April 29, 2026देहरादून। प्रदेश में चारधाम यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर सुरक्षित एवं सुगम रूप से दर्शन कर सकें।चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए चारधाम यात्रा मार्गों सहित प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पार्किंग एवं यातायात व्यवस्थाओं को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित किया गया है।राज्य सरकार ने यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रसारित करने वालों तथा गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा की पवित्रता एवं व्यवस्थाएं बनी रहें।राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार चारधाम कपाट खुलने से 28 अप्रैल, 2026 की सांय 7:00 बजे तक मात्र दस दिनों में कुल 04 लाख 08 हजार 401 श्रद्धालु चारधाम में दर्शन हेतु पहुंचे हैं।धामवार विवरण इस प्रकार है— श्री बद्रीनाथ धाम: कपाट उद्घाटन के छह दिनों में 84,942 श्रद्धालु पहुंचे। श्री केदारनाथ धाम: सात दिनों में 2,07,452 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यमुनोत्री धाम: दस दिनों में 57,794 श्रद्धालु पहुंचे। गंगोत्री धाम: दस दिनों में 57,863 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इसके अतिरिक्त गौमुख में अब तक 440 यात्री पहुंचे हैं। वर्तमान यात्रा सीजन में अब तक कुल 64,115 वाहन यात्रियों को लेकर चारधाम पहुंचे हैं। राज्य सरकार द्वारा सभी संबंधित विभागों के समन्वय से यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
April 29, 2026निर्माण कार्यों के शासनादेश के विलम्ब पर मुख्य सचिव ने जताई नाराजगी देहरादून। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में कुम्भ मेला – 2027 की तैयारियों के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों एवं अधिकारियों के साथ बैठक ली। सर्वप्रथम मुख्य सचिव ने कुम्भ मेले से संबंधित निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों के शासनादेश जारी ना होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आपत्तियों का निराकरण कर अगले 3 दिनों में शासनादेश जारी किए जाने के निर्देश दिए।मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कुंभ मेले के लिए भूमि अधिग्रहण और भूमि आबंटन की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर ली जाए। उन्होंने कहा कि विभागों और संस्थानों को आबंटित होने वाली भूमि को 30 जून तक आबंटित कर दिया जाए। उन्होंने आयुक्त गढ़वाल को भूमि अधिग्रहण एवं आवंटन प्रक्रिया कुम्भ मास्टर प्लान में शामिल किए जाने के निर्देश दिए।मुख्य सचिव ने कहा कि निर्माणदायी संस्थाओं द्वारा मेला क्षेत्र के अंतर्गत अपने कार्यालयों को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी आवश्यक तैनातियां शीघ्र से शीघ्र सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अनिवार्य रूप से कराये जाने वाले अस्थायी प्रकृति के कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र से शीघ्र शुरू किए जाने की बात कही।मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला क्षेत्र के लिए रेलवे एवं सड़क मार्ग यातायात प्लान तैयार कर फाईनल किए जाने हेतु मेलाधिकारी कुम्भ, आईजी कुम्भ और डीआरएम मुरादाबाद को शीघ्र बैठक कर सभी बुनियादी आवश्यकताएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार, नजीबाबाद और मैंगलोर की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एनएचएआई एवं लोक निर्माण विभाग के स्तर से होने वाले स्पर्र और जंक्शंस का निर्माण और मरम्मत कार्य शीघ्र पूर्ण कराया लिया जाए। उन्होंने कुम्भ क्षेत्र के आसपास के जनपदों में भी ट्रैफिक प्लान और पार्किंग सुविधाओं का विस्तार किए जाने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए।मुख्य सचिव ने आकस्मिक यातायात प्लान भी तैयार रखे जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रवेश करने वाले स्थानों पर भी पार्किंग, रुकने, खाने एवं शौचालयों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कुम्भ मेला क्षेत्र में चिह्नित पार्किंग स्थलों में भी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।