- जून 2017 में टिहरी के सुदूरवर्ती क्षेत्र से बरामद हुए थे प्राचीन हथियार
देहरादून। उत्तराखंड के टिहरी जिले के एक सुदूर गांव में सड़क परियोजना के लिए खुदाई के दौरान प्राचीन हथियारों का एक बड़ा जखीरा मिला था। लेकिन, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से प्राप्त एक आरटीआई के जवाब से पता चलता है कि विभाग ने संभवतः अब तक खोजी गई प्राचीन तलवार, भाला, खंजर आदि पर कोई अध्ययन नहीं किया है।
बता दें कि पेपोला ढुंग गांव (पटृीः ढुंग मनार) के पास सड़क निर्माण कार्य चल रहा था। जून 2017 में यहंा से लगभग 84 प्राचीन तलवार, भाला, खंजर आदि बरामद किए गए थे। सात साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी, एएसआई ने खोजी गई कलाकृतियों पर अभी तक कोई अध्ययन शुरू नहीं किया है।
देहरादून के राजू गुसाईं द्वारा प्राप्त आरटीआई जवाब में कहा गया है कि प्राचीन तलवार, भाला, खंजर आदि एएसआई देहरादून कार्यालय में रखे हुए हैं। लोहे के हथियारों और अन्य वस्तुओं पर कार्बन डेटिंग नहीं की गई है। मुख्यालय से कोई आधिकारिक पत्राचार नहीं किया गया है। खोजे गए प्राचीन हथियारों पर कोई अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई है।
पेपोला ढुंग गांव लंबे समय से सड़क संपर्क का इंतजार कर रहा है। जून 2017 में 1.2 किलोमीटर चंपटोक—पेपोला सड़क परियोजना पर काम चल रहा था। खोज के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने खोजे गए हथियारों पर नियंत्रण कर लिया। अगर एएसआई ने खोजे गए हथियारों पर कोई अध्ययन नहीं किया है, तो वह उन्हें ग्रामीणों को क्यों नहीं लौटा देते? कम से कम ग्रामीण उन्हें कहीं तो रखेंगे और लोगों को उन्हें देखने का मौका मिलेगा।




