नई दिल्ली। कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी सीडब्ल्यूसी की मंगलवार को हुई बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं और उन्हें पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। बैठक की अध्यक्षता खड़गे ने की। इसमें पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक का मकसद विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर पार्टी की रणनीति तय करना था।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘संविधान ने चुनाव आयोग को पूरी ताक़त दी थी और उसे जनता के वोट का चौकीदार बनाया था। लेकिन आज वही वोटों का लुटेरा बन बैठा है। जिस सीईसी पर उनके अपने साथी भरोसा न करें, उस पर देश कैसे भरोसा कर सकता है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने 12 साल में लोकतंत्र की नींव को षड्यंत्रकारी तरीक़े से खोखला कर दिया है। साज़िश के तहत लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
खड़गे ने राहुल गांधी की तारीफ़ करते हुए कहा कि उन्होंने महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र में दस्तावेजों के साथ डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों और फॉर्म-6 की अनियमितताओं के बारे में गंभीर सवाल उठाए थे। अगर चुनाव आयोग ने तब गंभीरता दिखाई होती तो आज उसकी विश्वसनीयता नहीं गिरती। खड़गे ने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई सिर्फ चुनाव जीतने-हारने की नहीं है। लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। आम वोटर ही सबसे शक्तिशाली है, न कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री। उन्होंने सीईसी को तुरंत हटाने और प्रधानमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग दोहराई। कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी की ओर से पांच मांगें भी रखीं। इनमें मतदाता सूची में होने वाले बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करना, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें इसकी सूचना और अपील का अवसर देना, राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से संबंधित आवश्यक डेटा समय पर उपलब्ध कराना, गंभीर विसंगतियों के मामलों में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों और फैसलों में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।




