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अवैध खनन, कार्यवाही, रार और राजनीति !

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  • केंद्रीय नेता भी नेताओं की रार से हैरान
  • अवैध खनन पर ताबड़तोड़ कार्यवाही जारी

देहरादून। इन दिनों उत्तराखंड की सियासत अवैध खनन के मुद्दे पर इस कदर गर्माई हुई है कि भाषाई मर्यादाओं को लंाघते नेताओं को इस बात की भी परवाह नहीं है कि वह किसका नुकसान कर रहे हैं। मजेदार बात यह है कि अवैध खनन पर कार्यवाही और तकरार तथा राजनीति एक साथ चल रही है।
अभी 2 दिन पूर्व हरिद्वार सांसद और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत ने संसद में राज्य के चार जिलों में अवैध खनन और उससे होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया था। अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने के पीछे उनकी मंशा क्या रही होगी यह तो वही जाने लेकिन उनके इस तीर का असर इतना ज्यादा हुआ कि सरकार ने खनन सचिव को बचाव में उतार दिया। जिन्होंने अवैध खनन का खण्डन ही नहीं किया राजस्व प्राप्तियों के आंकड़े तक पेश कर डालें। एक सांसद के सवालों का जवाब एक अधिकारी दे। इस बात से त्रिवेंद्र इस कदर तिलमिला गए कि उन्होंने कह दिया कि शेर कुत्तों का शिकार नहीं करते हैं। खुद को शेर बताने वाले सांसद त्रिवेंद्र रावत ने कुत्ता शब्द का इस्तेमाल किसके लिए किया यह अलग बात है लेकिन उनके बयान से सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्मा जाना स्वाभाविक ही था।
पूर्व सीएम हरीश रावत ने उनके बयान पर जिस तरह की टिप्पणी की है वह साफ तौर पर यह बताती है कि विपक्ष कांग्रेस के नेता इस मुद्दे पर किस कदर चुटकी ले रहे हैं। उन्होंने प्रेम प्रसंग का उल्लेख करते हुए सभी भाजपा नेताओं को लपेटे में ले लिया तथा इसे भाजपा नेताओं के अहंकार से जोड़ते हुए त्रिवेंद्र को गलत ठहरा दिया। धामी और त्रिवेंद्र के बीच सियासी अदावत के कारण उपजे इस विवाद पर भाजपा के शीर्ष नेता भी हैरान परेशान है।
वहीं दूसरी ओर राज्य में इन दिनों अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई भी ताबड़तोड़ जारी है। एक दिन पूर्व विकास नगर क्षेत्र में अवैध खनन से लदे कई डंपर व ट्रैक्टर ट्राली सीज किए गए थे तो बीती रात पौड़ी में तीन अवैध खनन में जुटे वाहनों को सीज किया गया है। जो इस बात को बताता है कि त्रिवेंद्र ने जो मुद्दा संसद में उठाया था वह गलत नहीं था लेकिन कुछ लोग इसे त्रिवेंद्र सिंह रावत की सीएम की कुर्सी जाने की टींस से भी जोड़कर देख रहे हैं जब मार्च 2021 में उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था। खनन तो इस रार के लिए सिर्फ बहाना भर बताया जा रहा है। सवाल यह भी है कि क्यों अवैध खनन को लेकर किसी नेता को वैसी चिंताएं भी हो सकती है जैसी कि त्रिवेंद्र रावत द्वारा दिखाई जा रही है।

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