May 5, 2026देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजे के आने के बाद अब हर जगह इन चुनावी नतीजो की समीक्षा का दौर जारी है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 15 सालों से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी और उनकी टीएमसी की सरकार को उखाड़ फेंकने में सफलता हासिल कर ली है वहीं असम और पांडुचेरी में अपनी सरकार बचाए रखकर मोदी है तो मुमकिन है कि नारे को तमाम बाधाओ और विसंगतियों के बावजूद भी सत्य साबित कर दिया है। पश्चिम बंगाल में भी भगवा लहरा कर भाजपा ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब किसी भी क्षेत्रीय दल या राष्ट्रीय दल में इतना दम—खम नहीं है जो उसके विजय रथ को रोक सके। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को छोड़कर देश के 23 राज्यों में अपनी सत्ता स्थापित कर चुकी भाजपा ने पश्चिम बंगाल की जीत के साथ एक नया इतिहास रच दिया है। ऐसी स्थिति में उसका जश्न मनाना अति स्वाभाविक है। इन पांच राज्यों के चुनावी नतीजो में जहां पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत एक बड़ी राजनीतिक घटना है तो वहीं दूसरी चौंकाने वाली घटना है तमिलनाडु में अभिनेता विजय थलापति की नई नवेली पार्टी टीबीके का 107 सीटे जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आना। भले ही टीबीके बहुमत से 11 सीटें पीछे रह गई हो लेकिन स्टालिन को पटखनी देने वाले विजय की इस विजय ने यह सत्य पुनर्स्थापित कर दिया है कि दक्षिण की राजनीति में फिल्म स्टारों के युग का अभी अंत नहीं हुआ है इन पांच राज्यों के चुनावी नतीजों में यह बात कहीं भी कोई मायने नहीं रखती है कि किस पार्टी को कहां कितनी सीटें मिली और किसने किस प्रत्याशी को कितने मत्तांतर से हराकर जीत दर्ज की है महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के राष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय दलों में अब कौन ऐसा दल या पार्टी बची है जो भाजपा का मुकाबला कर सकती है राज्य दर राज्य क्षेत्रीय दलों की वर्चस्व को धराशाही करती हुई भाजपा के सामने क्या कोई क्षेत्रीय छत्रप टिका रह सकेगा? बात चाहे बिहार की हो या महाराष्ट्र की अर्थात उत्तर प्रदेश की हो या पश्चिम बंगाल की। जो पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था उसे फतह करने के बाद अब उत्तर प्रदेश में सपा के सामने भी यह सवाल एक यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा हो गया है वही उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए भाजपा को जीत की हैट्रिक से रोक पाने की चुनौती और भी गंभीर हो गई है। अगर भाजपा की अब तक की विजय यात्रा पर गौर करें तो इस पार्टी की आर्थिक स्थिति की मजबूती ही उसकी जीत का अहम कारण रही है जिसके दम पर भाजपा ने केंद्रीय सत्ता में आने के बाद मीडिया से लेकर तमाम सरकारी तंत्र और एजेंसियों को अपने अनुरूप बना लिया है तथा देश की आधी आबादी के वोट बैंक को अपने पक्ष में साधने में सफलता हासिल कर ली है भले ही नारी बंधन अधिनियम को लंबे समय तक लटकाए रखा गया हो और पीएम मोदी देश के लोगों को मुफ्त की रेवड़िया बांटने वालों से सावधान रहने की नसीहत दे रहे हो लेकिन चुनावों में महिलाओं के खातों में डायरेक्ट मोटी रकम ट्रांसफर करने का काम भी बखूबी किया जा रहा है अब यही आधी आबादी और उसका वोट भाजपा और मोदी के लिए जीत की गारंटी बन चुका है। भले ही अब भाजपा की सरकार कुछ भी करती रहे और विपक्षी दल कितना भी जोर लगा ले वह भाजपा को नहीं हरा पाएंगे क्योंकि उनके पास मुफ्त की रेवड़ियंा बांटने के लिए धन नहीं है।
