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सवालः प्रेमचन्द और गोविंद सिंह का अब क्या होगा?

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सिर्फ नौकरी पाने वालों पर ही कार्रवाई क्यों, देने वालों पर क्यों नहीं?

देहरादून। सीना ठोक कर अपने—अपने कार्यकाल की विधानसभा भर्तियों को संवैधानिक बताने वाले पूर्व स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल और गोविंद सिंह का अब क्या होगा? उनके कार्यकाल में हुई भर्तियों को अब विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कराई गई जांच में तो नियम विरुद्ध सिद्ध कर ही दिया गया है साथ—साथ उन 228 लोगों की भी नौकरियों का जाना तो तय हो ही गया है। वहीं विधानसभा सचिव को भी सस्पेंड कर दिया गया है मगर गोविंद सिंह और प्रेमचंद्र अग्रवाल जिन्होंने यह नियुक्तियां की उनके खिलाफ शासन स्तर पर या पार्टी स्तर पर कोई कार्यवाही की जाएगी या इस मामले को बस यही इतिश्री कर दिया जाएगा?
इस जांच व कार्रवाई से पूर्व स्वयं को पाक साफ बताने वाले भाजपा और कांग्रेस के यह नेता जिस दबंगई से यह कहते रहे हैं कि उन्होंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है अगर अपने सगे संबंधियों को नौकरियां दे दी तो कौन सा पाप कर दिया उन नेताओं को जो वास्तव में इस पूरे मामले के लिए जिम्मेवार हैं क्या उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं होनी चाहिए भले ही गोविंद सिंह कुंजवाल 2022 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब विधायक भी न रहे हो लेकिन पूर्व स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल तो अभी धामी सरकार में वित्त मंत्री जैसे बड़े पद पर आसीन हैं। क्या धामी सरकार जो इस फैसले को पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता बता रही है उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाएगी या फिर भाजपा उन्हें पार्टी से निलंबित करेगी? उनके ऊपर जो आरोप लगे हैं वह कोई कम गंभीर नहीं है। उससे भी ज्यादा गंभीर बात है उनका यह कहना कि हां मैंने भाजपा नेताओं के बच्चों को नौकरियां दी। क्या भाजपा की पारदर्शिता और सबका साथ सबका विकास यही सब करना है जो इस पूरे प्रकरण में सामने आया है। भले ही विधानसभा अध्यक्ष ने आज बड़ा फैसला सुनाया हो लेकिन अभी बहुत सारे सवाल हैं जिनका जवाब सरकार और भाजपा को देना होगा।

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