June 25, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संविधान हत्या दिवस के अवसर पर लोकतंत्र के सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जी. एम. एस. रोड स्थित एक होटल में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों का सम्मान करते हुए कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा सत्ता बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रताओं का हनन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया तथा संविधान की मूल भावना को आघात पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, साहस और संघर्ष के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पुनः स्थापित हो सकी। उन्होंने सभी लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए उनके संघर्ष को सदैव स्मरण रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान इन मूल अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया, किंतु देश की जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक माध्यमों से इसका जवाब देते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। साथ ही, आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान—पत्र भी जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आह्वान किया कि लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान तथा राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण में सभी अपना योगदान दें। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया तथा उनके संघर्ष और योगदान का स्मरण करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्ौलेन्द्र बिष्ट, भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल मौजूद थे।
June 25, 2026पॉस्को के 27 मुकदमें तथा गंभीर अपराधों के 40 मुकदमों में सजापॉस्को के 99 तथा गंभीर अपराधों के 91 में रिहाई देहरादून/काशीपुर। वर्ष 2025 में उधमसिंह नगर के न्यायालयों ने कुल 9165 अपराधिक मुकदमोें का फैसला किया हैै तथा भारतीय दंड संहिता के गंभीर अपराधों (सत्र न्यायालय) वाले मुकदमोें में 31 प्रतिशत 40 मुकदमों में सजायेें हुई हैै। जबकि 91 मुकदमोें में रिहाई हुई हैै। बालक/बालिकाओं के यौन उत्पीड़न के विशेष कानून पॉस्को के 21 प्रतिशत 27 मुकदमों में सजा हुई तथा 99 मुकदमों में रिहाई हुई।काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने अभियोजन निदेशालय से वर्ष 2025 में मुकदमों में सजा व रिहाई सम्बन्धी विवरणों की सूचना मांगी थी। जिसके उत्तर में संयुक्त निदेशक अभियोजन उधमसिंह नगर कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्रांक 65 से सम्बन्धित विवरण की फोटोे प्रतियां उपलब्ध करायी गयी है। नदीम कोे उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2025 में भारतीय दंड संहिता के सत्र न्यायालय में विचारण योग्य गंभीर मुकदमोें (हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार आदि) के 150 मुकदमें निर्णीत हुये जिसमें 40 मुकदमों में सजा हुई है जबकि 91 मुकदमों में रिहाई हुई हैै अर्थात अभियोजन व पुलिस अपराध के साबित करनेे में सफल नहीं हुये हैैं। इस अवधि में 19 ऐसे मुकदमें क्वैश/दाखिल दफ्तर भी हुये हैै। सजा का प्रतिशत 31 प्रतिशत है।अन्य अधिनियमोें के अन्तर्गत सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय गंभीर मुकदमोें में सजा का प्रतिशत 75 है। 2025 में ऐसे 542 मुकदमें निर्णीत हुये है जिसमें 351 मुकदमोें में सजा हुई हैै तथा 114 मुकदमोें में अपराध साबित नहीं हुये है व रिहाई हुई है। ऐसे 45 मामले दाखिल दफ्तर/क्वैैश हुये हैै। उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2025 में अधीनस्थ न्यायालयोें (मजिस्ट्रेटोें आदि के न्यायालयोें) में भारतीय दंड संहिता केे अपराधों केे 341 मामलों में सजा हुई है जबकि 126 मामलोें में रिहाई हुई है। इस अवधि में 537 मुकदमों में राजीनामा हुआ है तथा 304 मामले दाखिल दफ्तर/क्वैैश हुये हैै। सजा का प्रतिशत 73 प्रतिशत है। अन्य अधिनियम के अन्तर्गत अधीनस्थ न्यायालयोें द्वारा विचारणीय मुकदमोें में 2064 मामलों में सजा हुई है जबकि 83 मामलोें में रिहाई हुई हैैं। 