड़ दिया आंगन पहाड़ के गांवों से घन्दूणी के गायब होने के साथ मिट गई बचपन की यादें देवभूमि के उजड़ते गांवों और रिश्तों की सबसे भावुक दास्तान है घन्दूणी घन्दूणी का मौन दे रहा पलायन का दंश झेल रहे पहाड़ के गांवों की गवाही देहरादून। पहाड़ के पारंपरिक पत्थरों वाले मकानों की खोली, लकड़ी की नक्काशीदार खिड़कियां और आंगन में सूखता मडुआ… इन सबके बीच जो एक आवाज पहाड़ के सुबह की पहचान हुआ करती थी, वह थीकृचीं-चीं, चूँ-चूँ। उत्तराखंड की लोकभाषा में जिसे बड़े लाड से घन्दूणी कहा जाता है, यानी हमारी अपनी गौरैया। पहाड़ के गांवों में कभी सुबह की शुरुआत घन्दूणी यानी गौरैया की चहचहाहट से होती थी। पत्थर की छतों और लकड़ी की तिबारियों वाले घरों में फुदकती यह छोटी चिड़िया गांव की रौनक मानी जाती थी। लेकिन अब बदलते पहाड़, तेजी से बढ़ते पलायन और आधुनिक निर्माण शैली के बीच घन्दूणी की आवाज भी धीरे-धीरे खामोश पड़ने लगी है।पहाड़ के लोकगीतों में गौरैया यानी घन्दूणी को मैत की डाकिया कहा गया है। यह चिड़िया इस बात की गवाह है कि पहाड़ का सौंदर्य सिर्फ बर्फबारी और पहाड़ों की ऊंचाई में नहीं, बल्कि इन आंगनों की जीवंतता में है। आज उत्तराखंड के हजारों गांव आज पलायन की मार झेल रहे हैं। रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग शहरों की ओर जा रहे हैं, जिन आंगनों में कभी बच्चों की किलकारियां और महिलाओं की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। इसी बदलते माहौल का असर घन्दूणी यानी गौरैया पर भी दिखाई दे रहा है।मेरे ननिहाल दानकोट गांव के चेतराम बताते हैं कि पहले सुबह होते ही दर्जनों गौरैया आंगन में आती थीं। महिलाएं चावल और झंगोरे के दाने डालती थीं और बच्चे घंटों उन्हें देखते रहते थे। लेकिन अब गांवों में पुराने घर टूट रहे हैं और उनकी जगह सीमेंट के आधुनिक मकान ले रहे हैं। इन मकानों में ना तो लकड़ी के छज्जे बचे हैं और ना ही छोटी दरारें, जहां गौरैया अपने घोंसले बनाया करती थी।बुडोली रूद्रप्रयाग के मोहन सिंह कहते हैं कि पहले घन्दूणी की आवाज से लगता था गांव जिंदा है। अब कई दिनों तक उसकी चहचहाहट सुनाई नहीं देती। उनके अनुसार गांवों से पहले लोग गए और अब धीरे-धीरे पक्षी भी गायब होने लगे हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि गौरैया मानव बस्तियों के साथ रहने वाली चिड़िया है। पुराने पहाड़ी घर, गौशालाएं, खुले आंगन और स्थानीय खेती उसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते थे। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में जैसे-जैसे गांवों की पारंपरिक संरचना खत्म हो रही है, वैसे-वैसे गौरैया का प्राकृतिक संसार भी सिमटता जा रहा है।पर्यावरणविदों का कहना है कि गौरैया का कम होना केवल एक पक्षी का गायब होना नहीं, बल्कि पहाड़ की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में आए बदलाव का संकेत है। पहाड़ के गांवों से जब इंसानों की रौनक खत्म हुई, तो घन्दूणी की चहचहाहट भी धीरे-धीरे यादों में बदलने लगी है। यदि गांवों में पारंपरिक आंगन, पेड़-पौधे और स्थानीय वातावरण को बचाने की दिशा में प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाले समय में गौरैया सिर्फ किताबों और यादों तक सीमित होकर रह जाएगी।