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ट्रंप का टैरिफ कार्ड

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ कार्ड ने समूचे विश्व राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थाओं को झकझोर कर रख दिया है। एशियाई और यूरोपीय देशों में ही नहीं खुद अमेरिकी शेयर बाजार में इस फैसले के बाद भयंकर गिरावट आई है। बीते चार—पांच दिनों से दुनिया भर के शेयर बाजार में 5 से लेकर 14 फीसदी तक की बड़ी गिरावट के बीच विश्व भर में आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बादल घिरे हुए हैं। जापान जैसे देशों में इसे वित्तीय आपदा घोषित कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा तमाम देशों पर भारी आयात शुल्क लगाए जाने के बाद चीन सहित अन्य कई देशों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आयात शुल्क में वृद्धि किए जाने के फैसले से ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन अब इस कदर भड़का हुआ है कि उसने चीन को खुली चुनौती दे डाली है कि चीन ने अपना फैसला वापस नहीं लिया तो तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत और अतिरिक्त आयात शुल्क बढ़ा देंगे। ट्रंप के इस अड़ियल रवैये से फिलहाल स्थिति सुधारने की बजाय और अधिक बिगड़ती दिख रही है। अगर यह टैरिफ युद्ध जल्द नहीं ठहरता है तो इसके दूरगामी परिणाम तमाम विश्व राष्ट्रों पर पड़ेगें। इससे औघोगिक विकास दर पर ब्रेक लगेगें और कर्मचारियों की छटनी के कारण बेरोजगारी का बेकाबू होना सुनिश्चित माना जा रहा है। बात अगर शेयर बाजार जिसे किसी भी देश की आर्थिक स्थिति की नब्ज माना जाता है उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि निवेशकों के लाखों करोड़ हर रोज डूब रहे हैं और अनिश्चितता के इस अंधकार में अब वह अपनी थोड़ी बहुत बची हुई पूंजी को किसी तरह से बचाने के जुगत में जुटे हुए हैं। खास बात यह है कि इससे अमेरिका भी अछूता नहीं है उसे इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ रहा है। भारत में भले ही शेयर बाजार में निवेश करने वाले तीन प्रतिशत लोग ही हैं जबकि अमेरिका में इनकी संख्या 70 फीसदी है। ट्रंप के इस फैसले का विरोध दूसरे राष्ट्रों में ही नहीं हो रहा है अमेरिका में भी लोग इसके विरोध में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर इसका विरोध कर रहे हैं। ट्रंप और उनके सहयोगी अभी निवेशकों को भले ही यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि यह समस्या एक शार्ट टाइम समस्या है तथा दीर्घ काल में फायदा होगा लेकिन वह उन्हें इसे समझाने में कब तक सफल होते हैं यह अलग बात है। अमेरिकी लोग ट्रंप के इस फैसले को अपघाती बताते हुए यहां तक कह रहे हैं कि उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है बात अगर भारत की की जाए तो देश की सरकार इस स्थिति को लेकर किंकर्तव्य विमुड़ है उसे समझ ही नहीं आ रहा है कि क्या करें या क्या कहें। निवेशकों के लाखों करोड़ रोज डूब रहे हैं तो डूबे सरकार को जैसे इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता। चुनावी दौर में शेयर खरीदने की सलाह देने वाले आज खामोश हैं दुनिया भर के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने ट्रंप से वार्ता के प्रयास किए हैं तथा इस पर अपनी खुली प्रतिक्रिया दी है और दे रहे हैं मगर प्रधानमंत्री मोदी जो ग्लोबल लीडर है उन्होंने इस मुद्दे पर अब तक एक शब्द भी नहीं बोला है। जो हैरान करने वाला है जबकि भारत के शेयर बाजार में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। खास बात यह है कि भारतीय शेयर बाजार बीते 6 माह से लगातार गिरावट की मार झेल रहा है और निवेशक कंगाल होते जा रहे हैं।

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