August 17, 2026पूर्व सीएम की बेटी विधायक अनुपमा ने लगाए गंभीर आरोप स्कैम और साजिश के दावे से गरमाया सूबे का चुनावी माहौल देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी बहस लगातार तेज होती जा रही है। अब एक पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की बेटी की विधायक अनुपमा रावत ओर से प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। उन्होंने इसे कथित तौर पर बड़ा स्कैम बताते हुए आरोप लगाया कि मतदाताओं की आपत्तियों के नाम पर एक सुनियोजित प्रक्रिया चल रही है।उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया पहले ही राजनीतिक दलों के बीच बहस का विषय बनी हुई है। निर्वाचन विभाग की ओर से मतदाता सूची के सत्यापन और आवश्यक दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया को चुनावी सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाने की कवायद बताया जा रहा है। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में आम मतदाता, खासकर बुजुर्गों और ऐसे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिनके पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी विधायक अनुपमा रावत की टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद को नया आयाम दे दिया है। उनका आरोप है कि आपत्ति की प्रक्रिया का इस्तेमाल सामान्य मतदाता सत्यापन से आगे जाकर राजनीतिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और निर्वाचन प्रक्रिया के संबंध में अंतिम स्थिति निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकार्ड और जांच से ही स्पष्ट होगी। एसआईआर को लेकर सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि मतदाता सूची में कितने नाम जुड़ेंगे या हटेंगे। बड़ा सवाल यह है कि पूरी प्रक्रिया पर आम मतदाता कितना भरोसा कर पाएगा।लोकतंत्र में मतदाता सूची महज नामों की सूची नहीं होती। यही वह आधार है जिसके सहारे नागरिक अपने मताधिकार का इस्तेमाल करता है। इसलिए किसी भी मतदाता को यह आशंका नहीं होनी चाहिए कि दस्तावेजों की कमी, प्रशासनिक गलती या किसी आपत्ति के कारण उसका नाम सूची से बाहर हो सकता है।यही वजह है कि एसआईआर जैसी प्रक्रिया में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। निर्वाचन आयोग और प्रशासन को यह साफ करना होगा कि किसी मतदाता के खिलाफ आपत्ति किस आधार पर दर्ज की जा रही है, उसे अपनी बात रखने का कितना अवसर मिलेगा और अंतिम निर्णय से पहले उसकी सुनवाई किस स्तर पर होगी। साजिश और स्कैम जैसे आरोप राजनीतिक रूप से बेहद गंभीर हैं। ऐसे आरोप केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहने चाहिए। यदि किसी के पास ठोस तथ्य, दस्तावेज या प्रक्रिया में अनियमितता के प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए और सक्षम निर्वाचन अधिकारियों के सामने रखा जाना चाहिए।दूसरी ओर निर्वाचन मशीनरी की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं होगा कि प्रक्रिया नियमों के तहत चल रही है। जब समाज में संदेह पैदा हो जाए तो प्रशासन को तथ्यों के साथ उस संदेह का समाधान करना पड़ता है। उत्तराखंड में चुनावी राजनीति पहले ही 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में मतदाता सूची से जुड़ा कोई भी विवाद स्वाभाविक रूप से राजनीतिक रंग लेगा। इसलिए एसआईआर की प्रक्रिया को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर रखकर संचालित करना जरूरी है।उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में समस्या का एक अलग सामाजिक पक्ष भी है। बड़ी संख्या में परिवारों के पुराने रिकार्ड अलग-अलग स्थानों पर हैं। पलायन के कारण लोगों के पते बदले हैं। कई बुजुर्गों के पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में यदि सत्यापन की प्रक्रिया कठोर होती है तो सबसे पहले वही नागरिक प्रभावित हो सकते हैं जो प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। इसलिए एसआईआर में दस्तावेज मांगने के साथ-साथ नागरिकों की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझना होगा।उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ एसआईआर अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। सत्ता पक्ष इसे मतदाता सूची को शुद्ध करने की कवायद बता सकता है, जबकि विपक्ष इसे मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठा रहा है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन मतदाता सूची का सवाल उससे कहीं बड़ा है। यदि कोई अपात्र व्यक्ति सूची में है तो उसे हटाया जाना चाहिए। यदि कोई पात्र नागरिक छूट गया है तो उसका नाम जोड़ा जाना चाहिए। लेकिन दोनों काम एक समान पारदर्शिता और निष्पक्षता से होने चाहिए।पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी के आरोपों ने इस बहस को जरूर तेज कर दिया है, लेकिन अब गेंद निर्वाचन तंत्र के पाले में है। आरोपों का जवाब राजनीतिक बयान से नहीं, बल्कि आंकड़ों, प्रक्रिया और पारदर्शिता से देना होगा। क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होता कि कौन किस पर आरोप लगा रहा है। सबसे बड़ा सवाल होता है क्या हर पात्र नागरिक का वोट सुरक्षित है? और एसआईआर की पूरी प्रक्रिया का जवाब इसी एक सवाल में छिपा है।
August 17, 2026राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला यूजीसी-नेट परीक्षा का है। जून 2026 में आयोजित यूजीसी-नेट के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियां मिलने के बाद इन तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया है। गठित समिति ने तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी गलतियों के साथ प्रश्नों की भाषा, व्याकरण और पहले पूछे जा चुके प्रश्नों की पुनरावृत्ति जैसी खामियां भी स्वीकार की हैं। यह केवल तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का मामला नहीं है। यह उस पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल है, जिसकी विश्वसनीयता लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। परीक्षा में एक प्रश्न गलत हो जाए तो छात्र से गलती की कीमत वसूली जाती है। लेकिन जब प्रश्नपत्र बनाने वाली व्यवस्था ही गलती करे, तब जिम्मेदारी किसकी तय होगी? छात्र से कहा जाता है कि वह पूरी तैयारी करे, एक-एक अंक के लिए संघर्ष करे और अपने भविष्य का फैसला परीक्षा के परिणाम पर छोड़े। ऐसे में यदि परीक्षा संस्था ही गलत प्रश्न, गलत तथ्य, गलत अनुवाद या दोहराए गए प्रश्न लेकर सामने आए तो उस विद्यार्थी के समय, मेहनत और मानसिक दबाव का हिसाब कौन देगा? यूजीसी-नेट कोई सामान्य परीक्षा नहीं है। इसके जरिए सहायक प्रोफेसर बनने की पात्रता, जूनियर रिसर्च फेलोशिप और पीएचडी में प्रवेश जैसी अकादमिक राहें तय होती हैं। इसलिए इस परीक्षा में होने वाली छोटी-सी प्रशासनिक चूक भी किसी युवा के करियर पर बड़ा असर डाल सकती है। तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय कम से कम यह बताता है कि शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया। लेकिन असली सवाल इससे आगे है ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों हुई?दोबारा परीक्षा कराने से आगे बढ़कर यह बताना चाहिए कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी अंतिम जांच की प्रक्रिया क्या थी। विशेषज्ञों की कितनी स्तरों पर समीक्षा हुई? प्रश्नों के तथ्य और संदर्भों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ? अनुवाद की गुणवत्ता की जांच किसने की? और पुराने प्रश्नों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था थी? अगर इन सवालों के जवाब नहीं मिलते तो हर नई परीक्षा के साथ छात्रों का भरोसा और कमजोर होगा। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दुखद पक्ष यह है कि परीक्षा व्यवस्था की गड़बड़ी का बोझ हमेशा विद्यार्थी उठाता है। परीक्षा दोबारा होगी तो फिर तैयारी करनी होगी। यात्रा करनी होगी। समय निकालना होगा। जिन छात्रों ने नौकरी, पीएचडी या दूसरे अकादमिक अवसरों की उम्मीद में परिणाम का इंतजार किया, उनके लिए प्रक्रिया फिर पीछे चली जाएगी। तीन विषयों की पुनर्परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और अंग्रेजी, कामर्स तथा समाजशास्त्र की परीक्षाएं 9 और 10 सितंबर को होंगी। लेकिन केवल परीक्षा शुल्क माफ कर देना पर्याप्त नहीं है। छात्र का समय शुल्क से कहीं अधिक मूल्यवान है। