- चुनावी साल में नेताजी नहीं चूकना चाहते हैं कोई भी मौका
- चुनावी साल में नेताओं को आखिरकार आ ही गई जनता की याद
- किसी न किसी बहाने दे रहे है नेताजी जनता की ‘चौखट’ पर दस्तक
- शुभकामना संदेशों, होली मिलन समारोहों में दिखाया अलग अंदाज
देहरादून। राजनीति भी क्या गजब चीज है। क्योंकि यहां सब चलता है। प्रजातंत्र में जनता को चार साल तक घंटों लाइन में खड़ा रखने वाले नेताओं के लिए आमजन कब ‘देवतुल्य’ हो जाये पता नहीं चलता है। यही तो असली ‘राजनीति’ है भाई। चुनाव आते ही नेताओं को जनता की याद आ जाती है और वह जनता की चौखट पर जाकर उसे ही अपना सब कुछ मान लेते हैं।
सूबे में विधानसभा के चुनाव होने वाले है और नेताओं की सक्रियता देखी जा सकती है। चुनावी साल में अगर जनता को समय पर याद नहीं किया गया तो जनता नाराज हो जाएगी और जनता के रूठने का नेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए कोई भी नेता जनता से ‘पंगा’ नहीं लेना चाहता है और किसी न किसी बहाने जनता की ‘चौखट’ पर दस्तक दे रहा है। छोटा हो या बड़ा कार्यक्रम नेताजी उसमें शामिल होकर जनता को सबसे बड़ा शुभचिंतक प्रदर्शित कर रहे हैं।
चुनावी साल में नेताजी कोई भी मौका नहीं चूकना चाहते हैं। होली तो नेताओं के लिए लंबा आयोजन था जनता के साथ घुलने-मिलने का और नेताओं ने इसका भी पूरा फायदा लिया। होली की शुभकामनाओं से लेकर घर-घर दस्तक और होली मिलन समारोहों के बहाने जनता के बीच ‘पैठ’ बनाने की हर छोटी-बड़ी चाल चली गई और यह प्रदर्शित किया गया कि हम ही हैं आपके असली शुभचिंतक।
होली पर राजनीति के ‘रंग’ कुछ अलग ही दिखे। यह पहली बार नहीं हुआ है, ऐसा तो लंबे समय से होता आया है। लेकिन इस बार नेताओं ने जनता को चुनाव से पहले ही ‘देवतुल्य’ बना दिया है। होली के बहाने इसके कई उदाहरण दिखे। शुभकामना संदेशों, होली मिलन समारोहों में नेताजी आमजन से ऐसे मिल रहे थे, जैसे कि इन्होंने ही उनकी नैया पार लगाई होगी। क्योंकि चुनाव के साल में यह सब ‘ड्रामा’ नहीं किया गया तो आने वाले समय में देवतुल्य जनता नाराज हो जाएगी।
चार साल तक जनता को कीडे़-मकोडे़ समझने वाले नेताजी जनता की और मधुमखियों की तरह आजकल इसलिए आकर्षित नहीं हो रहे हैं, क्योंकि विधानसभा चुनाव में किस नेता को टिकट मिल जाए पता नहीं। इसलिए जनता के बीच पैठ तो बनानी ही पडे़गी। आपको बता दूं कि अभी बीते चार साल तक नेताजी आमजन का फोन उठाने में अपनी तौहीन समझते थे मिलना तो बहुत दूर की बात है। नेताजी से मिलने के लिए आमजन मीलों पैदल चलकर,घंटों लाइन में रहकर, भूखे और प्यासे रहकर कई-कई दिनों तक नेताजी आमजन को दर्शन तक नहीं देते थे। नेताजी के लिए आज वहीं आमजन देवतुल्य बन गए है। आने वाले विधानसभा चुनाव में आमजन नेताजी के चार साल की बेरूखी को याद रखते हैं या नहीं यह तो आने वाले समय में पता चलेगा, लेकिन कुछ समय के लिए ही सही नेताजी की जनता से ‘देवतुल्य’ मित्रता कुछ सुकून तो दे रही है।




