भले ही भाजपा के नेता पार्टी के अंदर सब कुछ चंगा ही चंगा होने के दावे करते रहे लेकिन जिस तरह के हालात दिखाई दे रहे हैं तथा उनके बयान सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंच रहे हैं वह यह बताने के लिए काफी है कि अंदर ही अंदर लंबे समय से कुछ न कुछ खिचड़ी तो पक ही रही है। धाकड़ धामी कहे जाने वाले मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान बाजी करने वाले नेताओं की कतार धीरे—धीरे लंबी और लंबी ही होती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अपनी पार्टी के कार्यक्रम में जब यह कह दिया गया कि यह राजनीति है कल किसने देखा है आज जो पीछे बैठे हैं वह कल सबसे आगे हो सकते हैं और जो आगे बैठे हैं वह नीचे बैठे नजर आ सकते हैं। भले ही उनका यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान में दिए जाने के संदर्भ में दिया गया था लेकिन उन्होंने इसे जिस अंदाज में पेश किया था वह लंबे समय तक चर्चाओं के केंद्र में रहा था। इसके बाद राज्य में हो रहे अवैध खनन का मुद्दा पूर्व सीएम और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा संसद में उठाया गया तो अपनी ही सरकार के खिलाफ काम करने की बात चर्चाओं में रही सवाल यह है कि नेताओं के इस तरह के बयानों का सिलसिला लगातार जारी है। तथा एक के बाद एक घटनाओं की घटना भी थमने का नाम नहीं ले रही है। उनके शासनकाल में दो बार पेपर लीक के मामले जो उनके द्वारा लाये गए नकल विरोधी कानून के बावजूद भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं वह उनके लिए बड़ी परेशानी का सबब बन चुका है। ऊपर से इस मामले को लेकर विपक्ष तो हमलावर है ही भाजपा के नेताओं द्वारा भी इस पर लगातार बयान बाजी की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जो सीबीआई जांच करने की मांग उठाई थी उसके बाद उनका जश्न और शहर में अपने वाह वाही के जो पोस्टर लगाए गए वह विवादों में रहा। बात सिर्फ यही तक नहीं है विधायक विनोद चमोली क्या कह रहे हैं या अनिल बलूनी क्या कह रहे हैं? अथवा महेंद्र भटृ क्या कहते हैं वह तमाम बातें कबील गौर है। सीएम धामी के सीबीआई जांच पर अगर कांग्रेस सवाल उठाती है तो विपक्षी दल होने के नाते यह समझ आता है पर विनोद चमोली अगर सीबीआई जांच के फैसले को गलत ठहराए तो आप क्या कहेंगे? सीएम धामी के कार्यकाल में हल्द्वानी में जो कुछ हुआ वह उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश के लोगों ने देखा। दो—दो मतदाता सूचियाें में नाम के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग पर अगर 2 लाख का जुर्माना ठोका गया उसके बारे में भाजपा के नेता और सीएम भले ही कुछ भी सोचे कि इस खबर को उन्होंने ठिकाने लगा दिया लेकिन यह इतिहास में दर्ज हो चुका है। 2027 में हैट्रिक लगाने का सपना बुन रहे भाजपा के नेता भी इसे बखूबी समझ रहे हैं कि हवा का रुख क्या है उनका ग्राफ किधर जा रहा है। अभी तो पेपर लीक का क्लाइमेक्स बाकी है आगे देखिए क्या होता है?