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पहले ही भरोसे का संकट गहरा चुका है। ऐसे में एक के बाद एक परीक्षा में सामने आने वाली गड़बड़ियां यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या हमारी परीक्षा प्रणाली विद्यार्थियों की प्रतिभा को परखने की व्यवस्था है या विद्यार्थियों को व्यवस्था की गलतियों से जूझने के लिए छोड़ देने वाली मशीनरी? सरकार को इस घटना को महज एक तकनीकी त्रुटि मानकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। परीक्षा की विश्वसनीयता किसी भी शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद होती है। जिस देश में करोड़ों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए अपने भविष्य का रास्ता तलाशते हैं, वहां प्रश्नपत्र की गुणवत्ता से लेकर परिणाम की घोषणा तक हर चरण पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि परीक्षा प्रणाली का स्वतंत्र और व्यापक आडिट कराए। प्रश्नपत्र निर्माण की बहुस्तरीय समीक्षा हो, विषय विशेषज्ञों की जवाबदेही तय हो और तकनीकी प्रक्रिया के साथ मानवीय गुणवत्ता जांच को मजबूत किया जाए। शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था भी ऐसी हो जिसमें छात्र को बार-बार अपनी बात साबित करने के लिए संघर्ष न करना पड़े। परीक्षा में गलती केवल प्रश्नपत्र की गलती नहीं होती, वह किसी विद्यार्थी के भविष्य में पैदा हुई अनिश्चितता होती है। अब सबसे बड़ी चुनौती तीन परीक्षाएं दोबारा कराना नहीं, बल्कि उस भरोसे को दोबारा कायम करना है जो बार-बार लगने वाली परीक्षा संबंधी चोटों से कमजोर हो रहा है। युवाओं को ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें उन्हें यह भरोसा हो कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से होगा। क्योंकि आखिर परीक्षा केवल छात्रों की नहीं होती। जब परीक्षा व्यवस्था बार-बार गलती करती है, तब असली परीक्षा उस व्यवस्था की होती है।
August 17, 2026बिजली विभाग के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई देहरादून। ऋषिकेश क्षेत्र के खदरी, खड़कमाफ, श्यामपुर में करंट लगने की वजह से एक मां और उसकी 2 साल की बेटी की मौत हो गई। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।खदरी ग्राम प्रधान संगीता थपलियाल ने बताया कि घटना रविवार शाम की है। शिव मंदिर गली निवासी सुमन पत्नी हरपाल जेठुडी अपनी दो वर्षीय बच्ची के साथ मोटा प्लाट स्थित अपनी बहन के घर गई हुई थी। देर शाम को सुमन तेज वर्षा के बीच अपनी बच्ची के साथ घर जाने के लिए निकली थी। इस दौरान मार्ग में बिजली की तार टूट गई, अंधेरा होने के कारण उसे तार नहीं दिखाई और वे तार के संपर्क में आ गए, जिससे सुमन व उसकी बच्ची को बुरी तरह करंट लग गया और वे बेसुध हालत में पड़ गए। मृतकों की पहचान टिहरी गढ़वाल के पटृी भरपूर ग्राम सौड, देवप्रयाग निवासी 26 वर्षीय सुमन देवी और उनकी 2 साल की बेटी सृष्टि के रूप में हुई है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विघुत विभाग ऋषिकेश के अधिशासी अभियंता, एसडीओ शशिकांत और जेई शंभू प्रसाद बहुगुणा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। प्रशासन की ओर से आज ही इन तीनों अधिकारियों को निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि विभाग की लापरवाही की वजह से दो मासूम जानें चली गईं और ऐसी गलती को किसी भी सूरत में माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों इसके लिए बिजली लाइनों की सुरक्षा और रखरखाव को पुख्ता किया जाए।
August 16, 2026रुद्रपुर। आस्था जूनियर हाई स्कूल, शिवनगर, रुद्रपुर में देश का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, देशभक्ति एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। विद्यालय परिसर देशभक्ति के नारों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंज उठा।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरदार भगत सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रुद्रपुर की प्रोफेसर डॉ. वसुंधरा उपाध्याय जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए देश के स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।