यह कैसा वीआईपी कल्चर

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ऋषभ पंत देश के एक प्रतिभावान और युवा खिलाड़ी हैं। उनके रोड एक्सीडेंट की खबर पर हर भारतीय और खेल प्रेमी चिंतित और दुखी है यह अच्छी बात है कि जितना बड़ा और खतरनाक यह हादसा था उसमें न सिर्फ उनका जीवन सुरक्षित बच गया अपितु उन्हें कोई अति गंभीर चोट भी नहीं आई है वह जल्द ठीक होकर फिर मैदान पर चौके—छक्के लगाते नजर आएंगे। लेकिन उनके इस रोड एक्सीडेंट के बाद कई ऐसी बातें भी सामने आई है जो न सिर्फ देश के उस वीआईपी कल्चर को उजागर करती हैं जिसके कारण आम आदमी की कोई कीमत नहीं समझी जाती है। उनके एक्सीडेंट के बाद जो पहली खबर आई थी वह थी नींद की झपकी लगने के कारण गाड़ी के डिवाइडर से टकराने के कारण अनियंत्रित होने की। ऐसा कहां गया था कि खुद ऋषभ पंत ने यह बात एक्सीडेंट के बाद कहीं गई अपितु डीजीपी स्तर तक के अधिकारी यह कहते हुए नजर आए। बीते कल मुख्यमंत्री धामी भी उनसे मिलने पहुंचे तो उन्होंने भी उन्हें यही बताया कि सड़क पर गड्ढे को बचाने के कारण दुर्घटना हुई इससे एक दिन पूर्व डीडीसीआई के चेयरमैन को भी उन्होंने यही कहा था कि सड़क का गड्ढा हादसे का कारण बना। अब सभी इस सड़क के गड्ढे को ही हादसे का कारण बता रहे हैं और तो और एनएच के कर्मचारी अब रात भर काम करके सड़क की मरम्मत कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड सरकार द्वारा रोड सेफ्टी के लिए 20 सूत्रीय मास्टर प्लान तक तैयार किया जा रहा है। सवाल यह है कि इन्हीं सड़कों पर हर रोज एक से बड़ा एक हादसा होता है लेकिन किसी के भी कान पर जूं तक नहीं रेंगती है। आज के सभी समाचार पत्रों में एक समाचार छपा है। बस ने स्कूटी सवार सगे भाइयों को रौंदा, एक की मौत दूसरा गंभीर हालत में भर्ती। यह हादसा कल नए साल वाले दिन हरिद्वार बाईपास पर मोथरोवाला में हुआ। पुलिस ने कह दिया गलत साइड से आ रहे थे, जिसके कारण यह हादसा हुआ। बस बात खत्म। बात इसलिए खत्म हो गई क्योंकि मरने वाला आम आदमी था कोई वीआईपी नहीं। अभी बीते दिनों हरिद्वार से पहाड़ों में गई एक बारात की बस खाई में गिर गई। बड़ी संख्या में मौतें हुई जिनके घर जश्न का माहौल था वहां महीनों मातम पसरा रहा लेकिन सड़क हादसा वाहन की फिटनेस पर ठीकरा फोड़ कर भुला दिया गया। उत्तराखंड में आए दिन तमाम हादसे इसका उदाहरण है। राज्य की सड़कों की क्या स्थिति है उसे जानने के लिए दून से भी बाहर जाने की जरूरत नहीं है। ऋषभ की कार की क्या स्पीड थी? इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। कोहरे भरी रात में डेढ़ सौ किमी प्रति घंटा की रफ्तार पर गाड़ी चलाना उचित है? उन्होंने ड्रिंक तो नहीं कर रखी थी? यह सवाल तो कोई नहीं उठा सकता। अब सब वही राग अलाप रहे हैं जो ऋषभ पंत कह रहे हैं। चलो अच्छा है उन्होंने सड़कों के गड्ढों का मुद्दा सीएम के कानों तक पहुंचाया इसी बहाने सही कुछ सड़कों के गड्ढे भी भरे जा सकेंगे तो कुछ लोगों की जान तो बच सकेगी यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ऋषभ पंथ के दो बार यूपी पुलिस ओवर स्पीड में वाहन चलाने पर चालान कर चुकी है जो उन्होंने अभी तक नहीं भरे हैं।

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