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भारत में अब ट्रंप सरकार?

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ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी जंग को अब एक सप्ताह का समय होने जा रहा है। इस जंग के कारण मध्य पूर्व एशियाई देशों के साथ—साथ यूरोपीय देशों में भी तेल और गैस का संकट दिनों दिन गंभीर होता जा रहा है। बढ़ते एनर्जी संकट के लिए अब विश्व के तमाम देश अमेरिकी प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। तथा राष्ट्रपति ट्रंप को निशाने पर लिए हुए हैं। ईरान ने वह रास्ता रोक दिया है जहां से तेल की सप्लाई होती थी। इसका असर कम से कम देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े इसके उपाय तलाशते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा चंद लाइन का नोट भारत को जारी करते हुए उसे 30 दिन के लिए अल्पकालीन मोहलत देते हुए रूस से तेल खरीदने की छूट देने की बात कही गई है। साथ ही उसने इसकी मॉनिटरिंग करने की बात भी कही है। अमेरिका की इस मोहलत को देश की वर्तमान सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही है लेकिन विपक्ष ने अमेरिका कि इस मोहलत को मोदी का सरेंडर बता कर जबरदस्त हमला बोला जा रहा है। अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया और अमेरिका के मोहलत देने पर फिर तेल खरीदने को तैयार हो जाता है। इसका सीधा मतलब क्या होता है इसे कोई भी अनजान व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है कि भारत नें अपनी मौलिक स्वायत्तताओं को खो दिया है अब अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति ट्रंप यह तय करेंगे कि भारत किस देश से क्या खरीद सकता है और क्या नहीं खरीद सकता? जब सब कुछ अमेरिका को ही तय करना है जैसा अभी भारत—पाक के बीच ऑपरेशन सिंदूर के समय ट्रंप के आदेश पर सीज फायर का फैसला किया गया था इस फैसले को उस समय भी विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला था। प्रधानमंत्री मोदी को यह चुनौती दी थी कि संसद में एक बार ट्रंप को लेकर कह कर दिखायें कि युद्ध विराम ट्रंप का फैसला नहीं है भारत सरकार का था मगर आज तक इसका साहस सरकार नहीं जुटा सकी है। भारत ने अमेरिका के साथ ट्रंप के टैरिफ वार के बीच जो डील साइन की गई जिसमें सब कुछ अमेरिका को दिया गया है, लिया कुछ नहीं गया है तथा भारत के कृषि क्षेत्र को भी अमेरिका के लिए खोला गया उसे लेकर भी तमाम सवाल तो है मगर सरकार के पास उन सवालों का कोई जवाब नहीं है। ऐसे में अगर यह मान लिया जाए कि देश के पीएम ट्रंप के सामने सरेंडर कर चुके हैं तो इसमें कोई शक की गुंजाइश भी कहां शेष बचती है। रूस से तेल खरीदने की मोहलत देने और साथ ही यह भी कहना कि वह चीन के साथ की गई गलती को भारत के साथ दोहराकर उसे मजबूत बनने का मौका नहीं देगा। यह साफ करता है कि अमेरिका भारत का कभी न हितैषी था और न ही हितैषी हो सकता है। रही बात चीन की तरक्की की तो यह उसने अपनी मेहनत और अच्छी नीतियों के कारण की है यह अलग बात है कि ट्रंप को अपना बेस्ट फ्रेंड बताने वाले पीएम मोदी व वर्तमान सरकार ऐसा कोई कमाल करने की कुब्बत नहीं रखती है उनकी ऐसी कुछ कमजोरियां ट्रंप के पास हैं जिसके कारण ही ट्रंप खुल्लम—खुल्ला यह कहते हैं कि वह मोदी का राजनीतिक कैरियर मिनटों में खत्म कर सकते हैं। बात चाहे जो कुछ भी हो यह देश के लिए शर्मसार करने वाली स्थिति है। इसके दूरगामी परिणाम किसी भी स्थिति में भारत के लिए अच्छे नहीं हो सकते हैं।

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