भाजपा नेताओं का दिल्ली में डेरा

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नई दिल्ली/देहरादून। 36 घंटे अपने दिल्ली स्थित कावेरी अपार्टमेंट से बाहर निकले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलकर फिर अपने आवास पर पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने किसी से भी कोई बात नहीं की। उधर आज पार्टी हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को दिल्ली तलब कर लिया है। वही काबीना मंत्री सतपाल महाराज भी दिल्ली में मौजूद है और जेपी नड्डा व अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं। सूबे के भाजपा नेताओं के दिल्ली में जमावड़े को लेकर राज्य में फिर बड़े फेरबदल के कयास लगाए जा रहे हैं।
भले ही अभी कोई नेता इस मुद्दे पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है लेकिन एक बात पूरी तरह से साफ है कि भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। बीते 3 दिन से भाजपा हाईकमान ने बेवजह तो यूं ही मुख्यमंत्री को दिल्ली नहीं रोक कर रखा होगा? बुधवार देर रात जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद वह अपने घर पर ही रहे और किसी से मुलाकात व बात भी नहीं की। सतपाल महाराज के बाद प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को दिल्ली बुलाया जाना भी कई तरह के संदेह पैदा करता है। चर्चा है कि सीएम आज देर शाम तक देहरादून लौट सकते हैं उनके दूल आने पर यह साफ हो सकेगा कि आखिर भाजपा के अंदर चल क्या रहा है। चर्चा यह भी है कि भाजपा ने जिन चुनावी और राजनीतिक उद्देश्यों को लेकर सीएम व प्रदेश अध्यक्ष को बदला था वह अब भाजपा को पूरे होते नहीं दिख रहे हैं जिसके कारण स्थिति पर फिर से चिंतन मंथन चल रहा है। तीरथ के चुनाव लड़ने से लेकर 2022 का चुनाव जीतने की चुनौती से घिरी भाजपा और उसके नेताओं को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि वह करे तो क्या करें? चुनाव में भी अब अधिक समय नहीं बचा है। ऐसे में अब अगर इन चुनावों से पूर्व कोई बड़ा परिवर्तन किया गया तो उसका परिणाम अच्छा होगा यह जरूरी नहीं है।

भाजपा अपने ही जाल में फंसीः हरीश
दिल्ली। सीएम तीरथ रावत के दिल्ली प्रवास और भाजपा नेताओं की दिल्ली दौड़ को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने चुटकी लेते हुए कहा है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन कर भाजपा अब अपने ही जाल में फंस चुकी है। भाजपा नेताओं को यह समझ नहीं आ रहा है कि करे तो क्या करें?
उन्होंने कहा कि भाजपा संवैधानिक और वैधानिक संकट में फंस गई है इन दिनों दिल्ली में कुछ प्रवासी तोते आ गए हैं और राज्य में दूसरी बार मुख्यमंत्री बदलने की कोशिशें हो रही है। भाजपा नेताओं को अब कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें?

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