किसी राज्य के लिए बड़ी—बड़ी विकास परियोजनाओं की घोषणा करना अलग बात है और उन परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जाना अलग बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते समय में दो बड़ी परियोजनाओं की घोषणा की गई थी पहली परियोजना थी सोनप्रयाग से केदारनाथ तक रोपवे और दूसरी थी गोविंद घाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे बनाये जाने की। इन दोनों परियोजनाओं की एक साथ घोषणा जब की गई थी तो कुछ लोगों को यह अविश्वसनीय प्रतीत हो रहा था लेकिन आज होने वाले प्रधानमंत्री मोदी के उत्तराखंड दौरे से एक दिन पूर्व (सीसीईए) आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा इन योजनाओं के लिए मंजूरी दे दिए जाने से यह तय हो गया है कि जल्द ही यह परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा सकेगी। दरअसल इस योजनाओं पर अनुमानित 6811 करोड रुपए खर्च आने की संभावना है लेकिन 5 से 6 साल की अवधि में जब यह दोनों परियोजनाएं पूरी हो जाएगी तो यह उत्तराखंड के पर्यटन और तीर्थाटन उघोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी इसमें कोई सशंय की गुंजाइश नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में राज्य के भाजपा नेता अगर यह कहते हैं कि उनका देवभूमि के प्रति विशेष लगाव है या फिर प्रधानमंत्री जब भी यहां आते हैं तो कुछ न कुछ देकर जरूर जाते हैं कदाचित भी गलत नहीं है। उत्तराखंड में ऑल वेदर चारधाम सड़क परियोजना से लेकर ऋषिकेश—कर्णप्रयाग रेलवे लाइन तक तमाम ऐसे बड़े काम है जिनके कारण राज्य में कनेक्टिविटी का एक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है। राज्य में अब मेडिकल कॉलेज से लेकर एम्स तक खुले जाने से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काफी प्रगति हुई है। वर्तमान समय में केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए बनने वाले इन बड़े—बड़े रोपवे का महत्व सिर्फ इन धार्मिक स्थलों तक पहुंचने को आसान बनाएगा, तक ही सीमित नहीं है। 12 से 13 किलोमीटर लंबे यह रोपवे देश ही नहीं दुनिया भर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने वाले हैं। जब सड़क और हवाई मार्ग से भी आवागमन असंभव हो जाता है, उस मौसम में इन रोपवें की यात्रा के जरिए उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य के दर्शन किया जाना संभव हो सकेगा जो अपने आप में एक नया अनुभव और एहसास कराएगा। ऑल वेदर रोड के बाद अगर उत्तराखंड के पर्यटन और धार्मिक तीर्थाटन को नई ऊंचाई तक ले जाया जा सकेगा तो इसमें इन रोपवे की भूमिका अत्यंत ही महत्वपूर्ण होगी इसके साथ ही अब केदारनाथ धाम व हेमकुंड साहिब तक पहुंचना उन लोगों के लिए भी संभव हो सकेगा जो दुर्गम बर्फीले रास्तों को तय करने में असमर्थ थे। घोड़ा—खच्चरों व डोली कंडी पर भी निर्भरता कम होगी तथा हेलीकाप्टर सेवाएं जिन्हें लेकर तमाम सवाल उठते थे उनके उपयोग में भी कमी आएगी लोगों का समय व पैसा दोनों की बचत होगी। बस अब यही सवाल है कि कार्यदाई निर्माण एजेंसी द्वारा इन दोनों ही परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के अंदर पूरा कर दिया जाए जिससे जल्द इसका फायदा मिलना शुरू हो सके। दरअसल विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस राज्य के लिए इन रोपवे का निर्माण एक बड़ा प्रयोग है। यह प्रयोग अगर शत—प्रतिशत कामयाब रहता है तो इसकी बड़ा फायदा उत्तराखंड को होगा और राज्य के विकास में यह परियोजनाएं अत्यंत ही महत्वपूर्ण साबित होगी।




