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लगातार धस रहा है जोशीमठ

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अप्रैल से 6 जनवरी तक 9 सेंटीमीट धसी जमीन
बीते 12 दिनों में 4.5 सेंटीमीटर धसाव हुआ
दरार वाले मकान नहीं गिराए जाएंगे

देहरादून। उत्तराखंड सरकार जोशीमठ आपदा के प्रबंधन में जुटी हुई है लोगों से घरों को खाली कराए जाने का काम जारी है, प्रभावित परिवारों को राहत राशियां बाटी जा रही है। दो होटलों को तोड़ने का काम भी जारी है। इस बीच इसरो द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज के जरिए बताया गया है कि अप्रैल 2022 से अब तक जोशीमठ 9 सेंटीमीटर नीचे धंस चुका है लेकिन 25 दिसंबर 2022 से 6 जनवरी 2023 के बीच जोशीमठ में 4.5 सेंटीमीटर भू धसाव हुआ जो भविष्य की बड़ी चिंता है।
भू वैज्ञानिकों की कई टीमें इस भूधसाव का अध्ययन कर रही हैं। इसरो और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भू धसाव का क्रम जारी रहता है या इसमें तेजी आती है तो यह भविष्य के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। बीते 12 दिनों में जोशीमठ की जमीन 4.5 सेमी नीचे धंस गई है जिसके कारण भवनों में व धरती में बड़ी—बड़ी दरारें आ गई है। क्षेत्र में बारिश की आशंका के बीच यह खतरा और भी बढ़ सकता है। अब तक जोशीमठ के 700 से अधिक घर भू धसाव के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं जिनमें रह रहे 90 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा चुका है। सरकार द्वारा आपदा प्रभावितों को डेढ़ लाख रूपये फौरी सहायता दी जा रही है।
उधर आज दूसरे दिन भी होटल मलारी इन व माउंट व्यू को गिराने का काम किया जा रहा है। क्योंकि इन होटलों को गिराने में बड़ी मशीनों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है इसलिए इन्हे हटाने में कम से कम एक हफ्ता लगने की उम्मीद है। उधर आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जोशीमठ को बचाने के प्रयास जारी है जोशीमठ में 40 वैज्ञानिकों की टीमें हालात का अध्यन कर रही हैं उनके द्वारा जो भी निष्कर्ष सामने आएंगे आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच भू गर्भ से बहने वाले पानी की गति में 50 प्रतिशत की कमी आई है। उधर मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जिन मकानों में दरारें है उन्हें तोड़ा नहीं जाएगा। लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर इन्हे सिर्फ खाली कराया गया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रवाहितो की हर संभव मदद के लिए सरकार तैयार है।

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