मुख्य सचिव ने पूरे कुम्भ क्षेत्र के लिए सैनिटेशन का डेडिकेटेड प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कुम्भ मेले के दौरान देश विदेश से लाखों-करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। इस लिए कुम्भ क्षेत्र में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे जाने के लिए विशेष सैनिटेशन प्लान शीघ्र तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने उपयुक्त मात्रा में पर्यटक सूचना केंद्रों की स्थापना किए जाने पर भी जोर दिया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा ना हो और समय पर उचित जानकारी मिल सके।मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न लोक कलाओं के निपुण कलाकारों को इससे अपनी संस्कृति देश विदेश तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण महत्त्वपूर्ण दिवसों को छोड़कर प्रत्येक दिवस ऐसे पौराणिक, ऐतिहासिक एवं लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।इस अवसर पर सचिव श्री नितेश कुमार झा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्री बृजेश कुमार संत, श्री विनय शंकर पाण्डेय, श्री श्रीधर बाबू अद्दांकी, श्री रणवीर सिंह चौहान, मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, आईजी कुम्भ श्री योगेन्द्र सिंह रावत एवं रेलवे डिवीजन मुरादाबाद से वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
April 29, 2026जिस घर से बारात जानी थी वहंा से उठे दो जनाजे उधमसिंहनगर। सितारगंज क्षेत्र में तेज रफ्तार के कहर ने एक हँसते—खेलते परिवार की खुशियों को उम्र भर के गम में बदल दिया है। किच्छा हाईवे पर एक अनियंत्रित कार ने सड़क किनारे खड़े ई—रिक्शा को भीषण टक्कर मार दी, जिससे दो सगी बहनों की मौत हो गयी। जबकि पांच लोग गम्भीर रूप से घायल हुए है। बताया जा रहा है कि आज जिस घर से आज भाई की बारात प्रस्थान करनी थी, वहाँ अब जनाजे उठाये जा रहे है।जानकारी के अनुसार, सितारगंज के नया गांव निवासी 22 वर्षीय हिना पुत्री रईस अहमद और उनकी बड़ी बहन 25 वर्षीय निशा पत्नी तौफीक अहमद, अपनी ममेरी बहन रूबी के साथ बीते रोज भाई के निकाह की खरीदारी करने सितारगंज बाजार गई थीं। शॉपिंग के उपरांत तीनों बहनें ई—रिक्शा से वापस घर लौट रही थीं। नया गांव के समीप हाईवे किनारे जब वे रिक्शा से उतरकर चालक को किराया दे रही थीं, तभी सितारगंज की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने ओवरटेक करने के प्रयास में नियंत्रण खो दिया और ई—रिक्शा सहित खड़ी बहनों को जोरदार टक्कर मार दी।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भयानक थी कि ई—रिक्शा के परखच्चे उड़ गए और वहां खड़ी बहनें कई फीट दूर जाकर गिरीं। दुर्घटना में तीनों बहनों सहित कुल सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय नागरिकों ने सभी को तत्काल चिकित्सालय पहुँचाया। उप जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि उपचार के दौरान हिना ने दम तोड़ दिया, जबकि निशा की मृत्यु रुद्रपुर के एक निजी चिकित्सालय में हुई। ममेरी बहन रूबी का उपचार अभी भी जारी है।इस दुर्घटना ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। घर में भाई के निकाह की तैयारियां चरम पर थीं और आज बारात जानी तय थी, किंतु बहनों की मृत्यु के समाचार ने खुशियों को चीख—पुकार में बदल दिया। माता—पिता बेसुध हैं और गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। दुर्घटना में घायल अन्य चार यात्रियो रामकुमार गुप्ता, राजेश्वरी गुप्ता, डालचंद कश्यप और प्रेमपाल गंगवार का भी निजी चिकित्सालयों में उपचार चल रहा है। प्रशासन और पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए दोनों वाहनों को अपने अधिकार में ले लिया है। शवों का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
