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केदारनाथ पैदल मार्ग पर फिर बड़ा भूस्खलन

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  • यात्रा रोकी गई, यात्रियों से सुरक्षित स्थानों पर रुकने की अपील
  • जंगल चटृी के ऊपर फंसे यात्री
  • प्रशासन की रेस्क्यू टीमें बचाव में जुटी

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ पैदल मार्ग पर देर रात जंगल चटृी के पास हुए भारी भूस्खलन से 20 मीटर के करीब सड़क पूरी तरह से टूटकर बह गई जिससे मार्ग पर आवागमन ठप हो गया। केदारनाथ धाम तथा सोनप्रयाग की तरफ से आने जाने वाले यात्रियों को अब रेस्क्यू कर निकाला जा रहा है। यात्रियों से प्रशासन ने अपील की है कि वह फिलहाल सुरक्षित स्थानों पर जहां भी है वहीं रुके।
गनीमत यह है कि जिस समय यह भूस्खलन हुआ उस समय वहां कोई नहीं था जिससे जान माल का कोई भारी नुकसान नहीं हुआ है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें अब यात्रियों को रेस्क्यू करने में जुटी हैं तथा मार्ग को ठीक करने का काम भी शुरू हो गया है।
31 अगस्त को केदारनाथ मार्ग पर हुए बड़े भूस्खलन के बाद केदारनाथ यात्रा को रोकना पड़ा था। बीते तीन—चार दिन पूर्व ही यात्रा को शुरू किया गया है तथा धाम में यात्रियों का पहुंचना शुरू हुआ है लेकिन इस मार्ग पर अभी भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दो दिन से मौसम साफ होने के कारण धाम में यात्रियों की चहल—पहल बढ़ी थी तथा हेली सेवाओं ने भी काम करना शुरू कर दिया था लेकिन अब एक बार फिर से बड़ा भूस्खलन होने से यात्रा बाधित हो गई है। इन दिनों हेली सेवा से ढाई—तीन सौ श्रद्धालु हर रोज धाम पहुंच रहे हैं तथा बड़ी संख्या में पैदल मार्ग से भी श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी था।
स्थानीय प्रशासन द्वारा मार्ग पर फंसे यात्रियों से अपील की गई है कि वह ध्ौर्य बनाए रखें और अभी सुरक्षित स्थानों पर ही रुके रहे। उन्हें जल्द से जल्द निकाला जाएगा। राज्य में भले ही बारिश का दौर अब थमता दिखाई दे रहा हो लेकिन भूस्खलन की घटनाओं में अभी कोई कमी आती नहीं दिख रही है। उधर चंपावत से प्राप्त समाचार के अनुसार स्वाला के पास एक बार फिर भूस्खलन से टनकपुर—पिथौरागढ़ मार्ग भी बंद हो जाने की खबर है। यही नहीं यमुनोत्री मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है तथा मार्ग पर आवाजाही में दिक्कतें हो रही है।

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