उत्तराखंड बना देश की बेहतर प्रयोगशाला

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वर्तमान केंद्र सरकार को देश की शासन व्यवस्था को कैसे चलाना है इसका फैसला सिर्फ प्रधानमंत्री को लेना है उनके सभी कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों को सिर्फ वही करना या कहना है जैसा पीएम के निर्देश होंगे। करना क्या है और कहना क्या है? इसमें उनकी अपनी मर्जी कोई मायने नहीं रखती है। भाजपा ने 2014 में सत्ता में आने पर एक नारा दिया था सबका साथ सबका विकास। पांच साल तक सभी भाजपा नेताओं की जुबान पर यही चार शब्द रहे। इसके बाद इसमें सबका साथ, सबका विकास के साथ सबका विश्वास भी जोड़ दिया गया। अब 10 साल बाद लोग सोच रहे हैं कि क्या हमारी सरकार सबको विश्वास में लेकर सबका विकास कर रही है? इसके साथ ही इन 10 सालों में एक और शब्द प्रभावी ढंग से सुना गया डबल इंजन सरकार। इस डबल इंजन सरकार के साथ इस अवधारणा को भी जोड़ दिया गया कि अगर किसी राज्य को विकास चाहिए तो उसके लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है। मतलब अगर किसी राज्य में भाजपा की सरकार नहीं होगी तो विकास की भी कोई गारंटी नहीं है। यानी की डबल इंजन सरकार मतलब मोदी की गारंटी, विकास होगा ही होगा। उत्तराखंड राज्य इस मामले में बहुत ही सौभाग्यशाली साबित हुआ है। जब से केंद्र में मोदी की सरकार आई है उत्तराखंड में भाजपा लगातार चुनाव जीतकर और मोदी की सरकार को भी पांच—पांच सांसद देने की अद्वित्य सफलता हासिल करता रहा है। भले ही उत्तराखंड राज्य की सरकार के कुशल संचालन में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत असफल साबित हुए हो लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी न सिर्फ सबसे सफल और कुशल नेता साबित हुए हैं बल्कि सर्वप्रिय नेता भी बन चुके हैं जिनकी पीठ थपथपाने से लेकर पीएम मोदी उन्हें अपना छोटा भाई बता कर प्रोत्साहित करते देखे गए हैं लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने भी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने में कोई कोर कसर उठाकर नहीं रखी है। पिछले चुनाव में हारने के बाद भी अगर मोदी ने धामी पर भरोसा जताया इससे बड़ा सम्मान सीएम धामी के लिए और भला क्या हो सकता है। पार्टी के इस कर्ज को सीएम धामी चुकाने के लिए हमेशा कुछ भी करने को तत्पर रहते हैं। हाई कमान का आदेश सिर माथे पर रखे जाने की इस खूबी ने उन्हें दीर्घजीवी नेता बना दिया है जिससे उनकी अपनी पार्टी नेता भी जलन की भावना से झुलसते रहते हैं। यूसीसी इसके बारे में लोग अभी तक चिल्लाते हैं कि यह तो केंद्र का विषय था भले ही यह सच हो लेकिन धामी सरकार ने इसे बनाकर ही नहीं बल्कि राज्य में लागू करके भी दिखा दिया। यह कमाल नहीं तो और क्या है भले ही केंद्र सरकार कल खुद अपना यूसीसी कानून लाकर उसे उत्तराखंड सहित पूरे देश में लागू कर दे और धामी सरकार का यूसीसी व्यर्थ साबित हो जाए। यह दीगर बात है। यह भी संभव है कि धामी सरकार के इस यूसीसी के प्रयोग के कारण राज्य को किसी अन्य बड़ी सहूलियत से भी वंचित होना पड़े लेकिन सीएम धामी को इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। क्योंकि उनकी कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। अब मदरसो और मजारों पर कार्यवाही को चलाने दो, हज समितियाें में महिलाओं की नियुक्तियां भी होने दो और मदरसों में ऑपरेशन सिंदूर को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने दो बाकी जो होगा बाद में देखा जाएगा। प्रयोग करने में क्या बुराई है। उत्तराखंड भाजपा के लिए एक अच्छी प्रयोगशाला है।

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