- कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा का कांग्रेस नेताओं को दिया अल्टीमेटम
- उत्तराखंड में सैलजा का साफ संदेश – जो जनता के बीच पसीना बहाएगा, वही टिकट पाएगा
- उत्तराखंड कांग्रेस में परफार्मेंस रिपोर्ट कार्ड तय करेगा टिकट, सिटिंग विधायकों की भी बढ़ी धड़कनें
- कांग्रेस प्रदेश प्रभारी ने दिया जीत का मंत्र, संगठन में अनुशासन व जवाबदेही पर जोर
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी कांग्रेस ने अब संगठन को चुनावी मोड में लाना शुरू कर दिया है। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के उत्तराखंड दौरे ने साफ संकेत दे दिया है कि इस बार पार्टी केवल दावेदारी के आधार पर टिकट नहीं बांटेगी, बल्कि जमीनी सक्रियता, संगठन के प्रति समर्पण और जनता के बीच लगातार काम करने वाले नेताओं को ही प्राथमिकता मिलेगी।
प्रदेश प्रभारी ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में जिला अध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों, फ्रंटल संगठनों, प्रकोष्ठों और विधानसभा स्तर के पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने संगठन की मजबूती, बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि जो नेता आज से जनता के बीच दिखाई देगा, टिकट की दौड़ में वही आगे रहेगा। प्रदेश प्रभारी ने साफ शब्दों में कहा कि केवल दिल्ली या देहरादून में बैठकर टिकट की पैरवी करने से कुछ नहीं होगा। चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेताओं को अभी से अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय होना होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट का आधार केवल वरिष्ठता नहीं बल्कि विजयी होने की क्षमता और जनता के बीच स्वीकार्यता होगी। प्रदेश प्रभारी ने संगठन की कमजोर कड़ियों पर भी खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को केवल सरकार की आलोचना करने वाली पार्टी नहीं बल्कि जनता के बीच संघर्ष करने वाले संगठन के रूप में पहचान बनानी होगी।
बैठक के दौरान प्रदेश प्रभारी ने नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि व्यक्तिगत मतभेद पार्टी के भीतर रह सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से संगठन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत उसका कार्यकर्ता है और यदि सभी नेता एकजुट होकर काम करेंगे तो 2027 में सत्ता परिवर्तन संभव है। प्रदेश प्रभारी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित न रहें बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को गांव-गांव तक पहुंचाएं।
प्रदेश प्रभारी ने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का पूरा फोकस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर रहेगा। प्रदेश प्रभारी का यह दौरा केवल संगठनात्मक बैठक भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि 2027 का चुनाव केवल नेताओं के भरोसे नहीं बल्कि मजबूत संगठन और सक्रिय कार्यकर्ताओं के दम पर लड़ा जाएगा। भाजपा जहां सत्ता बचाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस अब संगठनात्मक अनुशासन, बूथ प्रबंधन और जमीनी सक्रियता के जरिए सत्ता में वापसी का रास्ता तलाश रही है।
प्रदेश प्रभारी के दौरे से कांग्रेस ने दो स्पष्ट संदेश दिए हैंकृपहला, टिकट उसी को मिलेगा जो जनता के बीच रहेगा और जीतने की क्षमता साबित करेगा। दूसरा, संगठन सर्वाेपरि है और अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस अब दावेदारों की भी परीक्षा ले रही है और संगठन की भी।




