इन दिनों देश की राजनीति सवालों के विवाद में चकरघन्नी बनी हुई है। देश की सरकार और सत्ता में बैठे नेताओं को किसी का भी कोई सवाल करना ही नागवार लगता हो तो उनसे आप किसी भी सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद तो कर नहीं सकते। यही कारण है कि सवालों के अंबार लगते जा रहे है लेकिन जवाब किसी भी सवाल का आ नहीं रहा है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जो सवालों की आंधी आई हुई है उसने सवाल करने वालों को मुश्किल में डाल ही दिया जवाब न देने वाले भी खुद को मुश्किलों के भंवर में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस हमले के बाद पहला सवाल खड़ा हुआ था पहलगाम में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर? लेकिन सरकार ने इस पर चुप्पी साध ली उसके बाद फिर सवाल ऑपरेशन सिंदूर को समाप्त करने को लेकर। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सीज फायर के फैसले की घोषणा को लेकर विपक्ष व मीडिया के द्वारा जब ट्रंप को चौधरी बनाने पर सवाल खड़े किए गए। ट्रंप भले ही इस मुद्दे पर अपने कदम वापस खींचते दिखे लेकिन सत्ता पक्ष यहां भी खामोशी ही साधे रहा। इस बीच विदेश मंत्री जयशंकर का एक और बयान आ गया जिसमें उन्होंने साफ कहा कि हमने पाकिस्तान को पहले ही बता दिया था कि हम हमला करने वाले हैं। उनके इस बयान से लोगों को हैरान होना ही था लोगों ने सवाल पूछा कि क्या किसी देश पर ऐसे यह बता कर हमला किया गया है कि हम हमला करने वाले हैं तो यह राष्ट्र द्रोह की श्रेणी में आता है अब विपक्ष पूछ रहा है कि सरकार बताएं कि पाकिस्तान को पूर्व सूचना दिए जाने से भारत को कितना नुकसान हुआ? कितने हमारे लड़ाकू विमानो को क्षति पहुंची व कितने सैन्य कर्मी शहीद हुए। इस सवाल का कोई जवाब भी नहीं है। पहलगाम के आतंकी हमले के बाद वह आतंकी कहां गए उनका क्या हुआ? तथा देश को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कितना नुकसान हुआ इसका कुछ पता नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर सीज फायर के साथ समाप्त हो गया है या जारी है कुछ पता नहीं। अब सरकार द्वारा देश में जो तिरंगा शौर्य यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है उनके बीच भाजपा के मंत्री व नेता जो कर्नल सोफिया को आतंकियों की बहन बता रहे हैं वह सही है या सरकार शौर्य यात्राएं लोग इस पर सवाल पूछते दिख रहे हैं। इसी बीच अब सरकार ने सर्वदलीय सांसदों के प्रतिनिधित्व मॉडल को विश्व के कई दर्जन देशों में भेजने का एक और कार्यक्रम लॉन्च कर दिया है। जिसका उद्देश्य विश्व के देशों को यह बताना है कि पाकिस्तान कैसे अपनी धरती से आतंकी गतिविधियों का संचालन करता है जो विश्व भर के लिए बड़ा खतरा है। लेकिन इस प्रतिनिधि मंडल में सरकार ने अपने मनमानी तरीके से सांसदों का चयन किया इस पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस प्रतिनिधिमंडल को लेकर ही जब इतना विवाद उठ रहा है तो क्या वह अपने उद्देश्य को पूरा करेगा? हकीकत भी यही है कि यह सिर्फ इन सांसदों का विदेशी टूर करने से ज्यादा कुछ नहीं है पाकिस्तान के बारे में समूचा विश्व पहले ही वह सब कुछ जानता है जो आपके सांसद भी शायद नहीं जानते होंगे। इसी बीच सर्वाेच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का भी शपथ ग्रहण हो चुका। जिनके शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति द्वारा उनसे 14 सवाल पूछे जाने और मुंबई दौरे में प्रोटोकॉल की अवहेलना को लेकर 100 सवाल सरकार पर खड़े हो रहे हैं। सोफिया को आतंकियों की बहन बताने वाले मंत्री पर कोई कार्रवाई भाजपा द्वारा न किये जाने और प्रोफेसर खान को उनकी एक ऐसी पोस्ट के लिए जिसमें आपत्तिजनक कुछ नहीं है गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने जैसे मुद्दों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल और सिर्फ सवाल। तथा इन सवालों को लेकर कोई जवाब नहीं उसकी जगह सिर्फ बवाल ही बवाल या फिर विवाद ही विवाद। यह समझ से परे हो चुका है कि क्या इस देश की राजनीति सिर्फ सवाल और विवाद तथा बवालों के ऐसे चक्रव्यूह में फंस चुकी है जिससे उसका बाहर निकलवा पाना संभव नहीं है।


