जोशीमठ को भूस्खलन से बचाने की गुहार

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बेघरों का तत्काल पुनर्वास करे सरकार
डर और भय के साए में जी रहे हैं लोग

देहरादून। देश और प्रदेश के ऐतिहासिक नगर जोशीमठ को भूस्खलन के खतरे से बचाने के लिए आज क्षेत्रीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा एक पत्रकार वार्ता कर सरकार का ध्यान इस अति गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करने और प्रभावी उपाय करने की मांग की गई है।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ के प्रवेश द्वार और पर्यटन तथा धार्मिक दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण माने जाने वाला नगर जोशीमठ का अस्तित्व खतरे में है। पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र भंडारी और नगर पालिका अध्यक्ष श्ौलेंद्र पवार ने कहा कि अब तक भूस्खलन के कारण छोटे बड़े 500 से भी अधिक भवनों में बड़ी—बड़ी दरारें आ चुकी है। जो भविष्य के भावी खतरे का बड़ा संकेत दे रही हैं। उनका कहना है कि सरकार द्वारा 17 अगस्त 2022 से लेकर अब तक दिसंबर 2022 तक स्थिति में भारी बदलाव आया है। प्रतिदिन जमीन धंसने से भयानक स्थिति पैदा हो चुकी है तथा लोग भारी भय और खतरे के साए में जी रहे हैं उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता हर समय बनी रहती है। 2021 में शुरू हुआ यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एनटीपीसी की सुरंग से 12 सालों से लगातार जल का रिसाव हो रहा है। उनकी मांग है कि भू वैज्ञानिकों की रिपोर्ट और सरकार द्वारा कराए गए सर्वे पर अमल किया जाए।
कांग्रेस नेता कमल रतूड़ी का कहना है कि वह मुख्यमंत्री धामी से मिलकर सारी स्थिति से उन्हें अवगत करा चुके हैं लेकिन इस समस्या के समाधान पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। उनकी मांग है कि अगर सरकार कुछ नहीं कर सकती है तो स्थानीय लोगों को तत्काल प्रभाव से विस्थापित करने का इंतजाम करें जिससे वह भय से मुक्त हो सके। जिन घरों के लोग बेघर हो गए हैं उनका पुनर्वास किया जाए तथा सरकार पुनर्वास नीति में संशोधन करें। उनका कहना है कि अगर सरकार ने तत्काल ध्यान नहीं दिया तो इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।

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