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आपदा की चौतरफा मार

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  • दर्जनों गांवों में सामान की आपूर्ति ठप
  • सड़के बंद, शासन—प्रशासन व जनता लाचार
  • डेंजर जोन बढ़े, भूस्खलन बड़ी समस्या

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण बचाव व राहत प्रभावित हो रहा है। सड़कों के बंद होने से दर्जनों गांवों का संपर्क लंबे समय से कटा हुआ है, जिससे अब लोगों को खाने—पीने के सामान की भी दिक्कतें हो रही है। वहीं मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है। सड़के बंद होने से आवश्यक जरूरत का सामान भी लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है जिससे लोगों की समस्याएं बढ़ती जा रही है।
धराली की आपदा को एक माह का समय बीत चुका है लेकिन क्षेत्र में अभी तक जन सुविधायें सामान्य नहीं हो सकी है। सड़क मार्ग अवरुद्ध होने के कारण क्षेत्र के कई गांवों की सप्लाई लाइन बाधित है। उधर यमुनोत्री घाटी में भी स्यानाचटृी क्षेत्र में बनी झील और पुल पर आए खतरे के कारण इस क्षेत्र के लगभग 12 गांवों का संपर्क बीते दो सप्ताह से जिला मुख्यालय से कटा हुआ है। लोगों के पास अब खाने—पीने का सामान भी खत्म हो रहा है। आपदा ग्रस्त क्षेत्र के लोग बिजली आपूर्ति और जल आपूर्ति के संकट को झेल ही रहे हैं उनके सामने अब पेट भरने के संकट के साथ बीमार व्यक्तियों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना भी संभव नहीं रहा है। हर्षिल में सेना के कैंप के ऊपर एक और नई झील बन चुकी है तथा चकराता हाईवे के कई स्थानों पर बंद होने से लोग परेशान हैं। यहां कुनैन गांव के लोगों को एक महिला को 12 किलोमीटर डंडी कंडी के सफर के बाद अस्पताल तक पहुंचाना पड़ा है।
चमोली, उत्तरकाशी तथा रुद्रप्रयाग जो जिले आपदा से अधिक प्रभावित है जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है इन क्षेत्रों में जो पुराने डेंजर जोन थे वह तो थे ही साथ ही दर्जनों नये लैंड स्लाइड जोन बनने से आवा जाही ठप हो गई है। बदरीनाथ हाईवे भी कई स्थानों पर बाधित हो चुका है। उधर अल्मोड़ा पिथौरागढ़ हाईवे भी बीते 4 दिन से बंद पड़ा है। जिसे खुलने में अभी कई दिन का समय लग सकता है। खैरना हाईवे के बंद होने से कई गांवों की सप्लाई लाइन कट गई है।

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