गारंटी वाली राजनीति

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जी हां अब भारत पुराने वाला भारत नहीं रह गया है, यह 21वीं सदी का नया भारत है। भारत बदल रहा है और इस बदलते भारत में देश की राजनीति में भारी बदलाव हुआ है। देश में कायदे और वायदे की राजनीति का दौर समाप्त हो चुका है और गारंटी वाली राजनीति का दौर शुरू हो गया है। भले ही इस गारंटी की राजनीति का आरंभ दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के संस्थापक अरविंद केजरीवाल ने किया हो जिन्हें मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की राजनीति करने वाले के रूप में भी जाना जाता है लेकिन अब इस गारंटी की राजनीति को अपनाने के लिए सभी राजनीतिक दल मजबूर हैं या यूं कहिए यह गारंटी की राजनीति अब सभी को मनभावन लगने लगी है। बीते कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दिल्ली के प्रगति मैदान में जब भारत मंडपम का उद्घाटन कर रहे थे तो उन्होंने देशवासियों को एक गारंटी दी कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन जाएगा और लोग अपनी आंखों के सामने अपने सपनों को पूरा होता हुआ देखेंगे। पीएम मोदी का इसे आत्मविश्वास कहे या फिर अति अहंकार कि वह 2024 के चुनाव से भी पहले अपने आप को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर रहे हैं और इस बात की गारंटी दे रहे हैं कि देश अगले 5 साल में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। पीएम मोदी ने कल अपने संबोधन में जिस तरह से 2014 से पहले के भारत और आज के भारत की तस्वीर पेश की उससे ऐसा लग रहा था कि जैसे 2014 से पहले वाली सरकारों ने देश के विकास के लिए कुछ किया ही नहीं था जो कुछ भी प्रगति व विकास हुआ है वह सिर्फ पिछले 9 सालों में ही हुआ है क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लोगों को यह बताना चाहते हैं कि अगर देश के लोगों ने उन्हें तीसरी बार सत्ता में आने का मौका नहीं दिया तो वह देश को विकास की दौड़ में पीछे धकेलने का काम करेंगे या फिर इसके बाद देश हमेशा एक पिछड़ा देश ही बना रहेगा। और विकसित भारत का सपना कभी पूरा नहीं हो सकेगा। या वही एकमात्र हैं जो भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बना सकते हैं। पीएम मोदी इस तरह का कोई सपना पहली बार देश के लोगों को नहीं दिखा रहे हैं 2014 के चुनाव में भी उन्होंने देश के लोगों को अच्छे दिनों को लाने का सपना दिखाया था काला धन विदेशों से 100 दिन में वापस लाने की गारंटी दी थी और देश के गरीबों की गरीबी मिटाने का दावा किया था। जो 9 साल में वह पूरा नहीं कर सके हैं। देश में आज भी बेरोजगारी, गरीबी व महंगाई तथा भ्रष्टाचार ऐसे मुद्दे हैं जो आम आदमी की जान पर भारी पड़ रहे हैं लेकिन नेताओं ने राष्ट्रवाद और गारंटी के मुद्दों से इन्हें हाशिए पर फेंक दिया है। मोदी कल जब देश के लोगों को यह गारंटी दे रहे थे उसी समय मणिपुर की शर्मनाक घटनाओं पर 6 दिन के हंगामे के बाद संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा है। इस अविश्वास प्रस्ताव को विपक्ष अपनी सुनिश्चित हार के बाद भी सिर्फ इसलिए लाया है कि क्योंकि प्रधानमंत्री अपने सत्ता बल के अहंकार में सदन में आने को तैयार नहीं है। अगर ऐसा नहीं होता तो पीएम मोदी जिस मुद्दे पर सदन से बाहर उसे शर्मनाक निंदनीय बता सकते हैं तो फिर सदन में बयान देने में उन्हें क्या आपत्ति है। विपक्ष उनके इस अहंकार को तोड़ने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया है। पीएम मोदी को सिर्फ अपनी बात कहने का ही हक नहीं है उन्हें विपक्ष की बात भी सुननी चाहिए जिसके लिए वह तैयार नहीं है। और वह आज भी सिर्फ गारंटी के साथ अपनी ही बात कह रहे हैं।

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