May 9, 2026उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर यूं तो लंबे समय से सवाल उठाए जाते रहे हैं विपक्ष कांग्रेस के नेताओं द्वारा इस मुद्दे को लेकर सड़कों से लेकर सदन तक घेराबंदी की जाती रही है लेकिन अभी हाल ही में प्रकाश में आई दो घटनाएं चर्चाओं के केंद्र में है जो यह बताती है कि राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति किस हद तक बिगड़ चुकी है तथा जनता की सुरक्षा के लिए बनी पुलिस किस तरह से सत्ता के अनुकूल हो चुकी है। पहली घटना मुख्यमंत्री धामी के गृह जनपद चंपावत से है जहां कक्षा 10 में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया जिसमें सत्ताधारी दल भाजपा के कुछ पदाधिकारी व नेताओं के शामिल होने की बात सामने आई है। इस बाबत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों ने देखा होगा जिसमें वह राज्य के सीएम तथा पुलिस महानिदेशक व चंपावत के अधिकारियों से पीड़िता की मदद करने की अपील कर रहे हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस की अलका लामा और कांग्रेस नेत्री गरिमा दसौनी ने अपनी पत्रकार वार्ता में भाजपा के चाल चरित्र और चेहरे पर कई तरह के सवाल दागते हुए पूछा है कि क्या बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा देने वाली पार्टी इन आरोपियों को जिनका रसूक भाजपा से है इस बेटी को न्याय दिलाएगी उन्होंने अपनी बात सामने रखते हुए अंकिता भंडारी मर्डर केस से लेकर उन तमाम अन्य महिला अपराध की घटनाओं पर भी चिंता जताई है जो भाजपा के नेताओं से जुड़ी रही हैं। उन्होंने भाजपा पर देवभूमि को कलंकित करने का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार को इन अपराधियों को संरक्षण देने की बात कही है। दूसरी घटना सतपुली क्षेत्र की है जिसमें एक दलित 20 वर्षीय युवक को पुलिस द्वारा इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वह अधमरा हो गया पुलिस उत्पीड़न से आहत युवक ने पुल से लटक कर आत्महत्या कर ली है। युवक का अपराध यह था कि उसकी बाइक का पहिया भाजपा नेता के पैर से टकरा गया। यह मामला भी इतना ज्यादा तूल पकड़ गया कि गणेश गोदयाल और क्षेत्र के लोगों को सतपुली थाने पर धरना प्रदर्शन करना पड़ा। भले ही लोगों को यह लगे कि इस तरह की घटनाएं बहुत मामूली सी बात है तथा विपक्ष कांग्रेस इन घटनाओं पर राजनीति कर रहा है लेकिन बीते समय में महिलाओं के यौन उत्पीड़न तथा दलित उत्पीड़न के तमाम ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जो इस बात को साफ करते हैं कि इन अपराधों से भाजपा और उसके नेताओं का या तो सीधा संबंध रहा है या फिर सत्ता में बैठे लोगों का इन अपराधियों को संरक्षण प्राप्त हो रहा है। बीते कुछ सालों में जिस तरह से अपराधों की बाढ़ आई है उसका सच किसी से छुपा नहीं है। पूरे प्रदेश की तो बात ही क्या है अगर राजधानी दून के अपराधों पर ही गौर करें तो लगभग आधा दर्जन से अधिक हत्याओं के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। आए दिन दिनदहाड़े गोलियों से किसी को भी भून दिया जाता है सरे बाजार चपड़ से किसी का भी गला काट दिया जाता है। किसी सर्राफ के शोरूम से करोड़ों की डकैती हो जाती है। निश्चित तौर पर राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था एक गंभीर समस्या और चुनौती बन चुकी है हत्याओं लूटपाट व बलात्कार की घटनाओं की जिस तरह से बाढ़ आ चुकी है वह अत्यंत ही चिंतनीय है। खास बात यह है कि अब शासन—प्रशासन अपराधों पर नियंत्रण के मामले में फेल साबित होता दिख रहा है उससे भी चिंतनीय बात यह है कि पुलिस सिर्फ उन्हीं मामलों पर गौर करती है जो सरकार या भाजपा के नेता व कार्यकर्ताओं की सुरक्षा या उनके बचाव से जुड़े होते हैं।
