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जगदीप के बाद कौन?

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उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष जगदीप धनखड़ के आकस्मिक इस्तीफे के बाद सियासी हलकों में तमाम तरह की चर्चाओं का दौर जारी है। जितने मुंह उतनी वजहें इस इस्तीफे का कारण क्या है? सिर्फ कौतूहल का विषय नहीं है। इसके निःतार्थ में देश की राजनीति का भावी भविष्य भी अहम मुद्दा है इसलिए हर कोई इसके पीछे के सच को जानना चाहता है। एक उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में अगर धनखड़ की कार्यश्ौली और वक्तव्यों पर नजर डाली जाए तो वह नेता कम बीजेपी और मोदी के अंध भक्तों की कतार में खड़े दिखते हैं जो सदन में विपक्ष को चुप कराने तथा सरकार का पक्ष लेने के लिए ही जाने जाते थे। लेकिन कई मौकों पर उनकी बेबाकी भी उनकी जुबान पर आ जाती थी और वह बड़ी दृढ़ता के साथ ऐसी बातें भी कह जाते थे जैसी बातें भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी सुनने का आदी नहीं है। किसानों के आंदोलन और उनकी एमएसपी की मांग को लेकर जब धनखड़ ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह से तीखे सवाल एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पूछ लिए गए तो कृषि मंत्री के लिए उनके सवालों का जवाब देते हुए नहीं बना था। ऐसे अन्य भी कई वाकिये है। अपने इस्तीफे से पूर्व उनके द्वारा राज्यसभा में विपक्ष द्वारा चर्चा के लिए उस प्रस्ताव को स्वीकृति दिया गया जो न्यायपालिका के भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है तथा जस्टिस वर्मा जिनके आवास पर आग लगने की घटना में भारी मात्रा में करेंंसी जलने के मामले में उन पर महाभियोग की कार्यवाही गतिमान है, को भी धनखड़ के इस्तीफे की अहम वजह मानी जा रही है। जो रकम जस्टिस वर्मा के आवाज पर जली वह रकम किसकी थी? 50 करोड़ की यह रकम कहां से आई इस पर अब तक स्थिति साफ नहीं हो सकी है। जस्टिस वर्मा जिनकी मान मर्यादा और कैरियर इस घटना के कारण सब कुछ दांव पर लगा हुआ है, इस रकम को अपना होने से हमेशा इनकार करते आए हैं इसे लेकर यह भी चर्चाओं में रहा है कि यह भाजपा के एक बड़े नेता की थी। जिसे सरकार अब रफा दफा करने में जुटी थी लेकिन धनखड़ ने इस पर राज्यसभा में लोक सभा से भी पहले चर्चा कराने की स्वीकृति देने का जो काम किया गया वह सरकार और भाजपा के लिए कतई भी स्वीकार्य नहीं था। इस बात को लेकर शीर्ष नेतृत्व की नाराजगी इस कदर थी की धनखड़ को तुरंत इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया गया। राज्यसभा में धनखड़ के कार्य काल के दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का विपक्ष के नेताओं को यह कहकर शांत कराया जाना कि आप परेशान न हो आपकी बात राज्यसभा की कार्यवाही में रिकॉर्ड नहीं होगी रिकॉर्ड सिर्फ वही होगा जो मैं कह रहा हूं। नड्डा तो राज्यसभा के अध्यक्ष नहीं है उनका सभापति की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की भाषा बोलना और कार्य मंत्री समिति की बैठक से नड्डा और किरण रिजजू का अनुपस्थित रहना धनखड़ का अपमान करने जैसा ही था। हो सकता है कि धनखड़ को भी इस बात की जानकारी हो गई हो कि जस्टिस वर्मा के घर आग में जली करेंसी किस भाजपा नेता की थी। इसका सच अगर सार्वजनिक हुआ तो भाजपा को इससे कितना बड़ा नुकसान हो सकता है। धनखड़ अभी खामोश है लेकिन वह अधिक समय तक शायद चुप नहीं रह पाएंगे। उनका इस्तीफे का सारा सच बहुत जल्द सामने आ जाएगा। राजनीतिक लोगों का मानना है कि अभी तो यह शुरुआत भर है इसके बाद और भी लोगों के इस्तीफोंं की कतार लगने वाली है। 40 सांसद व मंत्रियों के कोरे कागज पर हस्ताक्षर कर कर रख लिए जाने की भी खबर है वहीं अब सवालों से चौतरफा घिरी केंद्र सरकार के लिए एक और बुरी खबर है कि चंद्रबाबू नायडू कई मुद्दों पर विरोध को लेकर राहुल गांधी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। जो सरकार को परेशान करने वाली स्थिति हैा

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