उत्तराखंड की राजनीति में प्रेम प्रकरण को विराम देने के प्रयास अब भले ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा किए जाने लगे हों लेकिन यह विवाद सहज थमने वाला नहीं है। इसका लाभ लेने के लिए कांग्रेस के प्रयास जारी रहेंगे और भाजपा भी इसे रफा दफा करने की कोशिशें बंद नहीं कर सकती हैं। भाजपा विधायक विनोद चमोली राय दे रहे हैं कि अब इस मुद्दे को लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए और हमें आगे बढ़ना चाहिए हम इसी में उलझे रहेंगे तो इससे विकास प्रभावित होगा। वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल कह रहे हैं कि भाजपा इस मुद्दे को पहाड़ी—मैदानी का मुद्दा बनाने में जुटी है जबकि यह मुद्दा संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद की अभद्रता का मुद्दा है। उन्होंने उत्तराखंड के लोगों को अपमानजनक शब्द कहे हम उनके उस वक्तव्य का विरोध कर रहे हैं मैदान के लोगों का विरोध नहीं कर रहे हैं। वह कहते हैं कि हम स्पीकर ऋतु खंडूरी के उस रवैये का विरोध कर रहे हैं जो सदन में इस मुद्दे पर विरोध करने वालों के साथ उन्होंने किया। उन्हें प्रेमचंद के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए थी लेकिन वह उनका बचाव करती दिखी हम उनके इस रवैये का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महेंद्र भटृ जिन्हे पहाड़ के लोगों को अपशब्द कहने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी और धमकाना चाहिए था वह उन मीडिया कर्मियों को धमका रहे हैं और कांग्रेसियों को धमका रहे हैं हम उनकी धमकी का विरोध कर रहे हैं। हमारा विरोध पहाड़ी और मैदानी लोगों के मुद्दे पर नहीं है। उन्होंने कहा कि आपदा में अवसर तलाशने वाले भाजपा के नेता अब इसमें भी पहाड़ी—मैदानी को लाकर अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मैदानी लोगों से कोई विरोध नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि हमें बीजेपी को इन प्रयासों में सफल नहीं होने देना है। उधर कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने तल्ख तेवर दिखाते हुए कहा है कि प्रेमचंद संसदीय कार्य मंत्री पद के योग्य ही नहीं है वह इंदिरा हृदयेश का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि आज हमें उनकी याद आती है। साथ ही वह कार्य मंत्रणा समिति से इस्तीफा देने व भविष्य में प्रेमचंद के संसदीय कार्य मंत्री रहते हुए बैठकों में न जाने की बात कहते हैं। मीडिया में इस सवाल की चर्चा आम है कि भाजपा क्या संसदीय कार्य मंत्री के खिलाफ कोई कार्यवाही करने जा रही है भाजपा नेताओं को अब इस बात का एहसास जरूर हो चुका है कि वह मामला सहज शांत होने वाला नहीं है। यह प्रेम प्रकरण क्या गुल खिलाएगा यह भले ही अभी भविष्य के गर्भ में छिपा सही लेकिन इसकी प्रेमचंद और भाजपा को कुछ न कुछ तो कीमत चुकानी ही पड़ेगी। जहां तक भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस पर प्रदेश का माहौल खराब करने का आरोप लगाये जाने की बात है इसका भी कांग्रेस नेताओं ने जो जवाब दिया जा रहा है कि भाजपा पहले ही प्रदेश में लव जेहाद और लैंड जेहाद जैसे शब्दों को प्रयोग में लाकर माहौल खराब कर चुकी है। इस मुद्दे को लेकर कुछ नेताओं में हीरो बनने की होड़ भी लगी हुई है। जो विरोध कर रहे हैं या जितना मुखर विरोध कर रहे हैं उन्हें सोशल मीडिया उतने ही बड़े हीरो के रूप में पेश कर रहा है। कुछ भी सही इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के तमाम नेताओं को हाई लाइट होने और बोेलने का अवसर जरूर दिया। बोलना अच्छा आता हो यह किसी नेता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी गुणों में से एक है। अब हर मुद्दे पर हर कोई बोल नहीं सकता लेकिन इस मुद्दे ने उन्हें भरपूर बोलने का अवसर प्रदान कर दिया है। इसका उन्हें कितना लाभ मिल सकेगा आने वाला समय ही बताएगा।