May 8, 2026कांग्रेस, उक्रांद ने फूंका सरकार का पुतला, कहा उच्च स्तरीय जांच हो चम्पावत। सल्ली क्षेत्र की नाबालिग से सामुहिक दुष्कर्म के आरोपो का पुलिस जांच में फर्जी करार दिया गया है। वहीं सोशल मीडिया में पीड़िता व उसके चचेरे भाई का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें उनके द्वारा सारा मामला ही गलत बता दिया गया है। वहीं इस प्रकरण में आज कांग्रेस व उंक्राद द्वारा सरकार का पुतला फूंकते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गयी है। वहीं मामले में पुलिस द्वारा पीड़िता का वीडियो बयान जारी करने पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ गीता खन्ना की आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह गलत है।पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आया कि पीड़िता ग्राम सल्ली में हुए विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने दोस्त के साथ गयी थी। साथ ही उस दिन कमल, पीड़िता व उसकी महिला मित्र के साथ बार बार फोन पर सम्पर्क होना पाया गया। पुलिस का दावा है कि जांच में यह भी सामने आया कि घटना स्थल के आस पास आरोपी विनोद सिंह रावत, पूरना सिंह रावत व नवीन सिंह रावत मौजूद नहीं थे। पुलिस का कहना है कि यह सारी साजिश कमल रावत जो कि पीड़िता की पैरवी कर रहा था उसकी रची हुई थी।वहीं मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल व अन्य कांग्रेसिंयो का कहना है कि भाजपा इस प्रकरण को भी अंकिता भंडारी मामले की तरह दबाना चाहती है क्योंकि इस मामले में भाजपा नेता व पूर्व मण्डल उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत का नाम सामने आया है। जिस कारण भाजपा असहज हो गयी है। उन्होने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। वहीं आज इस मामले को लेकर उक्रांद कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतर आये और उन्होने सरकार का पुतला फूंकते हुए जांच की मांग की है। उक्रंाद के नेताओं का कहना है कि प्रशासन इस मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है।पीड़िता के चचेरे भाई व पीड़िता का एक वीडियों सोशल मीडिया मे वायरल हुआ है जिसमें वह पूर्व में लगाये गये सभी आरोपों यानि सामूहिक दुष्कर्म मामले को फर्जी करार देते हुए भाजपा के पूर्व मडंल अध्यक्ष कमल रावत पर आरोप लगा रहे है कि यह सारी साजिश उनके द्वारा रची गयी थी। वहीं पुलिस द्वारा पीड़िता का वीडियो बयान जारी करने पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ गीता खन्ना की आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह गलत है।
May 8, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य की विभिन्न विकास योेजनाओं के साथ ही शिक्षा, पर्यटन, शहरी एवं ग्रामीण निकायों तथा कुम्भ मेला-2027 से संबंधित महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई हैं।मुख्यमंत्री द्वारा राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद नैनीताल के विधानसभा क्षेत्र कालाढूंगी में कोटाबाग के पतलिया स्थित गुरूणी नाले पर पुल निर्माण हेतु ₹9.43 करोड़ तथा विकासखण्ड रामगढ़ में मोहन बाजार मुक्तेश्वर में कार पार्किंग के निर्माण कार्य हेतु ₹9.89 करोड़ की स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रथम किश्त में ₹3.95 करोड़ स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।