Home उत्तराखंड देहरादून नाम में ही तो सब कुछ है

नाम में ही तो सब कुछ है

0
290


उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लोकप्रियता का ग्राफ जिस तेजी से छलागें भर रहा है वह बेवजह नहीं है। उनके द्वारा एक के बाद एक फैसले जिस तेज गति से लिए जा रहे हैं तथा बड़े से बड़े फैसले लेने में भी किसी तरह की हिचक नहीं की जा रही है उनके समर्थकों की नजर में यही उनकी कामयाबी की असल वजह बताई जा रही है तथा वह उनके फैसलों पर खूब जश्न मनाते भी दिख रहे हैं। भले ही हम और आप यह सुनते आए हो कि नाम में क्या रखा है? लेकिन आज के दौर में इसका मतलब और मायने पूरी तरह से बदल चुके हैं। सच यही है कि नाम में ही सब कुछ रखा है। नाम बड़ा हो तो फिर काम के कोई मायने नहीं रहते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देश के सशक्त और प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में 65 वे स्थान पर छलांग मार कर 31वें स्थान पर पहुंच चुके हैं और उन्होंने बड़े—बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़कर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बॉलीवुड स्टार सदी के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन को भी पीछे छोड़ दिया है उनकी यह उपलब्धि उन्हें उनके बड़े—बड़े फैसलों के कारण ही मिली है जिसमें उनके द्वारा उत्तराखंड में यूसीसी किया जाना भी शामिल है। यूं तो उन्होंने नकल विरोधी कानून और भू कानून लाने के साथ दंगाइयों की संपत्ति से नुकसान की भरपाई करने तथा राज्य की डेमोग्राफी की हिफाजत के लिए मजार और धार्मिक संरचनाओं पर बुलडोजर कार्रवाई करने से लेकर धर्मांतरण कानून को और सशक्त बनाने सहित अनेक बड़े फैसले किए जिनसे उनकी छवि का ग्राफ शीर्ष नेतृत्व की नजर में काफी ऊपर पहुंच चुका है उनका अभी—अभी सामने आया एक फैसला जो नाम बदलने से जुड़ा हुआ है उसे लेकर धमाल मचा हुआ है। इस फैसले से जिसमें उनके द्वारा राज्य की राजधानी देहरादून सहित चार जिलों के 15 स्थानों और दो मार्गों के नाम बदलने की घोषणा की गई है, चर्चाओं के केंद्र में है। खास बात यह है कि यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि इतने बड़े स्तर पर एक साथ नाम में बदलाव करने का साहस तो यूपी के सीएम योगी भी नहीं कर सके हैं। दूसरा कारण यह है कि जिन भी जगहाें के नाम बदले गए हैं वह सभी मुगलकालीन नाम है। जिन्हें बदलकर अब सनातनी और संघ के सूत्र में पिरोया गया है। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि उनका यह फैसला उत्तराखंड की देव संस्कृति और जन भावनाओं के आधार पर ही किया गया है। लेकिन विपक्ष कांग्रेस के नेताओं द्वारा उनके इस फैसले को हिंदू—मुस्लिम की राजनीति से जोड़कर ही देखा जा रहा है लेकिन मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि उनके फैसले को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है नाम बदलने के इस फैसले को लेकर कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि इसके लिए भाजपा नेताओं द्वारा स्थानीय लोगों की राय तक जानने की कोशिश नहीं की गई है तथा भाजपा के पास काम के नाम पर कुछ भी उपलब्धि नहीं इसलिए वह नाम की राजनीति कर रही है। लेकिन धामी और उनकी सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। आपने यह तो सुना ही होगा कि दुल्हन वही जो पिया मन भाये। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इन फैसलों में कुछ गलत नहीं दिख रहा है। इसलिए यह फैसला धामी का ही नहीं सर्वप्रिय फैसला है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here