उत्तराखंड के कई गांवों में घर बंद पड़े हैं और आंगन सूने हो चुके हैं। ऐसे में घन्दूणी का गांवों से दूर होना लोगों को भावनात्मक रूप से भी प्रभावित कर रहा है। आज भी कई बुजुर्ग हर सुबह आंगन में कुछ दाने डाल देते हैं। शायद इस उम्मीद में कि कभी फिर घन्दूणी लौटेगी और उसके साथ लौट आएगा पहाड़ का पुराना जीवन, पुरानी गर्माहट और वह खोई हुई रौनक। कंक्रीट के जंगल से उजड़ा आशियानाउत्तराखंड के देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार में तो कंक्रीट के मकानों और मोबाइल टावरों के रेडिएशन ने गौरैया को पहले ही गायब कर दिया था, लेकिन अब पहाड़ के ग्रामीण इलाकों में भी घन्दूणी का वजूद खतरे में है। कहते है कि जब किसी गांव से पलायन होता है और घरों पर ताले लटक जाते हैं, तो वहां खेती बंद हो जाती है। घन्दूणी को इंसानों के बीच रहने और उनके आंगनों से दाना चुगने की आदत होती है। इंसानों के जाते ही यह चिड़ियां भी भूखी मर जाती हैं या वहां से पलायन कर जाती हैं। पहाड़ के पुराने तिबारी वाले मकानों की छतों और कड़ियों के बीच गौरैया आसानी से घोंसला बना लेती थी। अब वहां भी सीमेंट के पक्के लेंटर वाले मकान बन रहे हैं, जिनमें इस नन्हीं चिड़िया के लिए कोई कोना नहीं बचा हुआ है।
May 18, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एचडीएफसी बैंक द्वारा प्रदत्त चार अत्याधुनिक एम्बलेंस का फ्लैग ऑफ किया।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से एचडीएफसी बैंक की कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के अंतर्गत जनहित के लिए प्रदान की गई 4 अत्याधुनिक एम्बुलेंस का फ्लैग ऑफ किया। यह पहल राज्य के दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। निजी संस्थाओं द्वारा जनहित में किया जा रहा सहयोग सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। एचडीएफसी बैंक द्वारा सीएसआर के माध्यम से उपलब्ध कराई गईं ये एम्बुलेंस जरूरतमंद लोगों तक त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। राज्य सरकार जनभागीदारी एवं संस्थागत सहयोग के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने एचडीएफसी बैंक की इस जनकल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों, आपदा की स्थितियों तथा दूरस्थ क्षेत्रों में ऐसी सेवाएं अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्य पर्वतीय जनपदों और आगामी हरिद्वार कुंभ के लिए भी एचडीएफसी बैंक से सीएसआर के माध्यम से और एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की अपेक्षा की है। बैंक अधिकारियों ने अवगत कराया कि इन एम्बुलेंस में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं एवं आवश्यक आपातकालीन उपकरण उपलब्ध हैं, जिससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही आगामी तीन वर्षों तक प्रत्येक एम्बुलेंस में चिकित्सक, नर्स, अटेंडेंट एवं चालक की व्यवस्था भी बैंक द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।प्रारंभिक चरण में ये एम्बुलेंस चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़ एवं रुद्रप्रयाग जनपदों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगी तथा भविष्य में राज्य के प्रमुख धार्मिक आयोजनों एवं आपदा प्रबंधन कार्यों में भी इनका उपयोग किया जाएगा। इस अवसर पर विधायक राजकुमार पोरी, विनोद कंडारी,अपर सचिव मनमोहन मैनाली, एचडीएफसी बैंक के से मुस्कान सिंह (ब्रांच बैंकिंग हेड— नॉर्थ 3), संजीव कौशिक (रीजनल हेड— नॉर्थ 3), जोनल हेड उत्तराखंड बकुल सिक्का, स्टेट हेड उत्तराखंड गौरव जैन एवं आयुष सिंघल मौजूद थे।
