उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर देवभूमि की संस्कृति को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता जताई है। उनका कहना है कि राज्य में लव जिहाद और लैंड जिहाद को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे भू माफिया को कतई भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अपने कार्यकाल में यूसीसी दंगा नियंत्रण कानून और धर्मांतरण कानून का जिक्र भी किया है। इन दिनों उत्तराखंड में सख्त भू कानून और मूल निवास जैसे दो अहम मुद्दों को लेकर जन आंदोलन की जो आहट सुनाई दे रही है उसने सरकार और मुख्यमंत्री धामी के खिलाफ नई चुनौती पेश कर दी थी। मुख्यमंत्री धामी को इन दोनों ही मुद्दों की पेचीदगी की भी भली भांति जानकारी है। वह इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि उन्होंने अब तक धार्मिक संरचनाओं की आड़ में किए जाने वाले अतिक्रमणो को हटाने और जमीनों की अवैध तरीके से की गई लूटपाट को रोकने के लिए भले ही अभियान चलाये हो या चलाये जा रहे हो वह भू कानून और मूल निवास की मांग जैसे मुद्दे का समाधान नहीं है। एक तरफ राज्य के लोग अब इन मुद्दों को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा करने पर आमादा है वहीं सरकार के समक्ष यह चुनौती है कि वह इतनी जल्द कैसे इस पर अमल कर पाएगी जब केदारनाथ विधानसभा चुनाव की चुनौती उसके सर पर खड़ी है। अभी बीते दिनों राज्य की दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद अगर भाजपा केदारनाथ सीट को भी गंवा देती है तो यह मुख्यमंत्री धामी और भाजपा दोनों के लिए ही मुश्किल हालात पैदा कर सकता है। मुख्यमंत्री के पास ऐसी स्थिति में इसके सिवाय कुछ विकल्प नहीं बचता है कि वह अब अपने हर वक्तव्य और भाषण में यह आश्वासन देते रहें कि वह जल्द ही राज्य में एक संशोधित सख्त भू कानून लाने वाले हैं और उनकी सरकार द्वारा इसके लिए काम किया जा रहा है। मूल निवास और भू कानूनों पर अब तक सरकारों का जो लचर रवैया रहा है उस भूल सुधार का काम कोई आसान नहीं है। पहले कानून को इतना लचर और लचीला बनाकर बाहर के लोगों को इस बात का भरपूर मौका दिया जाना जिसके कारण वह राज्य में जमीनी खरीद सके और नौकरियां भी पा सके अब उनसे जो जमीनों को वापस लेने की बात कही जा रही है वह आसान काम नहीं है लेकिन सरकार ने भू कानून लाने से पहले यह काम शुरू कर दिया है। जिसका मुख्य कारण आम जनता को यह संदेश देना ही है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संजीदा है। इन दोनों ही कानून में संशोधन के लिए सरकार को एक प्रक्रिया से तो गुजरना होगा ही साथ ही इन कानूनों का प्रारूप कैसा हो इसका मसौदा भी तैयार करना पड़ेगा। सरकार जिस यूसीसी को लागू करने की बात कर रही है उसे राज्य स्थापना दिवस तक लागू कर ले उसके लिए यही बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन सरकार जल्द से जल्द यूसीसी कानून लागू करके भी यह प्रयास करने में जरूर जुटी है कि किसी तरह भू कानून और मूल निवास के मुद्दों को फिलहाल बैकग्राउंड में रखा जा सके।



