जबरन धर्मांतरण पर रोक जरूरी

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उत्तराखंड सरकार द्वारा जबरन धर्मांतरण कानून और अधिक सख्त बनाए जाने का जो फैसला किया है, वह वर्तमान समय की मांग है। अभी चंद रोज पहले देश की सर्वाेच्च अदालत ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया था तथा केंद्र सरकार से पूछा गया था कि उसने देश में जोर जबरदस्ती तथा फरेब व धोखे अथवा लालच देकर धर्मांतरण कराए जाने को रोकने के लिए क्या कुछ किया है? जिसके जवाब में केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को सख्त कानून बनाने का तर्क दिया गया लेकिन अदालत सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं थी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बीते कुछ दशकों में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व बिहार राज्यों में व्यापक स्तर पर सामूहिक धर्मांतरण की घटनाएं सामने आई हैं। जिनके मद्देनजर मध्य प्रदेश और उड़ीसा सहित कई राज्यों की सरकारों ने इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाए हैं। वही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा 2020 में जबरन धर्मांतरण तथा लव जिहाद की घटनाओं पर प्रतिबंध लगाने के इरादे से इसे संज्ञेय अपराध माना है और सजा और जुर्माने की व्यवस्था की है। खास बात यह है कि इसके बावजूद भी जबरन धर्मांतरण की घटनाएं रोके नहीं रुक रही हैं। बीते दो दिन पूर्व यूपी की राजधानी लखनऊ में निधि नाम की एक लड़की को उसके तथाकथित मुस्लिम प्रेमी द्वारा छत से फेंक कर उसकी हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि वह धर्म बदलने व उससे शादी करने को तैयार नहीं थी। दिल्ली के महरौली में श्रद्धा नाम की युवती की हत्या का जो सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसके आरोपी द्वारा 35 टुकड़े कर जंगल में फेंक दिए गए उस पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज का जो बयान आया है कि यह लव जेहाद का मामला है। उससे भी यह प्रतीत होता है कि देश भर में धोखा और फरेब के जरिए लड़कियों को प्रेम जाल में फंसा कर धर्मांतरण की एक साजिश रची जा रही है। उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा जबरन धर्मांतरण, धोखा या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने का जो फैसला लिया गया है वह स्वागत योग्य है तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए एक आवश्यक कदम है। उत्तराखंड सरकार ने यूपी से भी सख्त कानून लाने का जो प्रयास किया है वह न्याय संगत है। स्वैच्छिक धर्मांतरण या पूजा पद्धति बदलने पर कोई रोक नहीं है संविधान का अनुच्छेद 25 जिस धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है उसकी आड़ में अन्य उद्देश्यों के कारण होने वाले धर्मांतरण पर सख्ती से रोक लगनी ही चाहिए। आप धर्म बदलना चाहते हैं 60 दिन पूर्व इसकी सूचना प्रकाशित करें और कानूनी दायरे में धर्मांतरण करें। अन्यथा इसे गैर जमानती अपराध माना जाएगा और 10 साल की सजा भी हो सकती है। अच्छा होता कि केंद्र सरकार द्वारा धर्मांतरण पर एक सख्त कानून लाया जाता और राज्यों को अपने लिए अलग कानून न लाने पड़ते।

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