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पतंगबाजी हमारी संस्कृति और विरासत का हिस्सा : दिल्ली हाईकोर्ट

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चीनी मांझा/सिंथेटिक धागे का उपयोग गंभीर चिंता का विषय

नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पतंग उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि यह गतिविधि हमारी संस्कृति और विरासत का एक हिस्सा है। हाईकोर्ट ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए चीनी मांझा (सिंथेटिक पतंग धागा) और पतंगबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद के साथ मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने हालिया आदेश में कहा, याचिकाकर्ता पतंग उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए प्रार्थना करने की हद तक चले गए हैं.. हालांकि पतंग उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की उक्त प्रार्थना स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि पतंगबाजी हमारी संस्कृति और विरासत का एक हिस्सा है। हालांकि, चीनी मांझा/सिंथेटिक धागे का उपयोग निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने नोट किया कि 10 अगस्त, 2020 को पारित एनजीटी के आदेश में नायलॉन, सिंथेटिक सामग्री या सिंथेटिक पदार्थ के साथ लेपित धागे के निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद और उपयोग पर रोक लगा दी गई, जो पतंग उड़ाने के लिए गैर-बायोडिग्रेडेबल है। याचिका के अनुसार पतंग के मांझे से दुर्घटना होने पर आरोपी के बारे में पता लगना या उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए उसे पकड़ना कुल मिलाकर असंभव रहता है।

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