- जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच उत्तराखंड पुलिसकर्मी ने लिया फैसला
मंच पर बैज रखकर जवान बोला- मैं युवाओं के खिलाफ खड़ा नहीं हो सकता
पुलिस कर्मी बोला-छात्रों पर लाठी नहीं चला सकता, भावुक संबोधन से गूंजा पंडाल
जंतर-मंतर आंदोलन के मंच से पुलिस के जवान ने किया इस्तीफा देने का ऐलान
देहरादून। दिल्ली के जंतर—मंतर में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे आंदोलन को भावनात्मक मोड़ दे दिया। उत्तराखंड पुलिस के एक जवान, शेर सिंह ने मंच पर पहुंचकर अपनी वर्दी का बैज उतार दिया और सार्वजनिक रूप से अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी। जवान ने कहा कि वह उन छात्रों के खिलाफ खड़ा नहीं हो सकता, जो अपने भविष्य और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। सोशल मीडिया में चल रहे इस वीडियो और उसमें कही बातों की पुष्टि नहीं करते हैं। ऐसा सुनने में आ रहा है कि यह जवान निलंबित है और शायद लंबे समय से अनुपस्थित चल रहा है। जैसे ही पुलिसकर्मी ने मंच से अपना बैज उतारा, पूरा पंडाल तालियों और नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में मौजूद छात्रों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। कई छात्र भावुक हो गए, जबकि मंच पर मौजूद आंदोलन के नेताओं ने इसे युवाओं के संघर्ष के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।
मंच से बोलते हुए पुलिस जवान ने कहा कि उसने वर्दी पहनते समय संविधान की रक्षा करने और जनता की सेवा करने की शपथ ली थी। लेकिन जब देश के युवा अपने अधिकारों की मांग कर रहे हों और उनके साथ बल प्रयोग हो, तो उसका अंतर्मन उसे चुप रहने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की तस्वीरों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उनका कहना था कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून—व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं की आवाज को दबाना उचित नहीं माना जा सकता।
पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा। देश के विभिन्न राज्यों से युवा, सामाजिक संगठन और कई जनप्रतिनिधि भी इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। हाल के दिनों में दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज की घटनाओं ने इस आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
उत्तराखंड पुलिस के जवान द्वारा मंच से पुलिस कर्मी के इस्तीफा देने की घोषणा को आंदोलन में मौजूद युवाओं ने विशेष महत्व दिया। छात्रों का कहना था कि यह केवल एक व्यत्तिQ का निर्णय नहीं, बल्कि उस पीड़ा की अभिव्यत्तिQ है जिसे देश का युवा महसूस कर रहा है। जवान ने अपने संबोधन में उत्तराखंड के युवाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि रोजगार और पारदर्शी भर्ती हर युवा का अधिकार है। उन्होंने अपील की कि सरकार युवाओं की आवाज को विरोध नहीं, बल्कि सुझाव के रूप में सुने।
हालांकि उत्तराखंड पुलिस के जवान के इस सार्वजनिक इस्तीफे ने पूरे मामले को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है। यदि इस्तीफा औपचारिक रूप से संबंधित विभाग को सौंपा गया है, तो विभागीय स्तर पर इसकी प्रक्रिया और जांच भी चर्चा का विषय बन सकती है। जंतर—मंतर के मंच पर बैज उतारकर दिया गया यह इस्तीफा अब केवल एक प्रशासनिक घटना नहीं रह गया है। आंदोलन में शामिल युवाओं के लिए यह व्यवस्था के भीतर से उठी एक ऐसी आवाज बन गया है, जिसने उनके संघर्ष को नया नैतिक बल देने का काम किया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस आंदोलन और उससे जुड़ी भावनाओं को किस तरह संबोधित करती है। फिलहाल इतना तय है कि जंतर—मंतर के मंच से उतरा वह बैज देशभर में युवाओं के आंदोलन की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल हो चुका है।