1168 मामले दाखिल दफ्तर/क्वैैश हुये हैै। सजा का प्रतिशत 96 प्रतिशत है। सजा वाले मामलों में मोटर वाहन अधिनियम सहित अन्य अधिनियम के चालान व जुर्माने के मामले भी शामिल होते हैं। नदीम कोे उपलब्ध विवरण केे अनुसार 2025 के र्प्रारंभ में जिला उधमसिंह नगर के सत्र न्यायालयों में 3465 मुकदमें लम्बित थे जोे वर्ष के अन्त में बढ़कर 3794 हो गये जबकि इस अवधि में 1021 नये मामले दायर हुये हैं। 2025 केे प्रारंभ में जिले के अधीनस्थ न्यायालयों में अपराधों के कुल 30716 मुकदमें लम्बित थे जो वर्ष के अंत में घट कर 27246 रह गये जबकि इस अवधि में 1311 नये मुकदमें दायर हुये हैं। नदीम को उपलब्ध विवरण के अनुसार जिले की विशेष न्यायालय पॉस्का ने 141 मुकदमें निर्णीत किये जिसमें केवल 21 प्रतिशत 27 मुकदमों में सजा हुई तथा 99 मुकदमों में रिहाई हुई, 15 मुकदमें क्वैश/दाखिल दफ्तर हुये। वर्ष के प्रारंभ में 645 मुकदमें लंबित थे 188 नये मुकदमें दायर हुये तथा अंत में 692 मुकदमें लम्बित रहे।
June 25, 2026देहरादून। उत्तराखण्ड में निहंगो के जत्थे आने की सूचना पर प्रशासन द्वारा सर्तकता बरतते हुए सीमाएं सील कर दी गयी है। इस दौरान भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की गयी है।बता दें कि बीते कुछ दिन पूर्व उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित दमदमा साहिब गुरूद्वारे में कुछ निहंगो द्वारा विवाद की स्थिति पैदा कर दी गयी थी। निहंगो ने वहंा मौजूद दो लोगों को बंधक बना लिया था। जिनकी मांग थी कि कर्णप्रयाग में निहंगों के साथ हुए विवाद में जिन निहंगों को पुलिस प्रशासन द्वारा गिरफ्तार किया गया है उन्हे रिहा किया जाये। चार दिन यानि शनिवार से चले इस विवाद के बाद बीते मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे पंजाब से आये प्रतिनिधि मडंल ने गुरूद्वारे के भीतर जाकर निहंगो से बातचीत की। इस दौरान पुलिस व प्रशासन द्वारा भी मध्यस्ता की गयी। कुछ देर चली वार्ता के बाद निहंग शांतिपूर्व ढंग से बाहर आ गये जिन्हे पंजाब भेज दिया गया।वहीं अभी मामला शांत ही हुआ था कि आज एक बार फिर प्रशासन को सूचना मिली कि कुछ निहंगों के जत्थे उत्तराखण्ड में प्रवेश करने वाले है। सूचना पर कार्यवाही करते हुए पुलिस प्रशासन सर्तक हो गया और बार्डर पर भारी संख्या में पुलिस की तैनाती कर दी गयी। समाचार लिखे जाने तक निहंगो का कोई भी जत्था उत्तराखण्ड बार्डर पर नहीं पहुंचा था। वहीं सूंत्रो से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस प्रशासन को मिली यह सूचना सही हो सकती है। क्योंकि सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें किसी गुरूद्वारे में काफी संख्या में निहंग मौजूद दिख रहे है।
June 25, 2026रुद्रपुर/ देहरादून। गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के संकल्प के साथ उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार मिलकर एक ऐसी आवासीय परियोजना को अंतिम रूप दे रही हैं, जो हजारों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के ग्राम बागवाला में 1872 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की सतत निगरानी में विकसित यह परियोजना राज्य में गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण (उधमसिंह नगर) द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को अपना घर उपलब्ध कराना है, जिनके पास अब तक पक्का मकान नहीं है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद हजारों लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार होने जा रहा है।अपना घर, अपना स्वाभिमान’ की भावना के साथ तैयार की गई इस परियोजना में कुल 1872 आवासों का निर्माण किया गया है। इनमें से 832 फ्लैट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि 512 अतिरिक्त फ्लैटों में अंतिम चरण के छोटे-मोटे कार्य तेजी से चल रहे हैं। सरकार की योजना शीघ्र ही परियोजना का लोकार्पण कर लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपने की है। सबसे बड़ी बात यह है कि छह लाख रुपये लागत वाले इन आधुनिक फ्लैटों के लिए लाभार्थी को मात्र तीन लाख रुपये ही देने होंगे। शेष राशि भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार द्वारा डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी। इससे सीमित आय वाले परिवारों को भी सम्मानजनक आवास प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।