देहरादून। मतदान समाप्त होने के बाद भाजपा विधायक और प्रत्याशियों द्वारा जिस तरह से भीतरघात को लेकर उग्र बयानबाजी सामने आ रही है उसने पार्टी की चिंता को ही नहीं बढ़ा दिया है बल्कि पार्टी में आपसी घमासान को तेज कर दिया है। खास बात यह है कि अगर भीतरघात के कारण पार्टी को बड़ा नुकसान होता है तो फिर यह घमासान और तेज होने से नहीं रोका जा सकेगा।
काशीपुर के सिटिंग विधायक हरबंस सिंह चीमा ने एक बार फिर कहा है कि पार्टी के गद्दारों ने इस चुनाव में पार्टी के खिलाफ जिस तरह से काम किया है उससे भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पार्टी में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 4 बार के विधायक हरभजन सिंह चीमा इस बार चुनाव नहीं लड़े हैं और उनके बेटे को पार्टी ने टिकट दिया था।
झबरेड़ा सिटिंग विधायक संजय गुप्ता तो अब यहां तक उतर आए हैं कि वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के खिलाफ तमाम तरह की अनर्गल बातें कर रहे हैं। उनकी संपत्ति की जांच की मांग से लेकर उन्हें पार्टी से निष्कासित कराकर ही दम लेने की चुनौती दे रहे हैं। वही चंपावत विधायक व भाजपा प्रत्याशी गहतोड़ी ने भी उग्र तेवर रखे हुए हैं। यह हालात तब है जब पार्टी के नेता उन्हें सार्वजनिक बयान न देने व हद में रहने की नसीहतें दे रहे हैं। फिर भी नेताओं की बयानबाजी जारी है और नए—नए नेता इस विरोध में शामिल होते जा रहे हैं। कई और भी नेता दबी जुबान से भीतरघात की बात को स्वीकार तो कर रहे हैं लेकिन चुनाव परिणाम से पूर्व खुलकर कुछ बोलना नहीं चाहते हैं। उन्हें लग रहा है कि परिणाम फिर भी उनके पक्ष में आ सकता है लेकिन इन हालातों ने पार्टी की मुश्किलें जरूर बढ़ा दी हैं।



