24 घंटे में वीडियो न हटे तो प्लेटफॉर्म खुद करें कार्रवाईः दिल्ली हाईकोर्ट

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  • दुष्यंत गौतम से जुड़े सोशल मीडिया कंटेंट हटाने का हाईकोर्ट का आदेश

नई दिल्ली/देहरादून। दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के चर्चित 2022 अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा एक अहम आदेश देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम का नाम जोड़कर चलाए जा रहे सभी वीडियो और कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि तय समयसीमा में यदि कंटेंट नहीं हटाया गया, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्वयं इसे डिलीट करें।
मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश जस्टिस मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने दिया। उन्होने कहा कि 24 घंटे में कंटेंट नहीं हटा तो प्लेटफॉर्म खुद यह कार्यवाही करेंगे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि दुष्यंत गौतम के नाम से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट 24 घंटे के भीतर नहीं हटाए जाते हैं, तो सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि वे स्वयं इसे हटाएं। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगर इस तरह का कंटेंट भविष्य में दोबारा अपलोड किया जाता है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसकी जानकारी सीधे याचिकाकर्ता को दें, ताकि वह कानूनी कदम उठा सकें।
मामले में दुष्यंत गौतम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए याचिकाकर्ता की छवि को जानबूझकर खराब किया जा रहा है। उन्होंने दलील दी कि इस बदनामी अभियान में कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट भी शामिल हैं। भाटिया ने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत गौतम का नाम कभी भी जांच एजेंसियों या ट्रायल कोर्ट के समक्ष नहीं आया है, बावजूद इसके उन्हें इस वायरल कंटेंट के कारण गंभीर सामाजिक और राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। दुष्यंत गौतम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से उनका नाम जोड़ने वाले सभी वीडियो और पोस्ट हटाए जाएं। याचिका में कहा गया कि 24 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर एक मानहानिकारक वीडियो अपलोड किया गया, जो तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में झूठा नैरेटिव गढ़कर दुष्यंत गौतम को उस घटना से जोड़ने की कोशिश की गई, जबकि जांच के दौरान किसी भी एजेंसी ने उनका नाम नहीं लिया। याचिका में यह भी कहा गया कि अंकिता भंडारी मामले को लेकर चलाया जा रहा सोशल मीडिया अभियान फेक न्यूज की श्रेणी में आता है और इसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ हासिल करना है। इस संदर्भ में बताया गया कि हाल ही में वायरल हुए वीडियो को लेकर उत्तराखंड पुलिस ने उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के खिलाफ दुष्प्रचार के आरोप में कई एफआईआर दर्ज की हैं।

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