मुख्यमंत्री द्वारा छठवें राज्य वित्त आयोग के अन्तर्गत समस्त शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम त्रैमासिक किश्त (अप्रैल से जून) हेतु ₹ 328.27 करोड़ तथा तीन गैर निर्वाचित निकायों को प्रथम छमाही किश्त (अप्रैल से सितम्बर) हेतु ₹ 3 करोड़, कुल ₹ 331.27 करोड़ की धनराशि अवमुक्त किये जाने के साथ ही त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिला पंचायतों को प्रथम त्रैमासिक किश्त (अप्रैल से जून) हेतु ₹82.20 करोड़, क्षेत्र पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों को प्रथम छमाही किश्त (अप्रैल से सितंबर) हेतु क्रमशः ₹75.46 करोड़ एवं ₹194.61 करोड़ कुल ₹352.27 करोड़ स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।मुख्यमंत्री द्वारा प्रारम्भिक शिक्षा के अन्तर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के कार्मिकों के वेतन भुगतान हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राविधानित धनराशि ₹ 160 करोड के सापेक्ष प्रथम किश्त में ₹ 80 करोड़ तथा माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रथम छः माह (अप्रैल से सितम्बर, 2026) हेतु प्राविधानित धनराशि के सापेक्ष प्रथम 50 प्रतिशत धनराशि ₹ 300 करोड की धनराशि अवमुक्त किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।मुख्यमंत्री द्वारा शहरी विकास विभाग के अन्तर्गत कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों के लिए स्थायी प्रकृति के तीन महत्वपूर्ण कार्यो, हरिद्वार में शंकराचार्य चौक, देवपुरा चौक, चन्द्राचार्य चौक एवं आर्यनगर चौक के आन्तरिक मार्गों एवं बैरियर से गुगाल मंदिर की ओर मार्ग का बीसी द्वारा नवीनीकरण कार्य हेतु ₹ 6.44 करोड, रानीपुर मोड़, शंकर आश्रम, शिव मूर्ति चौक और झंडा चौक का जंक्शन सुधार एवं सौंदर्यीकरण हेतु ₹ 6.83 करोड तथा कुम्भ मेला-2027 के तहत व्यापक रखरखाव के साथ डीजल संचालित सेल्फ प्रोपेल्ड वैक्यूम आधारित ईवी रोड स्वीपिंग मशीनों की आपूर्ति और कमीशनिंग हेतु ₹ 5.95 करोड की धनराशि अवमुक्त किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।
May 8, 2026नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपनी 13 वर्षीय नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने में कथित रूप से सह—आरोपी की सहायता करने की आरोपी महिला की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ ने आरोपी मां को जमानत देने से इनकार कर दिया है।बता दें कि पीड़िता के पिता ने हरिद्वार में मुकदमा दर्ज करा कर आरोप लगाया था कि लड़की की मां ने पीड़िता को सह—आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। पीड़िता को जबरन शराब पिलाई गई। उसे हरिद्वार, आगरा, गाजियाबाद और वृंदावन की यात्रा करने के लिए मजबूर किया गया। इन जगहों पर उससे कथित तौर पर दुष्कर्म हुआ।मामले में आरोपी की ओर से यह तर्क दिया गया कि घटना के समय पीड़िता आवासीय विघालय में पढ़ रही थी, इसलिए उसे विभिन्न शहरों की यात्रा करवाना एक झूठा आरोप है। यह भी दलील दी गयी कि प्राथमिकी दर्ज करने में पांच महीने की देरी हुई, जिससे अभियोजन पक्ष की कहानी पर संदेह पैदा होता है। राज्य सरकार ने आरोपी की जमानत याचिका का विरोध किया गया। आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताते हुए अदालत ने कहा कि ये बच्चे के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए मामले में विसंगतियों या मामले में हुए विलंब का निर्णय केवल निचली अदालत के समक्ष ही किया जाना चाहिए.अदालत ने कहा कि हालांकि आरोपी जून 2025 से न्यायिक हिरासत में है, लेकिन जेल में लंबी अवधि ऐसे गंभीर मामलों में जमानत देने का आधार नहीं हो सकता। मामले की गंभीरता और आरोपी को रिहा करने की स्थिति में गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
