- हाईकोर्ट कल करेगा चुनाव पर फैसला
- पर्याप्त संख्या में प्रत्याशी भी नहीं मिले
- मतदान प्रतिशत पर पड़ सकती है मौसम की मार
देहरादून। राज्य में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तमाम विवादों के बाद जारी इस चुनावी प्रक्रिया में तमाम ऐसे अवरोध अभी भी बरकरार हैं जो इन चुनावों की सार्थकता पर सवाल खड़ा कर सकते हैं। पंचायत चुनाव के लिए जरूरी दो तिहाई उम्मीदवारों का न मिल पाना चुनाव के प्रति आम आदमी की उदासीनता को तो दर्शाता ही है इसके साथ ही उन क्षेत्रों में चुनाव आयोग को दोबारा चुनाव कराने की बाध्यता पैदा कर देगा जहां दो तिहाई से कम सीटों पर चुनाव होगा।
ग्राम पंचायत के 5 हजार से अधिक पदों के लिए सिर्फ 2800 यानी 50 फीसदी के आसपास ही उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र भरा है। ऐसे में चुनाव के बाद भी चुनाव आयोग को उन पंचायतों में दोबारा चुनाव कराने पड़ेंगे जिनके दो तिहाई से कम सीटों पर प्रत्याशियों ने पर्चे नहीं भरे हैं। खाली ग्राम प्रधानों के चुनाव से कुछ नहीं होने वाला है। सरकार द्वारा पहले चुनाव के लिए बरती गई उदासीनता और समय पर चुनाव न कराना तथा चुनाव की प्रक्रिया का बार—बार बाधित होना और आरक्षण रोस्टर को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान न हो पाना आदि तमाम कारण इस उदासीनता का कारण रहे हैं।
अब जब चुनाव की प्रक्रिया जारी है भले ही तमाम जगहों से निर्विरोध चुनाव होने की खबरें आ रही हों तथा इस बार पढ़े—लिखे बेरोजगार युवकों के अलावा कुछ सेवा निवृत अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ—साथ आईटी और आईआईटी क्षेत्रों में कार्यरत लोगो को नौकरी छोड़कर पंचायत चुनाव लड़कर जन सेवा के क्षेत्र में आने की खबरें आम हो लेकिन इसके साथ ही विषम भौगोलिक परिस्थितियों और मानसूनी आपदा प्रभावित इस चुनाव में मतदान करने कितने लोग घरों से निकल पाते हैं यह एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
वही इन चुनावों को लेकर हाईकोर्ट में दायर पी.आई.एल. जिस पर कल मंगलवार को सुनवाई होनी है कल क्या फैसला लिया जाएगा इस पर भी इन चुनावाें का हो पाना और न हो पाना निर्भर करेगा। पर्याप्त और संवैधानिक नियमों के अनुकूल प्रत्याशियों का न मिलना और अत्यंत कम मतदान प्रतिशत रहना इस चुनाव को सिर्फ औपचारिकता भर बना सकता है।