April 29, 2026नैनीताल। उत्तराखंड में मानव व वन्य जीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम नैनीताल जिले के लालकुआं क्षेत्र में सामने आया है। यहंा लालकुआं कोतवाली के पीछे स्थित पहाड़ी खत्ता (पहाड़ी खटृा) में टांडा रेंज के जंगल से निकले एक जंगली हाथी ने दो स्थानीय लोगों पर हमला कर दिया। जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गये और उन्होने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस व वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है। वहीं इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।जानकारी के अनुसार, आज सुबह एक हाथी जंगल से निकलकर बस्ती की ओर आया और अचानक दो व्यक्तियों पर आक्रमण कर बैठा। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दोनों व्यक्ति बच नहीं सके। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। वन अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में हाथियों के झुंड अक्सर जंगल की सीमा लांघकर बस्तियों और खेतों में घुस आते हैं, जिससे फसल क्षति के साथ—साथ मानव जान की हानि भी होती रहती है।बताया जा रहा है कि लालकुआं, हल्द्वानी और हल्दूचौड़ क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। हाथी न केवल फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि रिहायशी इलाकों, हाईवे और यहां तक कि कॉलोनियों में भी घुस आते हैं।हल्द्वानी—लालकुआं राष्ट्रीय राजमार्ग पर अक्सर हाथियों के झुंड दिखाई देते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार हाथी रात भर बस्तियों में डटे रहते हैं और सुबह बाउंड्री वॉल तोड़कर जंगल लौटते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों का सिकुड़ना, आवास क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों का बढ़ना और खाघ स्रोतों की कमी के कारण हाथी बस्तियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह मानव—वन्यजीव संघर्ष की एक बड़ी मिसाल है, जो उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में गंभीर समस्या बन चुकी है।इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। मांगों में शामिल हैं प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, हाथियों को रोकने के लिए सोलर फेंसिंग, ट्रेंच और अन्य बाधाओं का निर्माण, तथा जागरूकता कार्यक्रम। वन विभाग के अधिकारी मौके पर जांच कर रहे हैं और हाथी के झुंड की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि मृतकों के परिजनों को शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाएगा। साथ ही, क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी।
April 29, 2026पुलिस की प्रभावी व्यवस्थाओं से यात्रा मार्ग पर सुरक्षा सुदृढ़ रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ यात्रा सकुशल संचालित हो रही है श्री केदारनाथ धाम में निरन्तर श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है, कपाट खुलने की तिथि से पहले सप्ताह में तक कुल दो लाख सात हजार चार सौ बावन (2,07,452) श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के सकुशल दर्शन कर लिये हैं, बढ़ती भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन सुनिश्चित कराने हेतु पुलिस बल द्वारा प्रभावी व्यवस्थाएं की गई हैं।श्री केदारनाथ धाम पहुंच रहे सभी श्रद्धालुओं को पंक्तिबद्ध कराकर सुगम दर्शन कराये जा रहें हैं, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी द्वारा श्रद्धालुओं से निरन्तर संवाद स्थापित कर उनकी कुशलक्षेम के साथ—साथ उनका उत्साहवर्धन किया जा रहा है जो श्रद्धालुओं के लिए मानसिक संबल बन रहा है।