August 12, 2026चंपावत। सड़क हादसे में देर शाम एक कार के खाई में गिर जाने से जहंा एक व्यक्ति की मौत हो गयी वही तीन लोग घायल हुए है। सूचना मिलने पर पुलिस व एसडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंच कर मृतक व घायलों का बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया जहंा घायलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।मामला चम्पावत जिले का है। यहंा खटीमा से पिथौरागढ़ जा रही कार बनलेख क्षेत्र में अनियंत्रित होकर करीब 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के वक्त कार में चार लोग सवार थे। दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हुए। हादसे की सूचना मिलते ही चंपावत कोतवाली पुलिस और एसडीआरएफ की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस और एसडीआरएफ ने खड़ी पहाड़ी से नीचे उतरकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद कार में फंसे सभी लोगों को खाई से बाहर निकाला गया और 108 एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल चंपावत पहुंचाया गया। जहंा चिकित्सकों ने जांच के बाद एक व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया। वहीं दो घायलों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। एक अन्य घायल की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी रेफर किया गया है। पुलिस और एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई के चलते घायलों को समय रहते खाई से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा सका। रेस्क्यू अभियान में स्थानीय लोगों ने भी पुलिस टीम का सहयोग किया। दुर्घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश चम्पावत। हादसे को गंभीरता से लेते हुए चंपावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार ने दुर्घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। दुर्घटना के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच के लिए एसडीएम चंपावत को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच अधिकारी को हादसे के कारणों, परिस्थितियों और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की गहनता से जांच कर 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क दुर्घटना के कारणों की तथ्यपरक जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
August 12, 2026संसद देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था है। यहां सवाल पूछे जाने चाहिए, जवाब दिए जाने चाहिए, बहस होनी चाहिए और उन सवालों का समाधान तलाशा जाना चाहिए जो देश के करोड़ों नागरिकों को प्रभावित करते हैं। लेकिन जब संसद परिसर ही सत्ता और विपक्ष के प्रदर्शन का अखाड़ा बन जाए तो सवाल केवल राजनीतिक टकराव का नहीं रहता, सवाल लोकतंत्र की प्राथमिकताओं का हो जाता है। छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष का आमने-सामने प्रदर्शन इसी बेचौनी की तस्वीर है। दोनों तरफ नारे हैं, आरोप हैं, पोस्टर हैं और अपनी-अपनी राजनीतिक व्याख्याएं हैं। सत्ता पक्ष कहता है कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। विपक्ष कहता है कि सरकार छात्रों की आवाज दबा रही है। लेकिन इस शोर के बीच एक आवाज लगातार गायब हैकृछात्र की आवाज। जिस छात्र के नाम पर संसद में प्रदर्शन हो रहा है, उससे कोई पूछ रहा है कि वह चाहता क्या है? उसे न तो संसद के बाहर नेताओं की नारेबाजी चाहिए और न संसद के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप। उसे चाहिए एक ऐसी परीक्षा व्यवस्था, जिस पर उसे भरोसा हो। उसे चाहिए कि उसकी मेहनत किसी लापरवाही, अनियमितता या व्यवस्था की कमजोरी के कारण बर्बाद न हो। उसे चाहिए कि यदि उसके साथ अन्याय हुआ है तो उसकी शिकायत सुनी जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। इतनी सी बात है। लेकिन राजनीति ने इस सीधी बात को भी इतना जटिल बना दिया है कि छात्र का मूल सवाल पीछे छूट गया है। भारत में प्रतियोगी परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं होती। उसके पीछे वर्षों की तैयारी होती है। गांव से शहर आने वाला छात्र, छोटे कमरे में रहकर पढ़ने वाला छात्र, खेत में काम करने के बाद किताब खोलने वाला छात्र, परिवार की आर्थिक मुश्किलों के बीच फीस जुटाने वाला छात्रकृहर किसी की अपनी कहानी है। वह केवल प्रश्नपत्र हल नहीं करता, वह अपने परिवार की उम्मीदें हल करता है और जब परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठता है तो चोट केवल एक परीक्षा पर नहीं होती। चोट उस भरोसे पर होती है जिसके सहारे युवा अपना भविष्य बना रहा होता है। यही कारण है कि छात्रों के सवाल को राजनीतिक नारे में बदल देना खतरनाक है। सरकार के लिए यह केवल विपक्ष का आंदोलन नहीं होना चाहिए। विपक्ष के लिए यह केवल सरकार को घेरने का अवसर नहीं होना चाहिए। दोनों को यह समझना होगा कि युवा किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। वह देश की संपत्ति है। सरकार