May 18, 2026देहरादून। श्रमिकों की आड में उपद्रव करने वाले तीन उपद्रवियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।आज यहां डिक्सन फैक्ट्री में श्रमिकों द्वारा अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था, जिसमें श्रमिकों की आड़ में कुछ उपद्रवी लोगों द्वारा फैक्ट्री परिसर व पुलिस पर पथराव किया गया। जिसके संबंध में थाना सेलाकुई पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था, उक्त घटना में शामिल उपद्रवियों की गिरफ्तारी हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा थानाध्यक्ष सेलाकुई को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। पुलिस टीम को सूचना प्राप्त हुई कि कुछ लोग संगठित होकर कम्पनियों व मोहल्लो में जाकर, कम्पनियों में कार्य करने वाले श्रमिकों को भड़का रहे है और काम पर जाने वाले लोगो को काम में जाने से रोकने के लिए उनके साथ जोर जबरदस्ती कर मारपीट पर उतारु हो रहे है। उक्त व्यक्तियों में से कुछ पूर्व में पत्थरबाजी की घटना में भी शामिल थे। उक्त सूचना पर पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुँचा, मौके पर कुछ व्यक्तियों द्वारा एकराय व संगठित होकर शान्ति एवं कानून व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया जा रहा था, जो किसी प्रकार का संज्ञेय अपराध कारित कर सकते थे तथा पुनः पत्थर बाजी जैसी घटना व किसी अन्य प्रकार से लोक प्रशान्ति एवं कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न कर सकते थे, जिस पर पुलिस द्वारा मौके से 03 व्यक्तियों को ऑपरेशन प्रहार के अन्तर्गत धारा 170 बीएनएसएस में गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम सलमान पुत्र गुलशेर निवासी अंबेडकर कालोनी जमनपुर, सेलाकुई, तैयब पुत्र आशिक खान निवासी कोरोकैय्या, थाना सिनौली, जिला शाहजहांपुर, उ.प्र. हाल पता जमनपुर, सेलाकुई, अजीम पुत्र वसीम अंसारी निवासी बहादरपुर, थाना मोहम्मदी, जिला लखीमपुर खीरी, उ.प्र. हाल पता जमनपुर, सेलाकुई बताया।
May 18, 2026जल पुलिस और गोताखोर तलाश में जुटे हरिद्वार। बीमारी से जूझ रहे एक युवक ने मेहवड़—कलियर के बीच गंगनहर में छलांग लगा दी। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने जल पुलिस और गोताखोरों की टीम के साथ युवक की तलाश शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार कासगंज अलीगढ़ उत्तर प्रदेश निवासी हेम सिंह (32) पिछले कुछ समय से किडनी की गंभीर बीमारी से ग्रसित था। वह अपने भाई ओम शंकर के साथ बाइक से उपचार के लिए ऋषिकेश एम्स जा रहा था। बताया जा रहा है कि मेहवड़—कलियर के बीच निर्माणाधीन पुल के पास पहुंचने पर हेम सिंह ने भाई से टॉयलेट जाने की बात कहकर बाइक रुकवाई और इसी दौरान उसने अचानक गंगनहर में छलांग लगा दी। भाई ओम शंकर ने शोर मचाते हुए उसे बचाने का प्रयास किया। लेकिन तेज बहाव के चलते युवक देखते ही देखते पानी में डुबकर लापता हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जल पुलिस व गोताखोरों की मदद से सर्च अभियान शुरू कराया। कोतवाली प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने बताया कि गंगनहर में डूबकर लापता हुए युवक की तलाश की जा रही है।
