Home उत्तराखंड देहरादून चुनाव में चंगे, बाकी सब में नंगे

चुनाव में चंगे, बाकी सब में नंगे

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देश की आम जनता और विपक्षी दलों के नेता खूब छाती पीट रहे हैं मगर भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने में असफल साबित हो रहे हैं। छोटे से छोटे और बड़े से बड़े चुनाव में भाजपा उन्हें लगातार हराती जा रही है। मुद्दे चाहे कितने भी प्रभावी क्यों न हो और चुनावी प्रचार में चाहे विपक्षी नेता कितना भी पसीना क्यों न बहा रंहे हो लेकिन जब परिणाम आते हैं तो जीत भाजपा की ही होती है वह भी भारी बहुमत वाली। विपक्ष अपनी हार पर सिर्फ हैरान होता ही दिखाई देता है 2024 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा बहुमत के आंकड़े से पीछे रहे गई थी तब विपक्ष को ऐसा लगा जरूर था कि अब हवा का रुख बदलेगा लेकिन हरियाणा से लेकर महाराष्ट्र और बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक भाजपा ने विपक्ष को ऐसी पटकनी दी कि वोट चोर गद्दी छोड़ जैसे नारे भी उसका बाल बांका नहीं कर सके। भाजपा की इन जीतों से उसका हौसला इस कदर बुलंद हो गए गया है कि उसके नेता अब यह कहने में भी कतई संकोच नहीं करते कि कोई चाहे कुछ भी कर ले जीतेगी तो भाजपा ही। बीते कुछ दिनों से देश में आर्थिक सुनामी की बात चर्चाओं के केंद्र में है समूचा विपक्ष बढ़ती महंगाई बेरोजगारी पेपर लीक से लेकर एफ स्टीन फाइल तक के मुद्दों को लेकर फाइल के पन्ने पलट चुका है। देश में तेल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतें तथा डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में हुई रिकॉर्ड गिरावट तथा देश के इतिहास में सबसे बड़े 15 लाख करोड़ के घोटाले तक तमाम ऐसे मुद्दे हैं कि जनता भी सरकार को पानी पी पी कर खूब कोस रही है। तथा मीडिया भी इस जनता से यह पूछ रहा है कि जब वर्तमान में इतनी सारी समस्याएं हैं और जनता इस कदर परेशान और गुस्से में है तो फिर भी वह भाजपा को क्यों वोट दे रही है क्यों वह लगातार जीतती जा रही हैं ? इस पर लोग कहते हैं कि इसकी असल वजह वह मीडिया और भाजपा का चुनावी मैनेजमेंट ही है जिसने संवैधानिक संस्थाओं की तरह ही अपना कब्जा किया हुआ है। भाजपा देश में खूब हिंदू—मुस्लिम कर रही है और मीडिया सच दिखाने या बताने की जगह सिर्फ सरकार की छवि बिखेरने वाले समाचार तक ही सीमित होकर रह गया है। कुछ लोग तो यहां तक कह देते हैं कि यह सब देश की बिकाऊ मीडिया के कारण ही हुआ है। सत्ता में बैठे लोग भले ही भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का दावा कर रहे हो और देश की अर्थव्यवस्था को तीसरी नंबर की बता रहे हो लेकिन 5 ट्रिलियन वाले इसकी हालत यह है कि वह अब तीसरे नंबर से खिसक कर छठे पर पहुंच गई है तथा प्रति व्यक्ति आय में कई देशों की सूची में भारत अब 150 में स्थान पर लुढ़क चुका है बीते साल की आरबीआई की रिपोर्ट बताती है कि गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या में 124 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यानी कि आम आदमी अब अपने घर का सोना गिरवी रखकर दाल रोटी और कपड़े का जुगाड़ कर रहा है। देश के शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है विदेशी निवेशक अपना रुपया निकाल—निकाल कर भाग रहे हैं। जिससे छोटे निवेशकों को भारी नुकसान हो रहा है। सत्ता में बैठे लोग भले ही इस आर्थिक संकट के लिए खाड़ी युद्ध को कारण मान रहे हो लेकिन यह सब कुछ एक दो दिन या महीनो में नहीं हुआ है। देश का गरीब आदमी और अधिक गरीब हो रहा है। कल तक मोदी 25 करोड लोगों को गरीबों की रेखा से ऊपर लाने का दावा करते थे वह अब आधी आबादी को गरीबी के दलदल में धसने की बात कह रहे हैं। 12 साल के शासन में आपके कितने अच्छे दिन आए हैं इसकी समीक्षा आप खुद करें।

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