को यदि लगता है कि परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है तो उसे तथ्यों के साथ सामने आना चाहिए। अगर कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसे स्वीकार करने में संकोच क्यों? गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं है। गलती छिपाना कमजोरी है। सरकार के पास संस्थाएं हैं, संसाधन हैं और निर्णय लेने की शक्ति है। इसलिए उससे सवाल भी ज्यादा होंगे। यह लोकतंत्र का सामान्य नियम है। यदि छात्र किसी परीक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो सरकार को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। जांच की जरूरत है तो जांच हो। जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है तो जिम्मेदारी तय हो। परीक्षा प्रणाली में तकनीकी या प्रशासनिक कमी है तो सुधार हो। लेकिन यह भी जरूरी है कि जांच और सुधार केवल घोषणा बनकर न रह जाएं। युवा अब घोषणाओं से आगे की चीज मांगता हैकृविश्वास। लेकिन विपक्ष भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। हर छात्र आंदोलन को राजनीतिक आंदोलन बना देना आसान है। हर परीक्षा विवाद में सरकार के खिलाफ नारा लगाना भी आसान है। मुश्किल काम है समस्या का समाधान सामने रखना। अगर विपक्ष छात्रों के साथ है तो संसद में केवल हंगामा क्यों? विस्तृत बहस क्यों नहीं? परीक्षा सुधार की ठोस योजना क्यों नहीं? जिम्मेदार संस्थाओं की जवाबदेही तय करने का दबाव क्यों नहीं? सड़क पर प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संसद में विपक्ष की असली ताकत उसके सवाल और तर्क हैं। संसद में आवाज ऊंची करने से ज्यादा जरूरी है सवाल को मजबूत करना। विपक्ष को यह समझना होगा कि छात्र उसके राजनीतिक पोस्टर का चेहरा नहीं बनना चाहता। वह चाहता है कि उसका भविष्य सुरक्षित हो। आज सबसे बड़ा सवाल संसद से है। क्या संसद छात्रों के मुद्दे पर गंभीर बहस करेगी? क्या सरकार और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाने से आगे बढ़ेंगे? क्या परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कोई सर्वदलीय सहमति बनेगी? क्या यह तय होगा कि किसी परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत होने पर जांच और कार्रवाई की समयसीमा क्या होगी? क्या विद्यार्थियों को समय पर जानकारी देने की जवाबदेही तय होगी? क्या परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही भी उतनी ही कठोर होगी जितनी किसी छात्र की होती है? क्योंकि छात्र से कहा जाता है कि समय पर आवेदन करो। समय पर फीस भरो। समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचो। एक गलती हुई तो परिणाम भुगतो। तो फिर व्यवस्था से यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि अगर उसकी गलती से लाखों छात्रों का समय और पैसा बर्बाद हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा? नियम केवल छात्रों के लिए क्यों? जवाबदेही व्यवस्था की भी होनी चाहिए। भारत की राजनीति में युवा हमेशा सबसे आकर्षक शब्द रहा है। हर चुनाव में युवा शक्ति की बात होती है। रोजगार के वादे होते हैं। स्टार्टअप की बातें होती हैं। नई शिक्षा व्यवस्था की बातें होती हैं। डिजिटल भारत और विकसित भारत की बातें होती हैं। लोकसभा के बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष का आमने-सामने प्रदर्शन देखकर शायद दोनों अपने-अपने समर्थकों को यह साबित कर रहे हों कि वह छात्रों के साथ हैं। लेकिन छात्र को यह साबित करने की जरूरत नहीं कि कौन उसके साथ खड़ा है। उसे परिणाम चाहिए। अगर सरकार सच में छात्रों के साथ है तो वह उनके सवालों के जवाब दे। अगर विपक्ष सच में छात्रों के साथ है तो वह उनके सवालों को राजनीतिक शोर से निकालकर नीतिगत बहस में ले जाए। दोनों मिलकर परीक्षा व्यवस्था की ऐसी जवाबदेही तय करें कि आने वाली पीढ़ी को बार-बार सड़क पर उतरना न पड़े। यही राजनीति की परीक्षा है।
August 11, 2026पिछले वर्ष के मुकाबले यात्रियों की संख्या 4.68 लाख अधिक चारधाम यात्रा : 114 दिनों में दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख पार देहरादून। उत्तराखण्ड में मानसून की बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यात्रा को नियंत्रित और आवश्यकता के अनुसार रोककर संचालित कर रही है, लेकिन तीर्थयात्रियों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। 114 दिनों में ही दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख के पार पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में साढ़े चार लाख से अधिक है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद राज्य आपदा कंट्रोल रूम के माध्यम से आपदा प्रबंधन पर नजर रखे हुए हैं। चारों धामों और यात्रा पड़ावों में यात्रियों के ठहरने, खाने और अन्य सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों की मदद के लिए सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है।प्रदेश सरकार के बेहतर आपदा प्रबंधन और इंतजामों के चलते यात्रा नया कीर्तिमान बनाने की ओर बढ़ रही है। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। सोमवार 10 अगस्त तक इस यात्राकाल के 114 दिनों में कुल 47 लाख 02 हजार 703 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं, जबकि बीते वर्ष 2025 में इतनी ही अवधि में 42 लाख 34 हजार 147 यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे थे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 04 लाख 68 हजार 556 अधिक है। चारों धामों में अब तक की कुल संख्या की बात करें तो बद्रीनाथ में 16 लाख 12 हजार 112, केदारनाथ में 14 लाख 50 हजार 116, गंगोत्री में 07 लाख 37 हजार 629 और यमुनोत्री धाम में 06 लाख 62 हजार 347 यात्री दर्शन कर चुके हैं। जबकि हेमकुंट साहिब में 02 लाख 40 हजारे 499 श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं।मौसम लगातार खराब होने और प्रशासनिक अलर्ट के बावजूद सोमवार को 15 हजार 376 श्रद्धालु चारधाम दर्शन को पहुंचे। इनमें सर्वाधिक 9559 यात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे। जबकि केदारनाथ में 4170, गंगोत्री में 1204 और यमुनोत्री धाम में 443 श्रद्धालुओं न दर्शन किए।भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों को श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। 23 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा सोमवार 10 अगस्त को 110 दिन की अवधि पूर्ण कर चुकी है। इस दौरान 16 लाख 12 हजार 112 श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम में शीश नवा चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 03 लाख 50 हजार 192 अधिक तीर्थयात्री दर्शनों को पहुंच चुके हैं। पिछले वर्ष 04 मई 2025 को बद्रीनाथ यात्रा का श्रीगणेश हुआ था। तब 21 अगस्त यानी 110 दिन में यह आंकड़ा 12 लाख 61 हजार 280 था। चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिलाधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू हो सके। भूस्खलन या अन्य किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए गए हैं। श्रद्धालुओं को मौसम के मिजाज को देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।- पुष्कर सिंह धामीमुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड
August 11, 2026मुख्यमंत्री ने संगठनों की समस्याओं एवं मांगों के परीक्षण कर उचित समाधान के दिए निर्देश देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों ने भेंट की। प्रतिनिधिमंडलों ने अपने-अपने विभागों एवं संवर्गों से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिनिधिमंडलों की समस्याओं एवं मांगों को गंभीरता से सुनते हुए शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को नियमानुसार परीक्षण कर यथोचित कार्यवाही एवं समस्याओं के उचित समाधान के निर्देश दिए।शिक्षा अधिकारी प्रशासनिक संवर्ग एसोसिएशन, उत्तराखंड के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने श्री गोविंद राम जायसवाल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से भेंट की।प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक, अपर निदेशक, संयुक्त निदेशक एवं खंड शिक्षा अधिकारियों के रिक्त पदों पर विभागीय पदोन्नति किए जाने तथा कार्मिकों की परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने के उपरांत स्वतः स्थायीकरण की व्यवस्था सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान का अनुरोध किया।उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, जल संस्थान के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड जल संस्थान के राजकीयकरण की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। वहीं, उत्तराखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक कार्मिकों के रिक्त पदों को भरे जाने, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षण कार्मिकों के पदों के पुनर्गठन तथा गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रयोगशाला सहायकों को राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्रयोगशाला सहायकों के समान वेतनमान प्रदान किए जाने का अनुरोध किया।उत्तराखंड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने 25 अक्टूबर 2005 से पूर्व विज्ञापित पदों पर नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना में सम्मिलित किए जाने तथा वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा में शिथिलता प्रदान किए जाने का अनुरोध किया।इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संगठन, उत्तराखंड, उत्तराखंड एएनएम संवर्ग संगठन, लैब टेक्निशियन संगठन, राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ उत्तराखंड, माध्यमिक अतिथि शिक्षक संघ उत्तराखंड, अंशकालिक शिक्षक संघ तथा उत्तराखंड राज्य आबकारी निरीक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडलों ने भी मुख्यमंत्री से भेंट कर अपने-अपने संवर्गों से संबंधित विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से अवगत कराया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को निर्देश दिए कि विभिन्न संगठनों द्वारा रखी गई मांगों एवं समस्याओं का संबंधित विभागों के माध्यम से नियमानुसार परीक्षण कराते हुए उचित समाधान की दिशा में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, दिलीप जावलकर, आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, अपर सचिव जे.सी. काण्डपाल सहित मुख्यमंत्री कार्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तरकाशी के सामाजिक कार्यकर्ता व गंगा विचार मंच (नमामि गंगे, उत्तराखंड) के प्रांतीय/प्रदेश संयोजक लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने भी भेंट की।
August 11, 2026पौड़ी। सावन मास में आयोजित प्रसिद्ध श्री नीलकंठ महादेव कांवड़ यात्रा लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अटूट श्रद्धा और आस्था का अनुपम संगम बने इस महापर्व में 49 लाख से अधिक शिवभक्त एवं श्रद्धालु श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में जलाभिषेक एवं दर्शन कर अपने गंतव्यक के लिए प्रस्थान कर चुके हैं।बता दें कि आज दोपहर 12 बजे तक लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक एवं दर्शन किया। यात्रा के समापन की ओर अग्रसर होने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था निरंतर चरम पर बनी हुई है।शिवभक्तों/श्रद्धालुओं की इस विशाल यात्रा को सुगम, सुरक्षित, व्यवस्थित एवं निर्बाध बनाए रखने हेतु पुलिस प्रारंभ से ही पूरी तत्परता, समर्पण और पेशेवर दक्षता के साथ प्रत्येक मोर्चे पर डटी हुई है। कठिन परिस्थितियों और अत्यधिक भीड़ के दबाव के बीच भी पुलिस अधिकारी एवं जवान पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
August 11, 2026तमकनाला आपदा की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं सीएम देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तमकनाला आपदा पर मॉनिटरिंग करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।आज यहां चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ—मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में बेली ब्रिज बहने की घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी चमोली एवं गढ़वाल मंडल आयुक्त से स्थिति की जानकारी लेते हुए राहत—बचाव, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और कनेक्टिविटी बहाली को लेकर स्पष्ट दिशा—निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राशन, खाघ सामग्री, दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों एवं अन्य उपलब्ध माध्यमों से ग्रामीणों तक जरूरी सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ—मलारी मोटर मार्ग पर आवाजाही को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर तत्काल कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति एवं नुकसान का स्वयं आकलन करने को कहा, ताकि राहत और पुनर्व्यवस्था से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। बदलते मौसम और बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निचले क्षेत्रों तथा नदी—नालों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाए और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की पूरी तैयारी रखी जाए। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से भी चमोली सहित प्रदेश के सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जा सके। सोमवार को चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ—मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह बढ़ने के कारण 123 बीआरटीएफ, सुराईथोटा द्वारा निर्मित बेली ब्रिज बह गया था। तेज बहाव की चपेट में एक व्यक्ति और एक कैंपर वाहन के बहने की सूचना भी प्राप्त हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और राहत—बचाव कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमों को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं संबंधित विभागों की टीमें भी मौके पर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। तमकनाला की घटना के बाद सरकार की प्राथमिकता केवल राहत एवं बचाव कार्यों तक सीमित नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति, वैकल्पिक कनेक्टिविटी और आवाजाही की शीघ्र बहाली पर भी समान रूप से काम किया जा रहा है।मुख्यमंत्री धामी की लगातार मॉनिटरिंग और अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर त्वरित निर्णय लेने के निर्देश राज्य सरकार की प्रो—एक्टिव आपदा प्रबंधन नीति को दर्शाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय पर सतर्कता, बेहतर समन्वय और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई से उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कठिन परिस्थितियों में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।