आंतरिक सुरक्षा का खतरा

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बीते कुछ समय से देश में अलगाववाद और सांप्रदायिक तकरार और टकराव की खबरें आ रही हैं। जो देश की एकता और अखंडता के साथ—साथ सामाजिक सुरक्षा को बढ़ते खतरे का संकेत है। इसका एक उदाहरण गोरखनाथ मंदिर की घटना है। पुलिस पर हमला करने वाले जिस मुर्तजा नामक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है उसके बारे में अब तक जो सनसनीखेज खुलासे हुए हैं वह यही बताते हैं कि देश का एक वर्ग ऐसा है जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उत्तर प्रदेश के सीएम योगी से इतनी चिढ़ है कि वह उन्हें अपना दुश्मन नंबर वन मानते हैं तथा आतंकवाद के जरिए वह भाजपा और उसके नेताओं को सबक सिखाने का मंसूबा मन में रखते हैं? अभी कुछ दिन पहले पीएम मोदी को भी कुछ अराजक तत्वों ने जान से मारने की धमकी दी थी। भाजपा के लिए प्रचार करने वाले या फिर उसकी जीत का जश्न मनाने वालों को भी यह अराजक तत्व अपने निशाने पर लिए हुए हैं उन पर हमले और उनकी हत्याओं की अनेक घटनाएं अब तक प्रकाश में आ चुकी हैं। यूपी में अभी बाबर नाम के मुस्लिम युवक की हत्या ऐसे ही सिरफिरे लोगों द्वारा करने का मामला इसका एक उदाहरण है। बात चाहे कर्नाटक राज्य से उठे हिजाब विवाद की हो या फिर बीते कल एएमयू में सामने आए हिंदू देवी देवताओं के बारे में आपत्तिजनक बातें मेडिकल के छात्रों को पढ़ाई जाने की। यह तमाम घटनाएं समाज में वैमनस्य बढ़ाने की कोशिशों से ही जुड़ती हैं। भाजपा का एजेंडा अगर हिंदूवाद और हिंदुस्तान वाली है तो इससे किसी को भी आपत्ति क्यों है। ऐसा तो कुछ है नहीं कि भाजपा किसी भी धर्म या संप्रदाय के खिलाफ कोई एजेंडा चला रही है। असल बात यह है कि भाजपा की कुछ अच्छी नीतियों या कामों से प्रभावित होकर सभी धर्म के लोगों का रुझान भाजपा की ओर बढ़ा है। उदाहरण के तौर पर तीन तलाक को समाप्त करने और कोरोना काल में गरीबों को मुफ्त राशन मुहैया कराने जैसी योजनाओं ने उस समुदाय को भी भाजपा के साथ जोड़ दिया जो कभी उसके साथ नहीं रहा था। बीते दो चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत की वजह यही बातें हैं। जब बड़ी संख्या में मुस्लिम और पिछड़ी जातियों का वोट भाजपा को मिला है। यही वह अहम बात है जिसे वह लोग पचा नहीं पा रहे हैं। ऐसी ताकतों द्वारा समाज में किसी भी तरह विघटन और टकराव पैदा करने की कोशिशें की जा रही है। इसके पीछे राजनीतिक व सामाजिक दोनों ही कारण निहित है। क्योंकि अब उनमें इतनी कूव्वत नहीं है कि भाजपा से बड़ी लाइन खींचकर भाजपा की लाइन को छोटा कर सके। ऐसे लोगों को अब यह समझ लेना चाहिए कि बड़ा होने के लिए कुछ बड़ा करना भी होता है बिना कुछ बड़ा किए कोई बड़ा नहीं हो सकता है। राष्ट्र और समाज विरोधी सोच रखने वालों को यह भी समझ लेना चाहिए कि वह राष्ट्र से बड़े नहीं हो सकते। हां यह जरूर है कि उनकी हरकतों के कारण सामाजिक सुरक्षा पर खतरा जरूर हो सकता है। लेकिन वह खुद भी इस खतरे से नहीं बच सकेंगे क्योंकि वह भी इस देश व समाज का हिस्सा है।

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