April 16, 2026इन दिनों भारत का एक पड़ोसी देश नेपाल चर्चाओं के केंद्र में है। क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से अत्यंत छोटे से इस देश में यूं तो अभी भी लोकतंत्र है लेकिन जिस युवा नेता के नेतृत्व में नई निर्वाचित सरकार बनाई गई है उसने सत्ता संभालते ही मात्र 48 घंटे में जो परिवर्तनकारी फैसले लिए हैं उन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है नेपाल के नव निर्वाचित सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह जिन्हें लोग प्यार से बालेन शाह कहते हैं उनके ही नेतृत्व में जेन—जे ने पूर्व पीएम केपी कोली की सरकार को न सिर्फ उखाड़ कर फेंक दिया अपितु नेपाल के युवाओं ने नेपाल के भविष्य की बागडोर उन्हे सौंप कर यह मौका दिया है कि वह कुछ अलग करके दिखाएं। नेपाल के आंदोलन का मुख्य कारण रहे भ्रष्टाचार और दलितों के पिछड़ेपन पर बालेन्द्र सरकार ने दलितों से राष्ट्रीय माफी मांगी है तथा उसे पूरी तरह बदलने तथा भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए 100 सूत्रीय एजेंडे पर अपनी मोहर लगाई है। बालेेन्द्र सरकार ने फैसला किया है कि किसी भी वीआईपी के लिए सड़क पर ट्रैफिक को नहीं रोका जाएगा। सभी मंत्री संत्री और अधिकारी सामान्य लोगों की तरह ही चलेंगे बिना हूटर— शूटर के। बालेन्द्र शाह की सरकार ने सभी नेताओं और अधिकारियों तथा सरकारी कर्मचारियों के अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना अनिवार्य कर दिया है साफ है कि सरकारी नौकरी करनी है या नेतागिरी करनी है तो बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाओ वरना नौकरी छोड़ो व राजनीति छोड़ो। उनका यह फैसला शिक्षा के लिए युगांतरकारी माना जा रहा है। सरकार ने कॉलेज की राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है किसी भी राजनीतिक पार्टी का समर्थन किसी भी छात्र यूनियन को नहीं होगा ठीक वैसे ही कोई सरकारी नौकर किसी भी यूनियन का हिस्सा नहीं बनेगा। नेपाल की नई सरकार द्वारा सभी कोचिंग सेंटरों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार करते हुए 1990 से सभी संदिग्ध खातों की जांच एक माह में करने और विदेश में जमा काले धन को वापस लाने का फैसला लिया गया है। नेपाल के विदेश मंत्री ने राजदूतों को एक—एक कर मिलने की प्रथा को समाप्त करते हुए 17 देश के राजदूतों के साथ एक साथ मुलाकात की जो इस बात का संकेत है कि नेपाल की नई सरकार एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ चुकी है। पूर्व पीएम केपीएस कोली और गृहमंत्री के भ्रष्टाचार का पूरा हिसाब किताब करने की दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ नई सरकार ने काम शुरू कर दिया है। निजी स्कूलों को बंद करने और छात्र राजनीति पर बैन तथा नौकरशाही को राजनीति मुक्त बनाने के फैसले बड़े फैसले हैं पांचवी तक छात्रों की कोई परीक्षा न करने का फैसला व सरकारी स्कूलों की दिशा व दशा सुधारने का फैसला नेपाल की तस्वीर बदल सकता है। सामाजिक न्याय भी बालेन्द्र सरकार की प्राथमिकता है नेपाल की कुल आबादी के 13 फीसदी दलित व पिछड़े हैं जिसमें 48 फीसदी अत्यंत की गरीब है नई सरकार का मानना है कि समाज में उन्हें बराबरी की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। भले ही अभी नेपाल की नई सरकार के बड़े फैसले को लेकर आम तौर पर लोग यही कह रहे हैं कि नया मुल्ला अल्लाह ही अल्लाह आने वाले समय में बालेन्द्र और उनकी सरकार भी इसी व्यवस्था में घुल मिल जाएगी लेकिन अगर वह कुछ बड़ा कर पाए जैसा कि उनके फैसले में दिख रहा है तो इसका असर अन्य तमाम देशों में देखा जाना तय है। क्योंकि सत्ता की क्रूरता से तमाम देश परेशान है जिन्हें बालेन्द्र जैसे प्रधानमंत्री की जरूरत है।
