बिना नोटिस गिरफ्तारी नहींः कुंभ में कोविड जांच में फर्जीवाड़े की आरोपी कंपनी को हाईकोर्ट से राहत

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नैनीताल। हरिद्वार कुम्भ में कोविड जांच में हुए फर्जीवाड़े की आरोपी मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने बिना नोटिस के गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने कंपनी को जांच में सहयोग करने को कहा है। कंपनी को 25 जून को जांच अधिकारी के सम्मुख पेश होने के निर्देश दिए हंै।
मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज ने पिछले दिनों हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज एफआरआई रद करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। जिस पर आज न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनएस धानिक की एकलपीठ में याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से कहा कि वह जांच में सहयोग को पूरी तरह तैयार हैं और 25 जून को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होंगे। याचिकाकर्ता के अधिवत्तQा ने कहा कि उनको अब तक सेक्शन 41 का नोटिस नहीं मिला है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सात साल से कम की सजा वाले अपराध में दिया जाना जरूरी है।
न्यायालय ने अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य में सर्वाेच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में याचिकाकर्ता को मनमानी गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को जांच में शामिल होने और 25 जून को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का भी निर्देश दिया है। न्यायालय ने जांच अधिकारी को धारा 41 सीआरपीसी के तहत प्रदान की गई प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा नोटिस दिया जाना वैधानिक संरक्षण है।
उल्लेखनीय है कि हरिद्वार महाकुंभ के दौरान कोविड टेस्ट में फर्जीवाड़ा के मामले में हरिद्वार के मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा मैक्स के साथ ही दो लैबों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। मैक्स ने याचिका में प्राथमिकी निरस्त करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की प्रार्थना की थी।
विदित हो कि उत्तराखंड में हरिद्वार कुंभ के दौरान कोरोना टेस्टिंग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। जांच में कम से कम एक लाख कोरोना टेस्ट फर्जी पाए गए। एक जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि उत्तराखंड सरकार की तरफ से कुंभ मेले के दौरान कराई जाने वाली कोरोना टेस्टिंग के लिए एक प्राइवेट एजेंसी ने इतनी बड़ी जांच में कम से कम एक लाख फर्जी रिपोर्ट जारी की थीं। हरिद्वार जिला प्रशासन ने अब उन आरोपों की जांच का आदेश दिया है, जिनमें कहा गया है हरिद्वार में कुंभ उत्सव के दौरान कोरोना टेस्टिंग करने के लिए काम करने वाली प्राइवेट लैब्स की ओर से नकली रिपोर्ट जारी की गई थीं।
हरिद्वार में 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक कुंभ मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान 22 प्राइवेट लैब्स की तरफ से लगभग 4 लाख कोरोना टेस्ट किए गए थे। फरीदकोट पंजाब निवासी एक व्यत्तिQ ने आइसीएमआर से कोरोना जांच में फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। इस व्यत्तिQ के मोबाइल पर कोरोना जांच का संदेश पहुंचा था, जबकि उसकी कभी कोरोना जांच हुई ही नहीं।
राज्य के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने मामले की प्रारंभिक जांच कराई। कोविड—19 मामलों के चीफ कंट्रोलिंग आफिसर डा. अभिषेक त्रिपाठी के स्तर से की गई तो जांच में शिकायत सही पाई गई। चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार द्वारा नगर कोतवाली के मैक्स, लाल चंदानी कंपनी व नलवा लैब के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
कुंभ के दौरान कोरोना जांच घोटाले की जांच एसआइटी कर रही है। इसके अलावा सीडीओं के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम अलग से जांच कर रही है। दो दिन पहले ही कोरोना जांच कंपनी मैसर्स मैक्स कारपोरेट सर्विसेज नई दिल्ली व नलवा लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा व डा. लाल चंदानी लैब नई दिल्ली पर नामजद मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

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