नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के दौरान भगदड़ मचने से मौत का आंकड़ा 121 पर पहुंच गया है, जबकि 35 लोग घायल हुए हैं. इनमें कुछ की हालत गंभीर है. अब भी 20 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। सत्संग वाले ‘भोले बाबा’ हादसे के बाद से ही फरार हैं। हाथरस हादसे की प्रथम जांच रिपोर्ट से पता चला है कि हाथरस में स्वयंभू बने भोले बाबा का सदमार्ग दर्शन उनके भक्तों के लिए काल बन गया। बाबा के चरणों की मिट्टी की पाने की होड़ उनके भक्तों को मौत के मुंह में ले गई। मिली जानकारी के मुताबिक, इस मिलन समागम के लिए भोले बाबा समिति द्वारा पहले इटावा में प्रशासन से अनुमति मांगी थी, लेकिन इटावा में परमिशन न मिलने के कारण स्थान परिवर्तन करते हुए हाथरस जिले में भोले बाबा का सत्संग रखा गया। यहां पर जिला प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद 2 जुलाई को बाबा का समागम हुआ, जिसमें भगदड़ मच गई, मिलन समागम चीत्कार में बदल गया।
प्रशासन द्वारा बनाई जांच समिति की प्रथम रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि भोले बाबा के चरणों की रज पाने को लेकर धक्का मुक्की हुई है। बाबा के सेवादारों द्वारा भीड़ के साथ धक्का मुक्की की गई, जिसके चलते भीड़ अनियंत्रित हो गई। सड़कों के डिवाइडर पर पहले से लोग मौजूद थे,जैसे ही बाबा का काफिला गुजरा तो उसकी मिट्टी लेने, चरणों को नमन करने होड़ लग गई। लोग गिर गए, भीड़ उनपर से गुजराती चली गई।