April 16, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है। इसके साथ ही राज्य पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण राज्य है।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में “इंडिया डिजिटल इंपॉवरमेंट मीट एंड अवॉर्ड” समारोह के आयोजकों ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन वर्तमान समय की आवश्यकता हैं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी और साइंस से जुड़े विविध विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार—विमर्श किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कांफ्रेंस से प्राप्त निष्कर्ष और सुझाव भविष्य में सकारात्मक परिणाम देने के साथ—साथ राज्य और देश के डिजिटल विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है। इसके साथ ही राज्य पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण राज्य है। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिवर्ष 06 करोड़ से अधिक श्रद्धालु एवं पर्यटक विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आते हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता के कारण अनेक आकर्षक डेस्टिनेशन उपलब्ध हैं। राज्य में फिल्म शूटिंग के लिए अनुकूल वातावरण है, जिससे फिल्म उघोग के क्षेत्र में व्यापक बदलाव संभावनाएं मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त औघोगिक निवेश के लिए भी राज्य में बेहतर अवसर उपलब्ध हैं, जिन्हें और विकसित करने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। राज्य के सुरम्य स्थल और आधुनिक सुविधाएं इसे डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए उपयुक्त बनाती हैं। सरकार इस दिशा में आवश्यक आधारभूत संरचना और सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। इस दौरान सचिव नितेश झा, अपर सचिव आलोक पांडे, एन.टी.टी. ग्लोबल डाटा सेंटर के इंडिया हेड 8 निमेश कुमार, अडाणी कनेक्स के कन्ट्री हेड कपिल चुघ, यात्ता डाटा सेंटर की वाइस प्रेजीडेंट सुश्री ज्योति माल्दे, नेटफॉर चाईस डाटा सेंटर के फाउण्डर समीर यादव एवं अन्य प्रतिनिधि मौजूद थे।
April 16, 2026पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला के अनुरूप बनेंगे लोक भवन के नए भवन देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को लोक भवन परिसर में बहुउद्देशीय भवनों का शिलान्यास किया। लोक भवन परिसर में निर्मित किए जाने वाले इन भवनों में विभिन्न आवश्यक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा। प्रथम भवन में एक समेकित डिस्पेंसरी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक एवं एलोपैथिक चिकित्सा कक्ष शामिल होंगे। वहीं दूसरे भवन में सूचना परिसर एवं कैफेटेरिया, तृतीय भवन में लोक निर्माण विभाग कार्यालय एवं चतुर्थ भवन में उद्यान विभाग कार्यालय का निर्माण किया जाना है। इन भवनों का निर्माण पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला के अनुरूप किया जाएगा, जिससे स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को भी सुदृढ़ किया जा सके।इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि इन नवीन भवनों के निर्माण से लोक भवन परिसर में विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे कार्यप्रणाली अधिक सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनेगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि आमजन को भी बेहतर एवं त्वरित सेवाएं प्राप्त होंगी। समेकित सुविधाओं के माध्यम से समय एवं संसाधनों की बचत होगी तथा कार्यों में दक्षता आएगी।राज्यपाल ने कहा कि इस परियोजना में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक एवं पारंपरिक विरासत का समन्वय किया गया है, जो इसे विशिष्ट बनाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बहुउद्देशीय भवन लोक सेवा की भावना को और अधिक सशक्त करेगा तथा प्रशासनिक कार्यों के कुशल एवं प्रभावी निष्पादन में सहायक सिद्ध होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक भवन परिसर में विकसित की जा रही यह बहुउद्देशीय अवसंरचना सुशासन एवं सेवा प्रदान करने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि एक ही परिसर में विभिन्न विभागों एवं सुविधाओं के उपलब्ध होने से प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा तथा नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्राप्त होंगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों का निर्माण पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला के अनुरूप किए जाने से न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय संसाधनों एवं कारीगरों को भी प्रोत्साहन देगा।इस अवसर पर सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल, उप सचिव लक्ष्मण राम आर्य, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग नीरज त्रिपाठी, सहायक अभियंता दिवाकर धस्माना, अपर सहायक अभियंता अमित सेमवाल सहित लोक भवन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