कार्यक्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व छात्र संघ सचिव रोहित भट्ट जी, राहुल तिवारी जी एवं रमेश जोशी जी की भी उपस्थिति रही। अतिथियों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।विद्यालय प्रबंधन की ओर से प्रबंधक पंकज दासगुप्ता एवं प्रधानाचार्या सुनीता गंगवार ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण अनंदिता घोष, सोमेन कर्मकार, अभिषेक दासगुप्ता, पिंकी, अंजलि, राजरानी, नेहा भारती, नेहा सागर, गुंजन, अनु, रजनी रानी, शालिनी, राजपाल, नरेंद्र, पुष्पा, रेखा, मिथिलेश एवं देवाशीष सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति गीत, भाषण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति का उत्साह देखने को मिला। विद्यालय प्रबंधन एवं प्रधानाचार्या ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अतिथियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश की प्रगति के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
August 16, 2026देहरादून। जनपद देहरादून में घरेलू गैस कनेक्शनों की ई केवाईसी प्रक्रिया तेजी चल रही है जिसके लिए भारत सरकार द्वारा अंतिम तिथि 15 अगस्त 2026 निर्धारित की गई थी l जनपद देहरादून में कुल 7,16,845 घरेलू गैस कनेक्शन हैं जिनमें से अभी तक 5,57,546उपभोक्ताओं ने ईकेवाईसी पूरी कर ली है, जबकि 1,59,299 उपभोक्ताओं ने अभी तक नहीं कराई है। इनमें 9,243 प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थी भी शामिल हैं। ऐसी दशा में भारत सरकार द्वारा एक अवसर और प्रदान करते हुए अंतिम तिथि 23 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। सभी उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना शीघ्र ईकेवाईसी पूर्ण कर लें। ईकेवाईसी करने के तीन सरल माध्यम उपलब्ध हैं: एक, संबंधित गैस एजेंसी पर जाकर; दो, गैस सिलिंडर की होम डिलीवरी करने वाले डिलीवरी कर्मी के पास उपलब्ध मोबाइल एप व बायोमेट्रिक उपकरण के माध्यम से, और तीन, संबंधित तेल विपणन कंपनी (जैसे इण्डेन, भारत गैस या एचपी गैस) का अधिकृत मोबाइल एप डाउनलोड कर स्वयं भी की जा सकती है। जिला पूर्ति अधिकारी के के अग्रवाल द्वारा सभी गैस उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे समय रहते अपनी ईकेवाईसी पूर्ण कराकर घरेलू एलपीजी सेवाओं का निर्बाध लाभ प्राप्त करते रहें। निर्धारित अंतिम तिथि 23 अगस्त 2026 तक भी EKYC नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू गैस की आपूर्ति बाधित हो जाएगी और उन्हें व्यावसायिक दरों पर गैस उपलब्ध होगी l
August 16, 2026वाराणसी। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय हड़कंप मच गया, जब मुंबई जाने वाले एक यात्री की पिस्टल से अचानक गोली चल गई। गोली पहले जमीन से टकराई और इसके बाद पास में मौजूद एयरपोर्ट स्टाफ के दो कर्मचारियों को जा लगी। घायलों में एक महिला कर्मचारी भी शामिल है। दोनों को तत्काल इलाज के लिए हरहुआ स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।जानकारी के अनुसार, आजमगढ़ निवासी एक यात्री एयर इंडिया की फ्लाइट से मुंबई जाने वाला था। एयरपोर्ट पर सुरक्षा प्रक्रिया के तहत यात्री ने अपने पास मौजूद पिस्टल और उसकी मैगजीन की जानकारी अधिकारियों को पहले ही दे दी थी। बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट पर हथियार और उससे संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान अचानक पिस्टल से गोली चल गई। गोली जमीन से टकराने के बाद पास खड़े एक पुरुष कर्मचारी के हाथ और एक महिला कर्मचारी की जांघ में जा लगी।एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, दोनों कर्मचारियों की हालत फिलहाल सामान्य बताई जा रही है और उनका उपचार जारी है।एयरपोर्ट निदेशक पुनीत गुप्ता के अनुसार, हथियार और उसके दस्तावेजों की जांच के दौरान यह घटना हुई। जांच के समय हथियार का मालिक और एयरपोर्ट स्टाफ दोनों मौके पर मौजूद थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और हथियार से संबंधित प्रक्रिया को लेकर भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गोली किन परिस्थितियों में चली।