May 5, 2026पिथौरागढ़। बारात की मेहंदी से वापस घर लौट रहे लोगों की जीप अनियंत्रिंत होकर गहरी खाई में जा गिरी। जिस कारण एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि अन्य तीन गम्भीर रूप से घायल हुए है। सूचना मिलने पर एसडीआरफ ने मौके पर पहुंच कर स्थानीय लोगों की मदद से मृतक व घायलों को बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया। जहंा घायलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।सड़क दुर्घटना का यह मामला मूनाकोट ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत बसौड ग्राम के बनी गाड़ के समीप का है। जानकारी के अनुसार बीती रात 12.30 बजे एक जीप बोरागांव में बारात की मेहंदी से लौट रही थी। जीप जब बनी गाड़ के मोड पर पहुंची तो वह अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। जिसमें सवार लकी चंद की मौके पर ही मृत्यु हो गई जबकि अन्य तीन गंभीर अवस्था में घायल हो गए। घायलों की पहचान मोहन सिंह पुत्र रमेश सिंह ग्राम बासोड़ वाहन चालक जगदीश सिंह पुत्र चंचल सिंह वं पवन चंद्र निवासी पुत्र मोहन चंद मुन्ना निवासी मूनकोट के रूप में हुई है। घटना के पता चलने पर तुरंत पीछे से स्कूटर में आ रहे हैं लोगों द्वारा गांव वालों को जानकारी दी और बचाव कार्य किया गया। सूचना मिलने पर क्षेत्र के एसएचओ झुलाघाट संजीव कुमार एवं टीम द्वारा तथा पिथौरागढ़ से एसडीआरएफ टीम द्वारा सुबह शव को खाई से निकला गया एवं पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। जबकि घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया जहंा उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
May 5, 2026हरिद्वार। गिरफ्ट सेंटर के गोदाम में देर रात भीषण आग लगने से अफरा—तफरी फैल गयी। सूचना मिलने पर पुलिस व दमकल विभाग के कर्मियों ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया। आग लगने की इस घटना में कोई मानव क्षति तो नही हुई है लेकिन लाखों के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।जानकारी के अनुसार बीती देर रात अंबर तालाब क्षेत्र में नेहरू स्टेडियम के पास स्थित एक गिफ्ट सेंटर के गोदाम में अचानक भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और ऊंची—ऊंची लपटें दूर—दूर तक दिखाई देने लगीं, जिससे आसपास के लोगों में अफरा—तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गोदाम में बड़ी मात्रा में सजावटी और ज्वलनशील सामान रखा हुआ था, जिसके कारण आग ने तेजी से पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन नेहरू स्टेडियम के पीछे की संकरी गलियों के चलते दमकल कर्मियों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अन्य क्षेत्रों से भी अतिरिक्त दमकल गाड़ियों को बुलाया गया। दमकल विभाग की टीम ने घंटों की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया। गोदाम रिहायशी इलाके में स्थित होने के कारण आसपास के घरों में भी आग फैलने का खतरा बना रहा, हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन लाखों केनुकसान की आशंका जताई जा रही है।
May 5, 2026पत्थरों की विरासत और लकड़ी पर उकेरे होते थे भगवान यह है आस्था, प्रकृति और लोकजीवन का अद्भुत संगम आज पहाड़ में कई घरों में लटके हैं ताले और दीवारें ढह रही खंडहरों में खोली के गणेश आज भी अपनी जगह पर अडिग देहरादून। हिमालय की वादियों में जब सर्द हवाएं चलती हैं और धुंध की चादर पुराने गांवों को ढक लेती है, तब भी ऊंचे पहाड़ों पर बने पठाल की छत वाले घरों की चौखटें एक अलग ही चमक बिखेरती हैं। इन घरों के मुख्य द्वार, जिसे पहाड़ी में खोली कहा जाता है, पर विराजे गणेश जी केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि उस घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य की तरह पहरेदार होते हैं।पहाड़ के गांवों में जाने पर गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी का यह मांगल गीत याद आता है-दैणा होया खोली का गणेशा हे…दैणा होया मोरी का नारेणा हे… पहाड़ के उन पुराने घरों को देखकर जिनकी खोलियों में आज भी गणेश जी विराजमान है। आपको बता दें कि पुराने समय में जब पहाड़ में घर बनते थे, तो सबसे पहले स्थानीय शिल्पकार को बुलाया जाता था। वह केवल मिस्त्री नहीं, बल्कि एक कलाकार होता था। टुन या देवदार की सख्त लकड़ी पर जब उसकी छैनी चलती थी, तो वह सबसे पहले चौखट के ठीक बीचों-बीच सिरदल पर एक छोटा सा सिंहासन बनाता था।उस छोटे से खांचे में भगवान गणेश की आकृति उकेरी जाती थी। हाथ में मोदक, बड़ी सूंड और सौम्य आंखेंकृ गणेश जी का यह स्वरूप विघ्नहर्ता के रूप में घर की दहलीज पर बैठ जाता था। माना जाता था कि जिस घर की खोली में गणेश होंगे, वहाँ दुख और दरिद्रता कभी प्रवेश नहीं कर पाएगी।