अब 2014 बहुत पीछे छूट चुका है। जब देश की जनता न सिर्फ नरेन्द्र मोदी का सुनती थी बल्कि उस पर भरोसा भी करती थी। बीते एक दशक में गंगा—जमुना में बहुत पानी बह चुका है। भाजपा और पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा बीते सालों में यह नारा बड़े जोर शोर से दिया जा रहा था कि ट्टबेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं’ अब यह जनता की समझ में आ चुका है कि यह सिर्फ एक चुनावी जुमला था। अब अगर हम उत्तराखण्ड की बात करे तो यहंा राज्य मेें हुए महिला उत्पीड़न अपराध या यौन शोषण के कई मामलों में भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं के नाम सामने आये है। जिनमें अंकिता भण्डारी हत्याकांड का मामला एक बार फिर सुर्खियों में बना हुआ हैं जिसमें भाजपा के किसी बड़े नेता का नाम वीआईपी के तौर पर लिया जा रहा है। वही राज्य में कानून व्यवस्था की बात की जाये तो वह इस कदर बिगड़ चुकी है कि पीड़ित आत्महत्या से पूर्व सोशल मीडिया मे जारी वीडियों के माध्यम से आरोप लगाते दिख रहे है कि उनकी इस मौत का कारण भाजपा नेता व पुलिस प्रशासन है। इसके दो उदाहरण बीते कुछ समय में ही सामने आये है। पहला उदाहरण पौड़ी में एक युवक द्वारा आत्महत्या से पूर्व एक वीडियो जारी कर कहा गया था कि उसके साथ भाजपा नेता द्वारा ठगी की घटना को अंजाम दिया गया जिस मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नही की गयी है। वही दूसरा मामला बीते शनिवार को सामने आया है कि जब एक किसान द्वारा नैनीताल में आत्महत्या से पूर्व एक वीडियो जारी कर कहा गया था कि उसके साथ कुछ लोगों द्वारा करोड़ो की धोखाधड़ी की गयी है जब इसके खिलाफ वह पुलिस के पास गया तो उसको प्रताड़ित किया गया। ऐसे कई उदाहरण है जो यह साबित करते है कि देश में जो कानून व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी है उस पर केन्द्र व राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नही है। वहीं जनता भी अब यह जान समझ चुकी है कि उसके साथ कहंा और किसके द्वारा धोखा दिया जा रहा है।