करीब 6.0281 हेक्टेयर भूमि पर विकसित इस आवासीय परियोजना का निर्माण क्षेत्रफल लगभग 39,220 वर्ग मीटर है। योजना में कुल 23 बहुमंजिला आवासीय ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें आधुनिक शहरी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक फ्लैट में एक बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन, टॉयलेट, बाथरूम और बरामदा उपलब्ध कराया गया है। लगभग 28 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले इन आवासों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि छोटे परिवारों को पर्याप्त सुविधा और बेहतर जीवन स्तर मिल सके। परियोजना की विशेषता यह है कि सभी भवन भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित किए गए हैं। इसके साथ ही चौड़ी सड़कों, पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।बागवाला आवासीय परियोजना को केवल मकानों का समूह नहीं, बल्कि एक आधुनिक और टिकाऊ आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया गया है। परिसर में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), सीवरेज सिस्टम और अत्याधुनिक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की व्यवस्था की गई है।परियोजना में हरे-भरे पार्क, बच्चों के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र और सौंदर्यीकरण के व्यापक कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। हॉर्टिकल्चर का कार्य पूर्ण होने से परिसर का वातावरण आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल बन गया है।आवासीय परिसर का स्थान भी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। बागवाला स्थित यह परियोजना मुख्य बाजार और प्रमुख मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर है। बस स्टेशन छह किलोमीटर और रेलवे स्टेशन आठ किलोमीटर दूर स्थित है। बेहतर सड़क संपर्क और शहर के प्रमुख क्षेत्रों से नजदीकी के कारण यहां रहने वाले परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।सरकार ने आवास आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। पात्र लाभार्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। आवेदन के लिए आवेदक का प्रधानमंत्री आवास योजना के एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत होना आवश्यक है। साथ ही आवेदक को 17 जून 2015 से पूर्व का उत्तराखंड निवासी होना चाहिए तथा उसकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। मात्र पांच हजार रुपये जमा कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। शेष राशि के भुगतान के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।परियोजना में सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परिसर में आरसीसी बाउंड्री वॉल और मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण पूरा हो चुका है। सभी ब्लॉकों में विद्युत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं तथा यूपीसीएल द्वारा इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जांच भी पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा फायर डिपार्टमेंट द्वारा फायर फाइटिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है। जलापूर्ति व्यवस्था के लिए अंडरग्राउंड टैंक और ओवरहेड टैंक स्थापित किए गए हैं, जबकि एसटीपी भी परीक्षण चरण में पहुंच चुका है।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकसित बागवाला परियोजना उत्तराखंड में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार ऐसी योजनाओं को गति दे रही है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिल रहा है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की निगरानी में तेजी से आगे बढ़ी यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में जब हजारों परिवार अपने नए घरों में प्रवेश करेंगे, तब यह केवल मकानों का हस्तांतरण नहीं होगा, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की एक नई शुरुआत होगी। बागवाला की यह आवासीय बस्ती उत्तराखंड में गरीब परिवारों के जीवन स्तर को बदलने वाली एक नई पहचान बनने जा रही है।सचिव आवास एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के बागवाला में विकसित की गई यह परियोजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना में गुणवत्ता, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे किए गए हैं। शीघ्र ही पात्र लाभार्थियों को आवासों का आवंटन कर चाबियां सौंपी जाएंगी, जिससे हजारों परिवारों का अपने घर का सपना साकार होगा।
