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टूट चुका है मोदी का तिलिस्म

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जिस व्यक्ति विशेष नरेन्द्र दामोदर मोदी के कंधों पर सवार होकर संघ और भाजपा ने 2014 में सत्ता का सफर शुरू किया था अब उसके तिलिस्म टूट चुका है। अपने आपकों को अजेय और अपराजित मानने वाले पीएम मोदी और भाजपा को भी अब इस बात का अहसास हो चुका है कि मोदी है तो मुमकिन है अब एक ऐसा शगूफा भर रह है जिसका सच देश के लोग जान चुके हैं। भले अभी भी समाज में ऐसे लोगों की कमी न हो जो यह मानते है कि मोदी और भाजपा को कोई नहीं हरा सकताहै लेकिन यह संघ के अंधभक्त ही कही जा सकती है। संसद के शीत कालीन सत्र्.ा और बीते कल दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की रैली और इस रैली में आये लाखों लाखों लोगों की भीड तथा कांग्रेस नेताओं के चहेरों पर चिन्ता की लकीर खींच दी है। भले कांग्रेस के नेता यह मानते हो कि भाजपा की सरकार और नेताओं को इस हालात तक पहुंचाने मं उनकी मेहनत ही अहम रही है लेकिन ऐसा नहीं है। अपने 11 साल के शासन काल में भाजपा की मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जो अटपटा फैसले लिए गये तथा देश की जनता को झूठे वायदे किये गये और समाज में नफरत और भय का वातावरण तैयार किया गया उसका इन्तहां हो जाना भी एक अहम कारण रहा है। भाजपा नेताओं का अहंकार भी बहुत हद तक इसके लिए जिम्मेदार रहा है। 2014 के चुनाव में अबकी बार 400 पार और देश के संविधान को बदलने की घोषणाओं तक सीमित न रहने वाले भाजपा नेताओं का इस हद को लांघ जाना जहां संसद मे ंखडे होकर देश के गृह मंत्री अमित शाह यह कहते देखे गये कि आप चिल्लाते रहिए ससंद उनके हिसाब से ही चलेगी औरह वहीं होगा जो जो हम चाहेंगे। यह अहंकार की परीकाष्ठा नहीं तो और क्या है। संविधानिक संस्थाओं का पूरा अस्तित्व समाप्त करने और निर्वाचन आयोग के जरिए हर चुनाव का परिणाम तय करने तक पहुंच चुकी भाजपा की सरकार यह तक भूल चुकी है कि देश की जनता ने उस कांग्रेस जिसने कभी इंदिरा इज इंडिया और इंडिया इ इन्दिरा का नारा दिया था उसे एक झटके में ओंधे मुंह पटका दिया था। कांग्रेस मुक्त भारत विपक्ष मुक्त संसद बनाने का दिवस्वप्न देखने वाले भाजपना नेताओं का जरूर उस हद को भी पार कर गया कि जिस संघ के सहारे से वह दो से दो सौ के पार पहुंची है उसके नेताओं को उसे संघ की जरूरत नहीं रह गयी। भाजपा के नेताओं ने अपनी गलत नीति व नीतियों को भी एक गम्भीर खरे के मुहाने पर लाकर खडा कर दिया है। कल कई करोड लोगों के हस्ताक्षरों के पुलिंदे लेकर उमडी इस रैली की भीड और कांग्रेस नेताओं की हुंकार ने दशे को बल दिया है कि घबराने की कोई बात नहीं है सौा हार के बाद भी कांग्रेस अभी जिन्दा है और वह भाजपा को सत्तर से बाहर का रास्ता दिखाकर ही देम लेगी। इस रैली में किसने क्या कहा उसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भाषण कांग्रेस के वयोवृद्ध अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खण्डके का था। जिन्होंने राहुल, माझी परिवार को ही नहीं पूरे देश के कांग्रेसी नेताओ को मिल कर लड़ने की अपील की। भाजपा ने सही मायने में संघ को जो नुकसान पहुंचाया है उसकी भरपायी कर पाना अब संघ के लिए भी आसान नहीं होगा। निर्वाचन अधिकारियों को कांग्रेस ने कल जिस तरह से खुले मंच से चुनौती दी गयी कि सत्ता बदलेगी और लोकतंत्र के खिलाफ काम करने के मामले में बख्शा नहीं जायेगा भले ही वह रिटायर क्योें न हो चुके हो। इस बात का सबूत है कि अब कांग्रेस अपने दम पर आगे बढ़ने का द्धढ़ संकल्प ले चुकी है वह जान चुकी है कि सत्ता में बैठे नेताओं में कितना दम है।

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