उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि वह मरते दम तक जाति—धर्म और क्षेत्र के नाम पर विभाजनकारी राजनीति करने वालों को कामयाब नहीं होने देंगे। निश्चित तौर पर सीएम धामी के यह विचार हमारे संविधान की मूल भावना को पोषित करने वाले हैं। लेकिन उनके इन विचारों की सार्थकता क्या है। देश में आज कोई भी नेता या दल ऐसा नहीं है जो यह स्वीकार करें या कहे कि हम जाति—धर्म और क्षेत्रवाद की राजनीति करते हैं। सभी दल और नेता एक दूसरे पर विभाजनकारी और तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि बीते कई दशकों से लगातार देश में सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति ही हो रही है। देश में हिंदू—मुस्लिम और मंदिर तथा मस्जिद के अलावा अगर कुछ और हो रहा है तो वह आरक्षण का मुद्दा है। जिस पर जातिवाद की राजनीति हावी है अभी हाल में ही उत्तराखंड में देसी और पहाड़ी के जिस मुद्दे को लेकर हंगामा शुरू हुआ था वह क्या है क्या वह विभाजनकारी राजनीति नहीं है? मुख्यमंत्री धामी को यह भी बताना चाहिए कि यह विभाजनकारी राजनीति कर कौन रहा है। संसद में अभी जो वक्फ बिल पारित हुआ है उसे लेकर देश के तमाम राज्यों में धरने—प्रदर्शन और आंदोलन हो रहे हैं। समूचा विपक्ष इसके विरोध में खड़ा है यही नहीं सरकार के सहयोगी दलों के नेताओं द्वारा ताबड़तोड़ इस्तीफे दिए जा रहे हैं। जिससे केंद्र की भाजपा सरकार भी असहज दिखाई दे रही है। सरकार के सहयोगी दलों पर इस कदर दबाव बढ़ चुका है कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि वह अपनी पार्टी को बचाए या केंद्र की सरकार को। हालात इतनी नाजुक हो गए हैं कि स्थिति आगे कुआं और पीछे खाई जैसी है। देश व समाज में जाति—धर्म और क्षेत्रवाद की राजनीति ने नफरत और अलगाववाद की लहर पैदा कर दी है कि लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। एक तरफ बात होती है सबका साथ और सबका विकास और सबके विश्वास की तो वहीं दूसरी तरफ बात होती है बंटोगे तो कटोगे। सवाल यह है कि कौन बांट रहा है और कौन काट रहा है इससे भी बड़ा सवाल है कि क्यों बांट रहा है? देश का आम आदमी मेहनत मजदूरी करके किसी तरह शांति से रहना और अपना तथा अपने परिवार का गुजारा भर करना चाहता है। लेकिन राजनीतिक दल और नेता कभी उन्हें डराते हैं और धमकाते हैं तो कभी जाति धर्म तथा क्षेत्रीय आधार पर उन्हें एक दूसरे के खिलाफ भड़काते हैं। उनकी विभाजनकारी नीतियों के पीछे उनका सिर्फ एक ही एजेंडा है बाटाें और राज करो। उत्तराखंड में भी कुछ ऐसी विभाजनकारी हरकतें तेजी से उभरती दिख रही है। जिन्होंने सूबे की भाजपा को डराना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं को कहीं इन्हीं ताकतों से डर तो नहीं सता रहा है जिसे लेकर सीएम धामी कह रहे हैं कि विभाजनकारी ताकतों को कामयाब नहीं होने देंगे। इस सत्य को कोई नकार नहीं सकता है कि लोहा ही लोहे को काटता है तथा आप जो फसल बोएंगे वही आपको काटने पर भी पड़ेगी। बबूल के पेड़ पर आम लगने की उम्मीद तो आप नहीं कर सकते हैं।