April 16, 20262027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दल तैयारियों में जुटे भाजपा ने अपने बडे़े नेताओं की तीन जनसभाएं कर दिखाई ताकत कांग्रेस सहित अन्य दल जनसभाओं में जनसैलाब से दिख रहे परेशान देहरादून। चुनावी साल में चुनाव से पूर्व बड़ी जनसभाओं का सफल आयोजन किसी भी दल के लिए संजीवनी का काम करता है। पीएम मोदी के दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे के उदघाटन पर उमड़ी भीड़ से भाजपाई गदगद हैं और इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी जीत का मंत्र मान रहे हैं। यह कहा जाए कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2027 का अनौपचारिक ‘शंखनाद’ कर दिया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।बता दें कि उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में 2027 में विधानसभा के चुनाव होने है और इसके लिए सभी दल अभी से अपनी तैयारियों में जुट गए है। अकेले उत्तराखंड की बात करें तो यहां सत्ता में भाजपा है और भाजपा किसी भी सूरत में सत्ता पर काबिज रहना चाहती है। इसके लिए पार्टी रणनीति के साथ कार्य कर रही है। भाजपा ने चुनाव की घोषणा से पहले तीन बड़ी जनसभाओं का आयोजन कर कांग्रेस को सकते में डाल दिया है।भाजपा के तीन बडे़ नेताओं की जनसभाओं में जिस तरह से जनसैलाब उमड़ा उससे जहां भाजपा गदगद है। वही दूसरी ओर कांग्रेस सहित अन्य दलों के लिए यह किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो पीएम मोदी की जनसभा में उमड़ा जनसैलाब भाजपा के लिए अच्छे संकेत है। वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी भी भीड़ को देखकर प्रदेश में मतदाताओं के मूड़ को समझ चुके है। यही कारण है कि उन्होंने प्रदेश के भाजपा नेताओं की जहां तारीफ की वही सभी से बडे़ प्यार से मिले। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो यह भाजपा के लिए शुभ संकेत है।राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी है। राज्य में तीन जनसभाएं कर भाजपा अब गांव-गांव दस्तक देने की तैयारी में है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने अपने नेताओं को जिम्मेदारियां भी दे दी है और सभी वोटरों को लुभाने के लिए लावा-लस्कर के साथ दस्तक दे रहे हैं। वैसे भी सरकार ने चुनावी साल में जहां कैबिनेट का कोरम पूरा किया वही कई नेताओं को पदभार देकर अपनी पकड़ को मजबूत करने का काम किया है। चुनावी साल में यह सब करना भी चुनावी रणनीति का ही एक हिस्सा है।दूसरी ओर भाजपा की जनसभाओं में उमडे़ जनसैलाब के बाद कांग्रेस सहित अन्य दल भी सकते में है। खासकर पीएम मोदी की रैली में जिस प्रकार से आमजन उमड़े थे उससे कांग्रेस को मिर्च लगी ही अन्य दल भी अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर हुए है। कांग्रेस की बात करें तो पहले ही कांग्रेस अंतरकलह से जूझ रही है और इसके साथ ही लंबे समय से सत्ता से दूरी के कारण नेताओं में एकजुटता नहीं दिख रही है। आगामी विधानसभा चुनाव भी कांग्रेस के लिए किसी महाभारत से कम नहीं होगा।विधानसभा चुनाव की अभी औपचारिक घोषणा होना बाकी है, लेकिन भाजपा ने तो चुनाव की अनौपचारिक घोषणा कर दी है। कांग्रेस सहित अन्य दल अभी तक अपनी रणनीति बनाने में लगे हैं, जबकि राज्य में चुनाव के लिए एक साल से भी कम का समय है। राज्य में भाजपा सत्ता में है तो उसके पास संसाधन सभी हैं, लेकिन अन्य दलों के पास संसाधनों को जुटाने में समय लगेगा। इसके बाद भी कांग्रेस सहित अन्य दलों में आपसी खींचतान जारी है जो आने वाले विधानसभा चुनाव में भारी पड़ सकता है।