प्रतिकूल मौसम के बावजूद ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल के स्तर से स्वयं के स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया जा रहा है। त्वरित सहायता हेतु यात्रा मार्ग पर 8 खोया—पाया केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां पुलिस बल की तैनाती की गई है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों में राहत कार्यों हेतु पुलिस बल, एसडीआरएफ और डीडीआरएफ के साथ निरंतर समन्वय बनाकर कार्य कर रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन के साथ ही मोबाइल या जरुरी सामान खोने पर वापस दिलवाने के साथ—साथ बिछड़े हुए श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलवाया जा रहा है। श्रद्धालुओं के सहायतार्थ यात्रा मार्गों पर खोया पाया केन्द्र बनवाये गये हैं। श्री केदारनाथ धाम यात्रा में अब तक मदद हेतु कुल 265 कॉल प्राप्त हुई हैं, जिनके सापेक्ष अब तक 100 श्रद्धालुओं के बिछड़ने पर उनके परिजनों से मिलवाया गया, 30 खोए हुए मोबाइल फोन, 45 पर्स व बैग तथा 10 अन्य जरुरी सामान ज्वैलरी आदि ढूंढकर वापस लौटाई गयी है, इसके अतिरिक्त बुजुर्ग व असहाय श्रद्धालुओं को मन्दिर दर्शन के समय आवश्यक सहयोग प्रदान किया गया है।
April 29, 2026वर्तमान समय में चल रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक चर्चा बंपर मतदान को लेकर हो रही है। इन चुनावों के लिए जो कार्यक्रम तय किया गया था उसमें असम, केरल और पांडुचेरी के चुनाव एक ही चरण में संपन्न हो चुके हैं जबकि तमिलनाडु का चुनाव दो चरणों में होने के साथ 23 अप्रैल को पूरा हो चुका है। पश्चिम बंगाल का चुनाव जो दो चरणों में है उसका अब अंतिम चरण का मतदान आज 29 अप्रैल को हो रहा है। इन सभी चुनावों में अब तक मतदान का प्रतिशत सामान्य से अधिक रहा है। खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव के पहले चरण में वॉेटर की जो सुनामी देखी गई उसने सारे रिकॉर्ड तोड़कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है यहां पहले चरण में हुए 94 फीसदी मतदान ने सियासी दलों के नेताओं की नींदें उड़ा दी है। इन सभी राज्यों में पश्चिम बंगाल का चुनाव इसलिए सबसे खास चुनाव बना हुआ है क्योंकि केंद्रीय सत्ता पर आसीन भाजपा पिछले दो विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी और उनकी टीएमसी की सरकार को उखाड़ फेंकने की तमाम कोशिशों में नाकाम रही है। ममता बनर्जी जो 15 साल से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कब्जा किए हुए हैं भाजपा के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बनी हुई है। भाजपा इस बार ममता को हर हाल में सत्ता से बाहर करना चाहती है अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही उसने संसद का विशेष सत्र बुलाया था लेकिन वह अपने मनसूबे में सफल नहीं हो सकी। पश्चिम बंगाल के चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बलों की 24 कंपनियाें की तैनाती से लेकर एसआईआर में 90 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने तथा तमाम बड़े अधिकारियों को बदलने तक वह सब कुछ किया गया है जो भी वह कर सकती थी। लेकिन इन तमाम कामों से आम आदमी को जिस तरह की समस्याओं से दो—चार होना पड़ा है तथा लाखों लोगों के सामने अपने संवैधानिक अधिकार चुने जाने का जो संभावित खतरा पैदा हो गया है उससे वह अत्यंत ही भयभीत है। यही कारण है कि वह अब सत्ता में बैठे लोगों को अपने वोट की ताकत से अपनी ताकत का एहसास कराने पर आमादा है। पहले चरण में इन मतदाताओं का इतनी बड़ी संख्या में वोट डालने के लिए निकलना भाजपा के लिए बड़ी खतरे की घंटी है इस चरण में कुछ पोलिंग बूथ तो ऐसे भी है जहां 98—99 फीसदी तक मतदान हुआ है। लोग वोट डालने के लिए सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक लाइनों में खड़े दिखाई दिए। 29 अप्रैल को अंतिम चरण में भी यहां इतना ही अधिक मतदान रहने की उम्मीद है जिसका कारण अब पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के वह डराने धमकाने वाले भाषण भी बन सकते हैं जिसमें वह टीएमसी कार्यकर्ताओं को गुंडे बताने से लेकर उन्हें उल्टा लटका कर सीधा कर देने की बात खुले मंचों से करते रहे हैं तथा सीएम ममता बनर्जी को भी अपने उसी लहजे में दीदी ओ दीदी तथा बंगाल के पुलिसकर्मियों को अबे और ओबे जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं भाजपा नेताओं की यह खीज अब उन पर ही भारी पड़ सकती है। चुनावी रिजल्ट पर जो भी सर्व आ रहे हैं उसमें टीएमसी की जीत के संकेत मिल रहे हैं लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा यहां हरियाणा व महाराष्ट्र तथा बिहार की तरह कोई बड़ा खेला भी कर सकती है।