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तिरुपति मंदिर के प्रसाद में चर्बी और मछली का तेल!

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अमरावती । आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को अमरावती में एनडीए विधायक दल की बैठक को संबोधित करते हुए कहा था, ‘पिछली वाई एस जगन मोहन रेड्डी सरकार ने तिरुमाला में लड्डू ‘प्रसाद’ बनाने के लिए घी के बजाय जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया था। ये तिरुमाला लड्डू घटिया सामग्री से बनाए गए थे। जिससे की मन्दिर की पवित्रता नष्ट हुई और लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया। एन चंद्रबाबू नायडू के आरोपों को खारिज करते हुए वाईएसआरसीपी ने उनका मजाक बनाया था। लेकिन अब इस बात की पुष्टि हो गई है कि प्रसाद के रूप में भक्तों को दिए जाने वाले लड्डुओं में जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल का इस्तेमाल किया गया था। सोशल मीडिया पर जारी की गई कथित परीक्षण की रिपोर्ट के बाद अब एन चंद्रबाबू नायडू के आरोप सही साबित हुए हैं। जिसके बाद वाईएसआरसीपी चुप हो गई है। सीएम चंद्रबाबू नायडू ने ये आरोप लोकसभा चुनावों के बाद 23 जुलाई को जारी हुई थी रिपोर्ट के मुताबिक किया, जिसमें की प्रसाद के लिए उपयोग होने वाले लड्डुओं के सैंपल्स को लेकर उनकी जांच की गई थी। जिससे ये पता चला कि इन लड्डुओं में जिस घी का इस्तेमाल हो रहा है, उसमें फिश ऑयल, एनिमल टैलो और लार्ड की मात्रा भी हो सकती है। आपको बता दें कि तिरुपति मन्दिर भारत के सबसे बड़े मन्दिरों में से एक है। इसकी मान्यता के चलते हर साल लगभग तीन करोड़ हिन्दू यहां दर्शन के लिए आते हैं। इन श्रद्धालुओं को प्रसाद के तौर पर लड्डू दिए जाते हैं। इस पूरी व्यवस्था को वो समिति देखती है, जो कि आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार के अंदर आती है। इस समिति का नाम तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् है। यही समिति प्रसाद के लड्डुओं को बनाने के सभी सामग्री खरीदती है और लड्डू बनवाती है।
आपको बता दें कि तिरुपति मन्दिर को हर साल करीब तीन हज़ार करोड़ रुपये का चढ़ावा और दान मिलता है। जिसमें से500 से 600 करोड़ रुपये तो केवल लड्डुओं का प्रसाद को बेचकर मिलते हैं

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