May 18, 2026देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सत्ता संभालने से ही जिस तरह बड़ी—बड़ी बातें, वायदे और दावे किए भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ट्टमोदी है तो मुमकिन है’ के नारे के जरिए इसे इस कदर हवा दी गई कि देश के लोग तो भ्रमित हो ही गए खुद नरेंद्र मोदी भी स्वयं की उत्पत्ति को नॉन बायोलॉजिक घोषित की भ्रांति का शिकार हो गए। सत्ता के शीर्ष पर बैठे किसी व्यक्ति को अगर अपने भगवान होने का भरम पैदा हो जाए तो इसके क्या परिणाम होंगे वर्तमान की राजनीतिक और सामाजिक स्थितियां इसकी गवाही दे रही है हास्यास्पद बात यह है कि देश पर आए बड़े आर्थिक संकट की बात कहकर और राष्ट्रवाद के नाम पर जनता से अपने सुख तथा संसाधनों के त्याग की अपील करने के बाद पांच देशों की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड में लोगों को संबोधित करते हुए जिस तरह भारत के विकास और देश के युवाओं के लिए लिमिटलेस एफर्ट का उपदेश दिया और भारत के विश्व गुरु होने की बात कही उस पर भले ही नीदरलैंड के लोग तालियां बजा रहे हो लेकिन देश के लोग उनका मजाक बना रहे हैं। लोग सोच रहे हैं कि पीएम मोदी कैसे इतने बड़े—बड़े झूठ बोल लेते हैं? एक तरफ देश के युवा रोजगार के लिए धक्के खा रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सरकारी सेवाओं के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं और युवा आत्महत्याए करने पर मजबूर हो रहे हैं? अभी—अभी नीट की परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने से कोहराम मचा हुआ है। गोवा के एक छात्र ने आत्महत्या से पूर्व अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि अब वह कोई प्रतियोगी परीक्षा नहीं देगा। इस छात्र का यह अंतिम प्रयास था जो पेपर लीक होने के कारण रद्द की गई परीक्षा के वजह से बेकार चला गया उसका दर्द न तो सरकार समझ सकी न ही वह सिस्टम जो भाजपा की सरकार द्वारा बनाया गया है। उसके परिवार का दर्द जिसने अपने 22 साल के पढ़े लिखे बच्चे को खो दिया प्रधानमंत्री मोदी का भाषण जले पर नमक छिड़कने से कम नहीं है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने नीट की परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक मामले को लेकर अपने एक्स हैंडल पर जो पोस्ट लिखी गई है काबिले गौर है अब तक 80 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की बात लिखते हुए उनके द्वारा भाजपा तथा संघ द्वारा तैयार किए गए उस नेक्सस पर उन्होंने तीखा वार किया है जिसने देश के एजुकेशन सिस्टम और प्रतियोगी परीक्षा को कमाई का धंधा बना दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को 2 करोड़ हर साल रोजगार देने का वायदा किया था लेकिन वह 2 लाख को भी रोजगार नहीं दे सके हैं। कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने सबसे पहले उन्हें जब फेकू प्रधानमंत्री कहा था तब तमाम भाजपा के नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री की शान में गुस्ताखी बताया था। लेकिन अब सोशल मीडिया पर पीएम के झूठों की फेहरिस्त देखी जा सकती है सब कुछ सबके सामने है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भले ही भाजपा चुनाव दर चुनाव जीत रही हो लेकिन अब उनकी कितनी विश्वसनीयता शेष बची है? इसे अब भाजपा के नेता भी जान चुके हैं जनता की बात तो छोड़ ही दीजिए। हैरता की बात यह है कि उनके द्वारा अभी भी लंबी—लंबी फेंकने में कोई कमी नहीं की जा रही। विकसित भारत और पांच ट्रिपलिन वाली इकोनामी तथा युवाओं के युक्त देश की तस्वीर। इससे बड़ी और दूसरी कोई विडंबना भला क्या हो सकती है। यह भी इसलिए संभव है क्योंकि मोदी है तो मुमकिन है।