वह बिहार हो या फिर उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश हो फिर लद्दाख अथवा उत्तर प्रदेश, बीते कुछ समय से सत्ता के खिलाफ जिस तरह का जनाक्रोश नजर आ रहा है उसके पीछे क्या कारण है देश के हुक्मरानो को इस पर गहन चिंतन मंथन की जरूरत है। देश के अधिकांश राज्यों में डबल इंजन और ट्रिपल इंजन की सरकारों ने बीते एक दशक में जिस तरह के तानाशाह अंदाज में राज काज चलाया है और सत्ता के पक्ष को मजबूती देने के लिए तमाम कानूनों में बदलाव के साथ देश की संवैधानिक संस्थाओं और मीडिया को अपने शिकंजे में कसने का प्रयास किया है तथा जन अपेक्षाओं की अनदेखी की है उससे इस देश की जनता शायद अब इतनी ऊब चुकी है कि वह सत्ता के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार हो चुकी है। सत्ता में बैठे लोग इस पर विमर्श करने की बजाय कि आखिर गलती कहां हुई है? अपनी उन भयंकर भूलों को अपनी राजनीतिक बड़ी उपलब्धियाें के तौर पर पेश कर रहे हैं जिनके बारे में अब हर एक आम आदमी जान समझ चुका है। प्रधान मंत्री मोदी अब जहां भी जाते हैं उन्हें काले झंडे दिखाने से लेकर तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है भाजपा के मंत्रियों को दौड़ाने और पीटे जाने से लेकर भाजपा के कार्यालयों को फूंकने तक की घटनाएं इस बात की तस्दीक कर रही है कि लोगों का आक्रोश किस स्तर तक पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से लव यू मोहम्मद का विवाद उत्तराखंड के काशीपुर तक पहुंचने में कतई भी देरी नहीं हुई। यहां भी अल्पसंख्यक समाज के लोगों ने न सिर्फ पुलिस पर हमला करने का काम कर डाला बल्कि पुलिस की गाड़ियां भी तोड़ डाली। बिहार में वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा लगाया गया तो उसकी अनुगूंज यहां राजधानी दून की सड़कों पर भी सुनाई दी। भले ही संविधान बचाने और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई लड़ने के लिए राहुल गांधी ने युवाओं को आगे आने की बात कही हो लेकिन अब अगर देश भर में जेन—जी सड़कों पर आ रहे हैं तो यह राहुल गांधी के कहने पर नहीं आ रहे हैं बल्कि सत्ता द्वारा पैदा किए गए हालात ने उन्हें सड़कों पर आने पर मजबूर किया है। उत्तराखंड में पेपर लीक का मुद्दा हो या अंकिता भंडारी हत्याकांड दोनो ही मामलों में जिस तरह की घटिया राजनीति सत्ता पक्ष द्वारा की गयी उससे उनकी साख और ज्यादा खराब हुई। सवाल यह है कि भाजपा के शासनकाल में एक दशक में युवाओं को रोजगार देने और आम जनता को महंगाई भ्रष्टाचार तथा गरीबी से बाहर निकालने के जितने भी वायदे किए गए थे उन वायदों को कितना पूरा किया गया। 10 साल तक अच्छे दिन आने का इंतजार करती रही जनता अब जिस तरह की समस्याओं से घिरी हुई है उस पर बात करने की बजाय आज भी भाजपा के नेताओं द्वारा या तो धर्म व जाति की घुटृी पिलाई जा रही है या फिर छद्म राष्ट्रवाद और देश भक्ति अथवा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत का सफेद झूठ बोलकर भरमाया जा रहा है। देश के किसान और मजदूरों से लेकर महिलाओं व बेरोजगारों तक को झांसा दिया जा रहा है। देश की अर्थव्यवस्था इस कदर डावंाडोल हो चुकी है कि आधी आबादी को 2 जून की रोटी जुटाने के भी लाले पड़े हैं। मगर सरकार की नजर में सब कुछ चंगा ही चंगा है। आज देश में जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए देश की सरकार खुद जिम्मेदार है और कोई भी नहीं।




