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युवाओं के भविष्य की बात

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नेता विपक्ष राहुल गांधी बीते कल राजस्थान के कोटा में जिसे प्रतियोगी शिक्षा की तैयारियों के संदर्भ में सबसे बड़ा हब माना जाता है छात्र—छात्राओं के बीच पहुंचे और अपने अंदाज में उनसे रूबरू हुए। अब तक देश के यह युवा पीएम मोदी से परीक्षा पर संवाद और उनके मन की बात सुनते रहे हैं। लेकिन देश की इस युवा पीढ़ी को जिनकी तादाद आधी आबादी के बराबर है उन्हें रोजगार और बेहतर भविष्य दिलाने में कितनी कामयाब रही है इस सवाल का जवाब गृहमंत्री शाह के उस बयान से समझा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि पकोड़े तलना भी रोजगार है। अथवा उन 80 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से जाना जा सकता है जिन्हें लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का उदय हुआ है। इस युवा देश के युवाओं की प्रतिभा का जिस तरह से दुरुपयोग हुआ है उससे सिर्फ देश के युवाओं का भविष्य ही नहीं देश का भविष्य भी चौपट हो रहा है। इस सत्य से इनकार नहीं किया जा सकता है। जेन जे की रोजगार और शिक्षा से जुड़ी तमाम समस्याओं को जानने और अपने विचारों से युवाओं को अवगत कराने कोटा में जब राहुल गांधी पहुंचे तो युवाओं की उस स्वस्फूर्ती संख्या को देखकर उनके मुंह से बरबस ही निकल पड़ा ओ माय गॉड। यह विस्मय स्वाभाविक इसलिए भी था क्योंकि उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में भीड़ वह भी युवाओं की इससे पहले कभी नहीं देखी थी। यह कोई रैली नहीं थी संवाद कार्यक्रम था। इस भीड़ को किराए पर कोई लालच देकर भी नहीं जुटाया गया था। राहुल गांधी ने भी किसी कंपनी के सीईओ के अंदाज में युवाओं से वार्ता की और उनके सामने अपनी सोच को साझा किया। उन्होंने मंच पर जाते ही साफ कर दिया था कि इस शाम में न कोई राजनीतिक बातेें होगी न कांग्रेस न बीजेपी न किसी नेता की बात करेंगे सिर्फ युवाओं की श्ौक्षिक समस्याओं और रोजगार के मुद्दे पर ही बात करेंगे। उन्होंने सभी पांच प्रमुख प्रतियोगिताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें सिर्फ 100 में 16 को ही रोजगार पाने का मौका मिल पाता है यानी यहां जमा युवाओं की कुल संख्या में से सिर्फ 36 को ही बाकी सभी का भविष्य अनिश्चितता के अंधेरे में गुम हो रहा है साथ ही वह यह भी बताते हैं कि इन पांच परीक्षाओं को आयोजित कराने के लिए सरकार कितनी फीस वसूलते हैं जितनी फीस वसूली जाती है वह रकम इतनी बड़ी है कि उससे सरकार के तीन मंत्रालयों का साल भर का खर्च चलाया जा सकता है। राहुल गांधी इन परीक्षाओं की तैयारियों पर होने वाले खर्च की जानकारी इन छात्रों से ही लेते हैं तथा उनका परिवार इसके लिए धन कैसे जुटाता है? वह इन छात्रों से ही पूछते हैं कि जब किसी प्रतियोगिता का पेपर लीक हो जाता है या वह परीक्षा में पास नहीं हो पाते हैं तो किस तरह के मानसिक दबाव का सामना करते हैं वह उन अभ्यार्थियों का मुद्दा उठाते हैं जिन्होंने नीट का पेपर लीक होने के बाद अपने मां—बाप के नाम भावुक पत्र लिखकर अपनी जीवन लीला को समाप्त कर दिया। न सिर्फ राहुल गांधी ने बल्कि तमाम छात्र—छात्राएं इस बात पर सहमत दिखे कि यह सब कुछ इसलिए हो रहा है क्योंकि देश की शिक्षा प्रणाली और सिस्टम खराब है जिसे बदलने की जरूरत है। कैसे इसे बदला जा सकता है इसके लिए क्या—क्या सुधार किए जाने जरूरी है इस मुद्दे पर राहुल ने अपने विचार भी रखे और युवाओं से सुझाव भी मांगे। उनके इस अद्भुत तरीके और अंदाज से छात्र भी खुश दिखे। लेकिन यह चुनौती बहुत आसान भी नहीं है राहुल गांधी इस समस्या का समाधान किस तरह और किस हद तक कर पाते हैं? भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन राहुल इन युवाओं की कितनी बड़ी उम्मीद है इस संवाद में जुटे छात्र—छात्राओं की भीड़ इसकी गवाही जरूर दे रही है।

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