यह दर्शाता है कि देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों में धार्मिक आस्था केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकजीवन की हर परत में रची-बसी है। गढ़वाल और कुमाऊं के ग्रामीण इलाकों में आज प्रकृति, परिवार और संस्कृति के गहरे संबंध खोली के गणेश के रूप में दिखते हैं। पहले पहाड़ के हर घरों के मुख्य द्वार पर गणेश की आकृति होती थी, लेकिन बदलते परिवेश में यह अब यह कम दिखती है।पहाड़ी की संस्कृति और स्थापत्य कला में खोली का गणेश मात्र एक मूर्ति नहीं, बल्कि घर की मर्यादा, सुरक्षा और सौभाग्य का प्रतीक है। पहाड़ों के पुराने घरों की नक्काशीदार लकड़ी की चौखट ‘खोली’ के ऊपर विराजमान गणेश जी की यह परंपरा आज भी पहाड़ की पहचान है। पहाड़ी भाषा में खोली का अर्थकृमुख्य द्वार या देहरी होता है। हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना गया है। शायद यही कारण रहा होगा कि हमारे बुर्जूगों ने इसे सर्वोच्च स्थान दिया होगा।आज जब हम पहाड़ के वीरान होते गांवों की ओर देखते हैं, तो दिल बैठ जाता है। कई घरों में ताले लटके हैं, दीवारें ढह रही हैं, लेकिन उन खंडहरों की चौखटों पर आज भी वह खोली का गणेश अपनी जगह पर अडिग है। पलायन ने इंसान को तो घर से दूर कर दिया, लेकिन गणेश जी आज भी उसी सूनी देहरी की रक्षा कर रहे हैं। कई लोग अब इन पुरानी चौखटों को उखाड़कर शहरों में ले जा रहे हैं, ताकि आधुनिक कंक्रीट के घरों में अपने पूर्वजों की उस आस्था को फिर से जीवित कर सकें।
May 4, 2026गंभीर अनियमितताएं हुई उजागर देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज सब-रजिस्ट्रार कार्यालय विकासनगर में औचक निरीक्षण किया। डीएम की छापेमारी के दौरान गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जिलाधिकारी द्वारा आज सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, विकासनगर में औचक निरीक्षण/छापेमारी की गई। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिन पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।औचक निरीक्षण के दौरान वर्ष 2018, 2024 एवं 2025 तक के मूल विलेख पत्र (Original Deed Registers) कार्यालय में संदिग्ध स्थिति में पाए गए, जिन्हें तत्काल कब्जे में लेते हुए जब्त कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि विक्रय हेतु प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री किए जाने के मामले भी पाए गए हैं, जो कि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।इसके अतिरिक्त, जांच में धारा 47-ए के अंतर्गत स्टांप शुल्क की चोरी से संबंधित 47 प्रकरण भी चिन्हित किए गए हैं। यह वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला है, जिस पर नियमानुसार विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।निरीक्षण के दौरान कार्यालय संचालन में पारदर्शिता की कमी, अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही तथा प्रक्रियात्मक नियमों के उल्लंघन जैसी अन्य अनियमितताएं भी पाई गईं। इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच करते हुए जिला प्रशासन द्वारा एक समग्र रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे शासन को प्रेषित किया जाएगा।जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वर्तमान एवं पूर्व में तैनात सभी सब-रजिस्ट्रार के कार्यकाल के दौरान हुई समस्त गतिविधियों की गहन जांच की जाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।जिला प्रशासन ने दोहराया है कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार अथवा अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी मुख्यालय अपूर्वा सिंह, डीजीसी नितिन वशिष्ठ, तहसीलदार विकास नगर विवेक राजौरी सहित अन्य संबंधित अधिकारी कार्मिक उपस्थित रहे।