June 25, 2026सत्ता विरोधी माहौल की आशंकाओं के बीच बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की कवायद तेज गांव-गांव में सक्रिय किए जा रहे भाजपा के जमीन से जुड़े पुराने सभी कार्यकर्ता संगठन के दरवाजे पर इंतजार करने वाले कार्यकर्ता बनेंगे चुनावी वैतरणी पार कराने वाले देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट ने भाजपा के भीतर संगठनात्मक समीकरण बदलने शुरू कर दिए हैं। सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली नेताओं, मंत्रियों और पदाधिकारियों के बीच खड़ा वह साधारण कार्यकर्ता, जो पिछले कुछ वर्षों में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा था, अचानक भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण चेहरा बन गया है। पार्टी नेतृत्व अब गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच रखने वाले कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति का केंद्र बना रहा है।भाजपा अच्छी तरह समझती है कि चुनावी जीत केवल सरकारी योजनाओं, बड़े नेताओं की सभाओं और सोशल मीडिया अभियानों से सुनिश्चित नहीं होती। बूथ पर बैठा कार्यकर्ता ही वह कड़ी है जो मतदाता और पार्टी के बीच सीधा संवाद स्थापित करता है। यही कारण है कि संगठन अब बूथ समितियों को सक्रिय करने, पन्ना प्रमुखों को मजबूत करने और पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से मैदान में उतारने की कवायद में जुट गया है।दरअसल, सत्ता के दस वर्षों के दौरान पार्टी के भीतर एक धारणा बनी कि कुछ चुनिंदा नेताओं और पदाधिकारियों तक ही संगठन सीमित हो गया है। कई पुराने कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक और निजी तौर पर यह शिकायत भी की कि उन्हें न तो संगठन में पर्याप्त महत्व मिला और न ही सरकार में उनकी सुनवाई हुई। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, पार्टी को एहसास हो रहा है कि चुनावी जंग एयरकंडीशंड कमरों में नहीं, बल्कि गांव की चौपालों, कस्बों की गलियों और बूथों पर लड़ी जाती है।भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने हाल के दिनों में लगातार संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला तेज किया है। मंत्रियों, विधायकों और जिलाध्यक्षों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि बूथ स्तर तक संवाद बढ़ाया जाए। पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि विपक्ष के आरोपों, स्थानीय नाराजगियों और सरकार विरोधी माहौल को निष्प्रभावी करने का काम केवल वही कार्यकर्ता कर सकता है जो रोज जनता के बीच रहता है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका कैडर आधारित ढांचा रहा है। 2017 और 2022 के चुनावों में भी बूथ प्रबंधन ने पार्टी को बड़ी सफलता दिलाई थी। लेकिन इस बार चुनौती अलग है। एक ओर सत्ता विरोधी भावनाओं को नियंत्रित करना है तो दूसरी ओर संगठन के भीतर नाराज कार्यकर्ताओं को भी साथ लेकर चलना है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व छोटे कार्यकर्ता को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जिन कार्यकर्ताओं को कभी नेताओं के कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने तक सीमित समझा जाता था, आज वही कार्यकर्ता चुनावी गणित के सबसे अहम सूत्रधार बन गए हैं। गांवों में होने वाली बैठकों से लेकर सोशल मीडिया के स्थानीय नेटवर्क तक, हर जगह कार्यकर्ता की भूमिका बढ़ी है।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी भाजपा की इस रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष का दावा है कि चुनाव आते ही भाजपा को कार्यकर्ताओं की याद आ जाती है, जबकि सत्ता के दौरान उनकी उपेक्षा की जाती है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि संगठन की असली ताकत हमेशा कार्यकर्ता ही रहा है और रहेगा।फिलहाल इतना तय है कि 2027 की चुनावी रणभेरी बजने से पहले भाजपा में सबसे अधिक पूछ-परख किसी मंत्री, विधायक या पदाधिकारी की नहीं, बल्कि उस कार्यकर्ता की हो रही है जो हर चुनाव में पार्टी का झंडा लेकर सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है। सत्ता की राजनीति में भले चेहरे बदलते रहें, लेकिन चुनाव आते ही भाजपा को फिर याद आ जाता है कि उसकी असली ताकत बूथ का कार्यकर्ता ही है। आज की स्थिति में कहा जाए तो भाजपा में छोटा कार्यकर्ता ही सबसे बड़ा भगवान बन गया है।