May 8, 2026ऊमी: अन्न, आस्था और प्रकृति का पर्व नए गेहूँ का पहला दाना पहले देवता के नाम, फिर हमारे लिए बनता है प्रसाद ‘ऊमी’ निकालने की परंपरा सिर्फ अन्न का भोग नहीं, बल्कि यह है एक सोच प्रकृति के प्रति सम्मान, जीवन के प्रति आभार और समाज के प्रति जुड़ाव देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ों में एक परंपरा है, जो आज भी पहाड़ के गांवों में निभाई जाती है। फाल्गुन की विदाई और चैत्र के आगमन के साथ ही जब खेतों में गेहूँ की बालियाँ सुनहरी आभा बिखेरने लगती हैं, तो ग्रामीण भारत की फिजाओं में एक खास तरह की सोंधी खुशबू घुल जाती है। यह खुशबू है ‘ऊमी’ की होती है।पहाड़ में गेहॅू की कच्ची-पक्की बालियों को धीमी आंच पर भूनकर जब इन्हें हाथों से रगड़कर दाने निकाले जाते हैं, तो वह ‘ऊमी’ कहलाती है। पहाड़ के गांवों में नए अन्न का पहला दाना घर का कोई सदस्य तब तक नहीं चखता, जब तक इसे कुल देवता, क्षेत्रपाल या ग्राम देवता को अर्पित न कर दिया जाए। मान्यता है कि क्षेत्रपाल देवता ने कड़कती धूप और ठंड में फसल की रक्षा की है, इसलिए पहला हक उन्हीं का है।उत्तराखंड के पहाड़ी जीवन में हर परंपरा के पीछे प्रकृति, आस्था और जीवन दर्शन का अद्भुत मेल दिखाई देता है। इस परंपरा के पीछे गहरी मान्यता है कि अन्न केवल मानव श्रम का परिणाम नहीं, बल्कि प्रकृति और दैवीय कृपा का संयुक्त वरदान है। इसलिए इसे सीधे उपभोग करने से पहले उस शक्ति को समर्पित करना आवश्यक माना जाता है, जिसने इसे संभव बनाया।आज के दौर में तेजी से बदलती जीवनशैली और शहरीकरण के कारण ऐसी परंपराएं धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। खेतों से जुड़ाव कम हो रहा है और बाजार आधारित जीवन शैली बढ़ रही है। इसके बावजूद कई गांवों में आज भी ऊमी को उत्साह के साथ बनाकर उत्सव के रूप में मनाते हैं। आज जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, तब पहाड़ की यह परंपरा हमें सिखाती है कि प्रकृति के साथ संतुलन और सम्मान ही सच्ची समृ(ि का मार्ग है। बाक्सगांवों के ऑगन में ऊमी की खुशबूअग्नि में तपे इन दानों को जब गुड़ या शक्कर के साथ मिलाकर भगवान को भोग लगाया जाता है, तो वह ऊमी एक दिव्य प्रसाद में बदल जाती है। गाँव की चौपालों और आंगन में जब घर-घर से ऊमी की खुशबू आती है, तो मानों पूरी प्रकृति उत्सव मना रही होती है। बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि यह प्रसाद परिवार में सुख-शांति और अन्न के भंडार भरे रहने का प्रतीक है। आयुर्वेद के अनुसार )तु परिवर्तन के समय नया अनाज सीधे खाना भारी हो सकता है, लेकिन अग्नि में भूनने से यह सुपाच्य और हल्का हो जाता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करता है।
May 8, 2026जेलों में बंद कैदियों में पिछले वर्ष की अपेक्षा आयी कमी कारागार मुख्यालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ खुलासा देहरादून। उत्तराखंड जैसे शान्त माने जाने वाले राज्य में भी उत्तराखंड की आधे से अधिक जेलों में उसकी क्षमता से दुगने तक कैदी बंद है जबकि कुल कैदियों की संख्या पिछले वर्ष की 5521 से 765 की कमी होकर 4812 हो गयी है। यह खुलासा सूचना अधिकार के अन्तर्गत कारागार मुख्यालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ है।काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने महानिरीक्षक कारागार (कारागार मुख्यालय) उत्तराखंड से उत्तराखंड राज्य की जेलो में बंदियों की क्षमता तथा वर्तमान में बंद कैदियों की संख्या के सम्बन्ध में सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में मुख्यालय कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग उत्तराखंड के लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्रांक 442 दिनांक 23 फरवरी 2026 से जेलों की क्षमता तथा बंदियों का विवरण उपलब्ध कराया है। इससे पूर्व 7 फरवरी 2025 की सूचना में 2025 में कैदियों की संख्य उपलब्ध करायी गयी है।उपलब्ध सूचना के अनुसार क्षमता से सबसे अधिक लगभग दुगने 141 कैदी 71 क्षमता वाली जिला कारागार नैनीताल में बंद हैं जबकि दूसरे स्थान पर क्षमता के 185 प्रतिशत 189 कैदी 102 क्षमता वाली जिला कारागार अल्मोड़ा में बंद हैं। तीसरे स्थान पर 157 प्रतिशत कैदी 911 कैदी 580 क्षमता वाली देहरादून जेल में बंद हैं। चौथे स्थान पर क्षमता के 152 प्रतिशत 1025 कैदी 675 क्षमता वाली उपकारागार हल्द्वानी जेल में बंद हैं। पांचवें स्थान पर क्षमता के 140 प्रतिशत 772 कैदी 552 क्षमता वाली केन्द्रीय कारागार सितारगंज जेल में बंद हैं। छठे स्थान पर क्षमता के 122 प्रतिशत 298 कैदी 244 क्षमता वाली उपकारागार रूड़की में बंद है।उपलब्ध सूचना के अनुसार क्षमता से सबसे कम 19 प्रतिशत 56 कैदी 300 क्षमता वाली सम्पूर्णनन्द शिविर (खुली जेल) सितारगंज में बंद हैं जबकि दूसरे स्थान पर क्षमता के 64 प्रतिशत 109 कैदी 169 क्षमता वाली जिला कारागार चमोली में बंद हैं। तीसरे स्थान पर क्षमता के 72 प्रतिशत 108 कैदी 150 क्षमता वाली जिला कारागार पौड़ी में बंद हैं। चौथे स्थान पर क्षमता के 98 प्रतिशत 78 कैदी 80 क्षमता वाली जिला कारागार पिथौरागढ़ में बंद हैं जबकि जिला कारागार टिहरी में क्षमता के अनुरूप 150 कैदी ही बंद है।नदीम को 7 फरवरी 2025 को उपलब्ध सूचना के अनुसार 2025 में क्षमता से सर्वाधिक अधिक 185 प्रतिशत कैदी 102 क्षमता वाली जिला कारागार अल्मोड़ा में 291 कैदी थे। दूसरे स्थान पर क्षमता के 201 प्रतिशत कैदी 71 क्षमता वाली जिला कारागार नैनीताल में 143 कैदी बंद थे। तीसरे स्थान पर क्षमता के 193 प्रतिशत कैदी 580 क्षमता वाली जिला कारागार देहरादून में 1122 कैदी बंद थे। चौथे स्थान पर क्षमता के 187 प्रतिशत कैदी 635 क्षमता वाली उपकारागार हल्द्वानी में 1188 कैदी बंद थे। पांचवें स्थान पर क्षमता के 156 प्रतिशत कैदी 552 क्षमता वाली केन्द्रीय कारागार सितारगंज में 860 कैदी बंद थे। छठे स्थान पर क्षमता के 132 प्रतिशत कैदी 150 क्षमता वाली जिला कारागार टिहरी में 198 कैदी बंद थे। सातवें स्थान पर क्षमता के 131 प्रतिशत कैदी 244 क्षमता वाली रूड़की उपकारागार में 319 कैदी बंद थे। आठवें स्थान पर क्षमता के 126 प्रतिशत कैदी 888 क्षमता वाली जिला कारागार हरिद्वार में 1120 कैदी बंद थे। नवें स्थान पर क्षमता के 107 प्रतिशत कैदी 150 क्षमता वाली जिला पौड़ी में 160 कैदी बंद थे। उपलब्ध सूचना के अनुसार प्रदेश में केवल दो जेले ही ऐसी थी जिसमें निर्धारित स्वीकृत क्षमता से कम कैदी बंद थे। इसमें एक विशेष जेल सम्पूर्णानन्द शिविर (खुली जेल) इसकी क्षमता 300 कैदियों की थी जबकि इसकी क्षमता के मात्र 15 प्रतिशत 45 कैदी ही इसमें बंद थे। इसके अतिरिक्त सामान्य जेलों में स्वीकृत क्षमता से कम कैदियों वाली एकमात्र जेल जिला कारागार चमोली है। इसमें उसकी क्षमता 169 की अपेक्षा 71 प्रतिशत 120 कैदी ही बंद थे।