May 4, 2026‘आस्था’ के द्वार से ‘सियासी’ दस्तक कांग्रेस के लिए प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का गढ़वाल दौरा अहम उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल से इस बार से सियासत का नया अध्याय कांग्रेस पार्टी अब आस्था के जरिए जनता से जुड़ने की कोशिश करेगी देहरादून। उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल से इस बार सियासत का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। कांग्रेस ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर जैसे प्रमुख धामों से करने का फैसला लिया है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार आस्था के केंद्र सियासी संदेशों के प्रमुख मंच बनेंगे।कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का गढ़वाल दौरा प्रमुख धार्मिक स्थलों पर केंद्रित रहेगा, जो यह संकेत देगा है कि पार्टी अब आस्था के जरिए जनता से जुड़ने की कोशिश करेगी। ज्ञात हो कि अब तक उत्तराखंड की राजनीति में धार्मिक मुद्दों और सनातन आस्था के प्रतीकों पर मुख्य रूप से भाजपा की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। भाजपा ने लंबे समय से धार्मिक आयोजनों और आस्था से जुड़े प्रतीकों को अपनी राजनीति का अहम हिस्सा बनाया है, लेकिन अब कांग्रेस भी उसी पिच पर उतरती नजर आ रही है, जिससे सियासी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।बता दें कि कांग्रेस की गढ़वाल क्षेत्र के रुद्रप्रयाग, चमोली और अन्य जिलों में प्रस्तावित बैठकों को केवल संगठनात्मक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह कार्यक्रम स्थानीय भावनाओं को समझने और उनसे जुड़ने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इन इलाकों में धार्मिक आस्था का गहरा प्रभाव है, ऐसे में यहां से सियासी संदेश देना बेहद प्रभावी माना जाता है। कुमारी शैलजा का यह दौरा 6 मई से शुरू होने जा रहा है। वह सबसे पहले )षिकेश पहुंचेंगी, जहां वह रात्रि विश्राम करेंगी। इसके बाद 7 मई से उनके राजनीतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इस दिन वह श्रीनगर में जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी और संगठन की स्थिति का जायजा लेंगी।8 मई को उनका कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वह केदारनाथ धाम पहुंचेंगी और वहां पूजा-अर्चना करेंगी। यह दौरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृदृष्टि से भी अहम होगा। इसी दिन वह अगस्त्यमुनि में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी और इसके बाद रुद्रप्रयाग में भी जिला स्तर के नेताओं के साथ बैठक करेंगी। इसके अगले दिन यानी 9 मई को उनका दौरा चमोली जिले में रहेगा, जहां वह बदरीनाथ धाम पहुंचेंगी और वहीं रात्रि विश्राम करेंगी। 10 मई को सुबह वह बदरीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी और इसके बाद जोशीमठ में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी। इस दौरान पार्टी की रणनीतियों और आगामी चुनावों को लेकर चर्चा की जाएगी।11 मई को कुमारी शैलजा टिहरी गढ़वाल के चंबा में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी। इस तरह करीब 5 से 6 दिनों के इस दौरे में वह पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जाकर संगठन की स्थिति का आकलन करेंगी और कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलेंगी। हालांकि इस पूरे दौरे का सबसे अहम पहलू बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में होने वाले कार्यक्रम हैं। यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि इसके जरिए कांग्रेस एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह भी आस्था और परंपरा के साथ खड़ी है और जनता की भावनाओं को समझती है।उत्तराखंड की राजनीति में अब तक भाजपा को ही धर्म के मोर्चे पर मजबूत माना जाता रहा है, लेकिन कांग्रेस ने बदरीनाथ और केदारनाथ धाम से अपने अभियान की शुरुआत कर यह साफ कर दिया है कि वह अब गढ़वाल के धार्मिक महत्व को अपनी सियासत का मुख्य आधार बनाने जा रही है। यह महज एक यात्रा नहीं, बल्कि देवभूमि के जनमानस को यह बताने की कोशिश है कि आस्था पर किसी का एकाधिकार नहीं है।