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नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों की पेशकश को ठुकराया !

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काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में 400 से अधिक लोगों की जान गई है। इस त्रासदी में 1000 से अधिक लोग अभी भी लापता है, जिनकी तलाश की जा रही है। आपदाग्रस्त नेपाल की मदद के लिए दुनिया के कई देशों ने मदद के लिए अपनी रेस्क्यू टीमें भेजने की पेशकश की, लेकिन नेपाल सरकार ने सख्ती के साथ कहा किसी की जरूरत नहीं है। नेपाल की ओर से कहा गया कि नेपाली सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अपने स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाने में सक्षम हैं।
काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन, भारत, अमेरिका, जापान, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने नेपाल को अपनी रेस्क्यू टीम देने की मदद की। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि फिलहाल उसको विदेशी बचाव दल की जरूरत नहीं है। अगर भविष्य में ऐसी कोई भी जरूरत पड़ती है, तो वह जरूर बताएगा।
समाचार एजेंसी के अनुसार, नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवत्तQा लोक बहादुर छेत्री ने बताया कि मदद की पेशकश स्वाभाविक है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां खोज और बचाव अभियान चला रही हैं। फिलहाल हमें ऐसी मदद की जरूरत नहीं है। बता दें कि नेपाल में गत 26 अगस्त को रासुवा नदी में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे भारी तबाही मची। इसके दो दिन बाद फिर दावा किया जा रहा है कि नवनिर्मित बैरियर झीलों से एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
नेपाल में आई आपदा के कुछ समय बाद भी भारत की ओर त्वरित एक्शन लेते हुए काठमांडू को 47.5 टन आपातकालीन सामग्री भेजी गई। ये मदद कुल दो खेपो में भेजी गई, जिसमें पहली खेप 26 अगस्त को रवाना हुई और दूसरी मदद की खेप गुरुवार को रवाना हुई, जिसमें 37 टन राहत सामग्री थी। इस सहायता में कंबल, दवाइयां, भोजन, जनरेटर और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल रहीं।
नेपाल की ओर से दुनिया अलग—अलग देशों की ओर से की गई मदद की पेशकश को नेपाल ने यूं ही नहीं ठुकराया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नेपाल सरकार ने ये फैसला नेपाली सेना और पुलिस की सिफारिश पर लिया। काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया कि अधिकारियों ने ये फैसला यह निर्णय 2015 के भूकंप के दौरान मिले अनुभव से प्रभावित है। साल 2015 में नेपाल में आए भूकंप में बड़ी संख्या में विदेशी रेस्क्यू टीमें पहुंची थी। उस दौरान बड़े स्तर पर विदेशी टीमों के आने से बचाव अभियान के दौरान तलमेल और समन्वय में परेशानियां सामने आई थीं। उस भूकंप में करीब 9,000 लोग मारे गए थे और 23 हजार से अधिक लोग लापता हुए थे।

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