April 16, 2026चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बृहस्पतिवार को परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाकर उसे ”काला कानून” करार दिया और आरोप लगाया कि यह विधेयक तमिल लोगों को उनकी अपनी ही भूमि में ”शरणार्थी” बनाने का प्रयास है। महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक से कुछ घंटे पहले स्टालिन ने काला झंडा दिखाया, केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई और नारे लगाए। मुख्यमंत्री चुनाव प्रचार के सिलसिले में पश्चिमी तमिलनाडु के नामक्कल में हैं और वहां उन्होंने विधेयक की प्रति जलाई। स्टालिन और काले वस्त्र पहने अन्य लोगों ने इस बीच नारे लगाए। उन्होंने ”पोराडावोम, वेलवोम ओन्द्रगा” (आइए हम मिलकर संघर्ष करें, साथ मिलकर जीतें) का नारा भी लगाया।एक बयान में स्टालिन ने कहा, ”विरोध की ज्वाला पूरे तमिलनाडु में फैले। फासीवादी भाजपा का घमंड चकनाचूर हो। तब, तमिलनाडु से उठी हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग ने दिल्ली को झुलसा दिया था। वह तभी शांत हुई जब उसने दिल्ली को झुकने पर मजबूर कर दिया। उनका इशारा स्पष्ट रूप से राज्य में 1960 के दशक में हुए हिंदी विरोधी आंदोलन की ओर था। उन्होंने कहा, ”आज मैंने इस काले कानून की प्रति जलाकर और काला झंडा दिखाकर उस आग को फिर से प्रज्वलित कर दिया है, जो तमिलों को हमारी ही धरती पर शरणार्थी बनाने का प्रयास करता है। यह आग अब पूरी द्रविड़ भूमि में फैलेगी। यह भड़केगी, यह प्रचंड होगी और यह बीजेपी के अहंकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगी।” जैसे ही स्टालिन ने काला झंडा दिखाया, समूचे तमिलनाडु में उनके पार्टी पदाधिकारियों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने घरों में, पार्टी कार्यालयों में और सार्वजनिक स्थानों पर भी काले झंडे लगाए।
April 16, 2026नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन बिल को लाए जाने विरोधी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही हैं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे) पार्टी नेता संजय राउत ने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल लाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इसके पीछे जो खेल कर रही है हम उसका विरोध करेंगे।संजय राउत ने कहा कि आप लगभग 800 सीटें लोकसभा की बढ़ाएंगे। महाराष्ट्र विधानसभा की 400 सीटें होंगी, तो इसकी क्या जरूरत है? महिलाओं को अगर 33 फ़ीसद आरक्षण देना है तो अभी जो 543 संख्या है उस पर दीजिए। अभी का जो आंकड़ा है आप उस पर भी दे सकते हो, हम इसे मानेंगे। लेकिन, आपको अपने हिसाब से आंकड़ा बढ़ाना है। परिसीमन करना है। आपके हिसाब से राजनीति करनी है। तो फिर ‘नारी शक्ति बिल’ का नाम बदल दो और इसकी जगह ‘भाजपा शक्ति बिल’ लाइए। ये भाजपा शक्ति बिल है।संजय राउत ने कहा कि “कल विपक्षी दलों की महत्वपूर्ण बैठक नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई, वहां राहुल गांधी भी उपस्थित थे, वहां वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के द्वारा उद्धव ठाकरे भी शामिल हुए। हम सब लोग थे, हमारी पार्टी का महिला आरक्षण का कोई विरोध नहीं है।” उन्होंने कहा कि 2023 में पहले ही ये बिल मंजूर हो चुका है। उस वक्त भी हमने महिला आरक्षण बिल को सपोर्ट किया था। लेकिन, अब जिस तरह से इस बिल की आड़ में भारतीय जनता पार्टी अपना राजनीति फायदा और खेल कर रही है उसका हमारा विरोध है।शिवसेना नेता ने इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष ममता बनर्जी से भी अपील की कि उनके सभी सांसद लोकसभा में आकर सरकार के खिलाफ वोट करें और इस सरकार से बदला ले। संजय राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे को ममता बनर्जी से बात करने की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों के बीच पहले से अच्छा कोअर्डिनेशन है। बता दें कि आज संसद के विशेष सत्र में महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण दिए जाने के लिए संशोधन विधेयक आना है। लेकिन, इसे लेकर अब विपक्ष आर-पार के मूड में दिखाई दे रहाहै। विरोधी दल इसकी आड़ में सरकार पर मनमर्जी से परिसीमन कराने का आरोप लगा रहे हैं। विरोधी दलों के तेवर से साफ है ये सत्र काफी हंगामेदार रह सकता है।