June 25, 2026आज शायद अपनी बात 6 दशक पूर्व 1971 में आई हिंदी फिल्म हरे रामा हरे कृष्ण के उस गीत से ट्टदेखो ए दीवानो यह काम न करो, राम का नाम बदनाम न करो, से करना ही सबसे उचित होगा। अपने समय के मशहूर गायक किशोर कुमार का यह गीत वर्तमान दौर के हमारे राजनीतिक और सामाजिक हालात पर सटीक साबित हो रहा है। इन दिनों अयोध्या में बने राम मंदिर से करोड़ों रुपए के दान चोरी का मामला सबसे अधिक चर्चाओं में है। राजनीतिक भ्रष्टाचार के अन्य तमाम मामले जैसे मध्य प्रदेश में सीएम मोहन यादव का वह जमीन खरीद का मामला जो इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ है यह बताया गया है कि कैसे एक सूबे के सीएम ने अपने उन 37 नाते रिश्तेदारों और परिजनों के नाम पर जमीनों की खरीद फरोख्त की गई है उल्लेख किया गया है तथा उत्तराखंड में भी हरिद्वार में सरकारी जमीन की खरीदने की धाधली हुई। जैसे अनेक मामले चर्चाओं के केंद्र में है। देश की सत्ता में बैठे लोगों द्वारा देश भर में जिस तरह से देश के संसाधनों और खजाने की लूट—खसोट की जा रही है और राम के नाम तथा धार्मिक स्थलों को सुनियोजित ढंग से अपने कब्जे में लिया जा रहा है इसका सच वास्तव में हैरान करने वाला है। हिंदी के महान कवि गजानन मुक्ति बोध की एक कविता अंधेरे में जो लिखा गया है उसमें रात निकलने वाले एक जुलूस में शामिल लोगों द्वारा अपने—अपने क्षेत्र के छठैत (गुंडे—बदमाशों) की मौजूदगी का वर्णन किया गया है। ठीक वैसा ही परिदृश्य आज अपने देश में दिखाई दे रहा है। जिस आस्था के केंद्र राम मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा ने राजनीति की सीढ़ियां चढ़ी थी इस राम मंदिर के ट्रस्टियों द्वारा दान के खजाने को लूटने का जो काम किया गया है तथा अब एसआईटी गठन के जरिए उस पर लीपा पोती की जा रही है वह वास्तव में बेशर्मी की इंतहा ही है। इस मामले की रिपोर्ट एसआईटी द्वारा संजय प्रसाद को सौंपी गई है वह संघी तो है ही साथ ही वह खुद भी राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों में शामिल है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस जांच का क्या नतीजा निकल सकता है। यह लूटपाट की कहानी किसी एक धार्मिक स्थल या आस्था केंद्र की नहीं है उत्तराखंड में अभी विगत दिनों मुंबई के एक बड़े व्यवसायी द्वारा केदारनाथ मंदिर को बहुत सोना दान किए जाने और गर्भ ग्रह को स्वर्ण जनित बनाने के लिए सोना दिया गया था जिसमें सोना चोरी होने और गर्भ ग्रह में सोने की जगह मिश्रित धातु की सोने के पानी वाली परत चढ़ाई जाने की बात सामने आई थी इसकी जांच कराई गई थी लेकिन इसकी हकीकत आज तक सामने नहीं आ सकी है। हो सकता है अयोध्या के राम मंदिर में दान की डकैती का मामला भी कल इसी तरह रफा दफा हो जाए। लेकिन इस घटना ने राम भक्तों और सनातन को मानने वालो की जहनियत को झकझोर कर रख दिया है। खास बात ही है न खाऊंगा न खाने दूंगा जैसे लोक लुभावन जुमले उछालने वाले प्रधानमंत्री मोदी आज किसी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक शब्द बोलने को तैयार नहीं है। राम मंदिर ट्रस्ट में आज अगर चंपत राय का नाम शामिल है वही इस ट्रस्ट में दर्जन भर लोग ऐसे हैं जो संघ से जुड़े हुए हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि संघ और भाजपा मिलकर मोदी की छवि को एक विश्व गुरु ही नहीं एक धर्मगुरु के रूप में स्थापित करने का काम कर रहे हैं। पीएम का अपने आप को नान बायोलॉजिकल होने का बयान भी इसकी पुष्टि करता है साथ ही अभी प्रकाश में आई एक रिपोर्ट जिसमें उनकी धर्मगुरु की छवि गढ़ने पर 2000 करोड़ का खर्च होने की बात सामने आई है। जिसका मकसद सिर्फ आस्था के नाम पर वोट बटोरना ही है। देश व समाज में क्या हो रहा है? इस पर पाठक खुद चिंतन करें तो ज्यादा बेहतर होगा।।