चारधाम यात्राः सरकार के लिए इधर कुंआ उधर खाई

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देहरादून। उत्तराखण्ड चारधाम यात्रा पहाड़ों की लाइफ लाइन है। यात्रा शुरू होने के साथ ही पहाड़ वासियों का पहाड़ सा जीवन कुछ ढर्रे पर आने लगता है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आने से पर्वतीय जिलों के लोगों को रोजगार के साथ ही पूरे प्रदेश का कारोबार रफ्तार पकड़ लेता है लेकिन पिछले साल से यात्रा पर कोरोना की ऐसी मार पड़ी है कि इससे उबरने के लिए कारोबारियों को यात्रा शुरू होने का इंतजार है। सरकार अगर कोविड कारणों से यात्रा शुरू नहीं करती है तो प्रदेशवासियों का गुस्सा झेलना पड़ता है और शुरू करने की कोशिश की तो हाईकोर्ट ने कोविड से निपटने की तैयारियों को नाकाफी बताते हुए यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब अगर पहाड़वासियों का ख्याल न करे तो आगामी चुनाव में वोट का संकट और अपनी जिद पर अड़ कर यात्रा शुरू करती है तो हाईकोर्ट का डंडा।
इन हालात में सरकार के लिए इधर कुंआ उधर खाई वाली कहावत एकदम सटीक बैठती है। चुनावी साल में सरकारें हर लोकलुभावन काम को पूरा करने में जुटी रहती हैं। सरकार के साथ ही विपक्षी दल भी जनता को लुभाने के लिए कोई न कोई मुद्दा उठा कर सड़कों पर नजर आते हैं। पर इस चुनावी साल में नजारा बदला—बदला सा है। एक तो वैश्विक महामारी की मार और उस पर कोर्ट की बार—बार की फटकार, सरकार को अपनी मनमर्जी करने का मौका ही नहीं मिल रहा है। अभिव्यक्ति की आजादी इतनी की जिसका जो मन कर रहा है सोशल मीडिया में लिख— बोल कर वायरल कर रहा है अब सरकार की किरकिरी हो या विपक्षी दलोंं की हौसलाअफजाई।
इस चुनावी साल में कोरोना ने सरकार के सारे मंसूबों पर पानी फेर दिया है। एक ओर जहां चुनावी साल में भाजपा ने सीएम बदल दिया वहीं अब महामारी के चलते जन कार्यों को निपटाने में सरकार के पसीने छूट रहे हैं। चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद से ही लोगों को इंतजार है कि सरकार कब यात्रा को खोले और लोगों को रोजगार के अवसर मिले लेकिन ऐसा कोई भी कदम सरकार नहीं उठा पा रही है। पहले कोविड के कारण और अब हाईकोर्ट के आदेश के कारण सरकार ने आज से शुरू होने वाली यात्रा को रोक दिया है। वहीं भाजपा की तीन दिन की चिंतन बैठक के बाद सीएम बीते रोज से दिल्ली में हैं। तो ऐसे में जहां सरकार और भाजपा के लिए हर पल कीमती है वहीं भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सीएम को दरबार में बुला रहा है। अब भले ही सरकार ने उत्तराखण्ड में चारधाम यात्रा शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हो लेकिन कोविड के चलते सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला आता है यह कोई नहीं जानता। सबको बस चारधाम यात्रा खुलने का इंतजार है।

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