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सत्ता की नंगई का पर्दाफाश

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दिल्ली की स्पेशल एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली की पूर्ववर्ती केजरीवाल सरकार के बहुचर्चित शराब घोटाले में जो फैसला सुनाया गया है जिसमें इस घोटाले में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को न सिर्फ बरी कर दिया गया बल्कि इस केस को ट्रायल लायक भी न मानते हुए उन सीबीआई अधिकारियों की जांच के आदेश दिया जाना इस बात को प्रमाणित करता है कि वर्तमान सत्ता द्वारा विपक्ष को समाप्त करने और सत्ता पर काबिज बने रहने के लिए लोकतंत्र और संविधान की किस तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। तथा संवैधानिक संस्थाओं का किस तरह से दुरुपयोग किया जा रहा है। फैसले के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी और अमित शाह पर खुला आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने देश की स्वतंत्रता के इतिहास में सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा था। इस फैसले ने न सिर्फ वर्तमान सरकार को निर्वस्त्र कर दिया है बल्कि उस मीडिया को भी नंगा कर दिया है जिसने सरकार के पक्ष को सही साबित करने के लिए हजारों डिबेट चलाई और सत्तानुकूल नैरिटिव बनाने में कोई कोर कसर उठाकर नहीं रखी। यही नहीं कोर्ट का यह फैसला देश की उन संवैधानिक संस्थाओं को भी बेपर्दा करता है जो सिर्फ सत्ता की गुलाम होकर रह गई है। बात सिर्फ यहीं समाप्त नहीं होती है यह फैसला न्यायपालिका के उस स्याह पहलू को भी उजागर करता है जहां वह बिना सबूतों और आरोपों की स्पष्टता को परखेे बिना ही किसी को भी जेल की सलाखों के पीछे डालने का काम करती है। सत्ता के लिए किए जाने वाले इस सबसे बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार अकेली दिल्ली की सरकार अथवा आम आदमी पार्टी के नेता ही नहीं है इसमें झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन सहित अन्य तमाम लोग भी शामिल हैं। राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ—साथ तमाम कांग्रेसी नेता तथा अन्य दलों के नेताओं के नाम भी शामिल है। अभी बीते दिनों नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया व राहुल से 50—50 घंटे लंबी ईडी की पूछताछ तथा एक मानहानि के मामले में राहुल की संसद सदस्यता समाप्त करने और सरकारी घर खाली करा लिए जाने की घटना भी हमारे सामने है गनीमत रही कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिल गई वरना वह जेल में होते और उनका पूरा राजनीतिक कैरियर ही समाप्त हो गया होता। सवाल यह है कि यह सत्ता के लिए की जाने वाली कौन सी राजनीति है? वर्तमान सरकार द्वारा यह कैसा नया भारत बनाया जा रहा है? तथा इस भारत में लोकतंत्र और संविधान कहां है? अभी प्रधानमंत्री ने ए आई समिट में कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस को जन्मजात नंगा कहा गया था और इसे राष्ट्र के लिए शर्म बताया गया था। लेकिन इस दौर में सत्ता के कारनामों के आए दिन जिस तरह के खुलासे हो रहे हैं वह समूची सरकार के राजनीतिक नंगेपन का सबूत दे रहे हैं। बात चाहे एफ स्टीन फाइल के खुलासों की हो या ट्रंप के साथ ट्रेड डील की अथवा दिल्ली शराब घोटाले पर आए उस फैसले की जिसने सत्ता को मुंह दिखाने लायक भी नहीं छोड़ा है। सत्ता के पास अब किसी भी सवाल का जवाब नहीं बचा है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी अभी बाल—बाल बच गई जिन्होंने ईडी की छापेमारी में अपनी फाइल अधिकारियों से छीन ली। लेकिन सत्ता को अब यह समझ आ जाना चाहिए कि वह इस देश के लोकतंत्र को नहीं हरा सकती क्योंकि उसकी जड़े बहुत मजबूत है।

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